संतोष गंगवार बने झारखंड के राज्यपाल 

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बरेली। भाजपा सरकार में लोकसभा सीट से आठ बार सांसद रह चुके संतोष कुमार गंगवार झारखंड के राज्यपाल नियुक्त किए गए हैं। उन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्यपाल नियुक्त किया है। संतोष गंगवार अटल बिहारी और मोदी सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। सरल स्वभाव वाले संतोष कुमार गंगवार बरेली मंडल में एकमात्र ऐसे राजनेता होंगे जो राज्यपाल बने है। लोकसभा चुनाव में उन्हें टिकट नहीं दिया गया था लेकिन प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह ने चुनाव के दौरान कहा था कि  खुद कहा था कि संतोष गंगवार को कुछ अलग से स्थान दिया जाएगा। संतोष कुमार गंगवार के प्रयास ही बरेली संसदीय सीट भाजपा के खाते में गयी थी। संतोष कुमार गंगवार ने शनिवार रात एक बजे पत्रकारों से कहा कि मुझे जो जिम्मेदारी मिली, उस पर खरा उतरूंगा। यह बात झारखंड के राज्यपाल बनने की सूचना मिलने पर  संतोष कुमार गंगवार ने कहा।नई भूमिका मिलने से अभिभूत संतोष ने कहा कि पार्टी ने हमेशा बिना मांगे मुझे सबकुछ दिया। अब राज्यपाल बनाकर मेरे प्रति विश्वास व्यक्त किया है। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का भी आभारी हूं। उन्होंने मेरे लिए नई जिम्मेदारी दी है, उस पर खरा उतरूंगा। क्षेत्र की जनता का भी आभार, जिसने मुझ जैसे सामान्य कार्यकर्ता पर लगातार भरोसा जताया। लगातार अटूट विश्वास और प्यार बनाए रखा। इस बीच रात में ही उनके भारत सेवा ट्रस्ट स्थित आवास पर प्रमुख कार्यकर्ताओं की आवाजाही शुरू हो गई। सभी ने मिठाई खिलाकर प्रसन्नता जताई और संतोष गंगवार हमेशा की तरह हाथ जोड़कर अभिवादन स्वीकारते रहे।    वर्ष 1948 में जन्मे और बरेली कॉलेज से बीएससी की पढ़ाई के साथ ही एलएलबी की उपाधि हासिल करने वाले संतोष गंगवार का चुनावी सफर वर्ष 1984 में शुरु हुआ था। राजनीति में कैसे आए, इस पर संतोष कहते हैं कि आपातकाल के दौरान जेल जाना पड़ा। एक वर्ष जेल में काटने के बाद जब बाहर आए तो उनके सोचने का तरीका थोड़ा बदल गया। इसी बीच थोड़ा समय बीतने के पश्चात जनता पार्टी की बरेली जिला कमेटी में उन्हें महामंत्री का पद प्रस्तावित किया गया तो उन्होंने स्वीकार कर लिया। हालांकि 1984 में पहला चुनाव वह कांग्रेस उम्मीदवार पूर्व राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद की पत्नी आबिदा बेगम से हार गए थे। इसके बाद 1989 में वह फिर से लोकसभा चुनाव लड़े और जीत हासिल कर पहली बार सांसद बने। इसके बाद वर्ष 1991, 1996, 1998, 1999, 2004 में लगातार जीत का सेहरा उन्हीं के सिर सजा। उनकी पहचान कुर्मी बिरादरी के प्रभावशाली नेता के रूप में है। हालांकि वह सभी वर्गों में लोकप्रिय हैं। वर्ष 2009 में कांग्रेस से प्रवीण सिंह ऐरन ने उनका विजय रथ रोका था। उसके बाद 2014 व 2019 में वह फिर चुनाव लड़े और जीत हासिल की। आठ बार संसद में प्रतिनिधित्व कर चुके पूर्व सांसद संतोष गंगवार का नया ‘पता झारखंड का राजभवन है। शनिवार देर रात उन्हें राज्यपाल  बनाए जाने की घोषणा हुई, जिसकी भूमिका पहले ही बन चुकी थी।इस बीच लोकसभा चुनाव के दौरान स्थानीय स्तर पर कई बार उठापटक हुईं। संतोष गंगवार हर बार मौन और “संतोष की राह पर चलना “को अपनी आवाज बनाकर आगे बढ़ते गए। ‘मेरे लिए क्या करना है, यह पार्टी तय करें’…यह बात हर बार दोहराने वाले संतोष को पार्टी ने वही भूमिका दी, जिसका अनुमान लगाया जा रहा था। चुनावी जनसेभाओं के मंच पर इसके संकेत मिल चुके थे। संतोष गंगवार ने लोकसभा बरेली  से  चुनाव लड़ने की इच्छा जताई थी मगर, चुनाव लड़ने वालों की लिस्ट में उनका नाम नहीं  था। उस समय माना जाने लगा था कि अब उनकी  राज्यपाल बनने की अटकलें लगाई जाने लगी थीं। वह ऐसी चर्चाओं को यह कहकर किनारे कर देते थे कि पार्टी ने मेरे लिए जो भी सोचा होगा, वह उचित ही होगा। वह सब्र किए बैठे थे, दूसरी ओर दिल्ली में उनकी भूमिका तैयार की जा रही थी। इसका संकेत चुनावी जनसभाओं में मिलना शुरू हो चुका था। तीन – मई को हार्टमैन रामलीला मैदान में चुनावी जनसभा करने आए गृह मंत्री अमित शाह ने मंच से घोषणा की थी कि संतोष गंगवार के लिए बड़ी जिम्मेदारी तय रखी है। वह बड़े नेता हैं, नई भूमिका में दिखेंगे। इससे पहले फरवरी में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पीलीभीत की जनसभा में गए तो संतोष गंगवार को अपने बगल में बैठाया था। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बरेली में रोड शो करने आए तब भी उनके वाहन में संतोष साथ खड़े थे। पार्टी जानती थी कि वह पिछड़ा वर्ग का बड़ा चेहरा हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी जनसभा में कह गए थे कि यह चुनाव संतोष के नेतृत्व में लड़ा जा रहा है। संतोष  की मदद से  बरेली सीट पर छत्रपाल सिंह गंगवार सांसद बने,  जिसके बाद पूर्व सांसद हो चुके व संतोष का कद और बढ़ा। पार्टी के नेतृत्व ने माना कि मैदान के बाहर रहने के बावजूद उन्होंने बरेली की सीट को बचाए रखने में भूमिका निभाई। भारत सेवा ट्रस्ट आवास पर बधाइयों का सिलसिला चल रहा  है ।

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