योगी ने दिया प्रखर हिंदुत्व के एजेंडे पर खड़े होने का संदेश, फैसले से उपचुनाव में फायदा मिलने की उम्मीद

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लखनऊ। करीब 18 साल बाद दुकानों व व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर मालिकों का नाम लिखने के कानून को सख्ती से लागू करके मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक तीर से दो निशाने साधे हैं। एक यह कि जो लोग इस कानून को सिर्फ कागजी मान रहे थे, उन्हें अहसास कराया गया है कि जो कानून बना है वह सख्ती से लागू भी होगा। दूसरा यह कि उन्होंने इस आदेश के जरिये विपक्ष को संदेश देने का प्रयास किया है कि वे आज भी अपने हिंदुत्व के एजेंडे के साथ उसी मजबूती से खड़े हैं, जिसके लिए वे जाने जाते हैं। दरअसल लोकसभा चुनाव में हिंदू वोट बैंक के बंटने से भाजपा को बड़ा नुकसान हुआ है। इसे लेकर विपक्ष ने जनता के बीच यह संदेश देना शुरू कर दिया कि भाजपा के हिंदुत्व के एजेंडे की धार कुंद हो रही है। यही नहीं विपक्ष ने जनता में यह अवधारणा बनाने की भी कोशिश शुरू कर दी कि भाजपा के साथ ही हिंदू हृदय सम्राट के तौर पर पहचान रखने वाले सीएम योगी आदित्यनाथ का प्रखर हिंदुत्व कार्ड अब बेअसर होने लगा है। इस बीच लोकसभा चुनाव में हार को लेकर भाजपा में ही एक-दूसरे को कठघरे में खड़ा करने का काम शुरू हो गया। कुछ लोगों ने लामबंद होकर हार का ठीकरा सिर्फ सरकार के सिर फोड़ना शुरू कर दिया तो कुछ लोगों ने सरकार के कामकाज के तौर-तरीके पर सवाल उठाना शुरू कर दिया। इसके बाद उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी के दिल्ली दौरे को भी सीएम योगी को घेरने से जोड़कर देखा जाने लगा। हालांकि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने इन सारी अफवाहों की हवा ही नहीं निकाली, बल्कि भाजपा के भीतर सरकार पर सवाल उठाने वाले लोगों को यह संदेश भी दे दिया है कि हार के लिए सिर्फ सरकार जिम्मेदार नहीं है, बल्कि संगठन के स्तर पर भी चूक हुई है। संघ परिवार भी योगी के पक्ष में खड़ा है। भाजपा के बीच मचे सियासी घमासान को भी विपक्ष ”आपदा में अवसर” मानते हुए मुख्यमंत्री के प्रखर हिंदुत्व के पैरोकार की छवि को कमजोर बताने में जुट गया। उधर पार्टी में योगी विरोधियों के आरोपों को खारिज करते हुए भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने यह साफ संदेश दे दिया है कि योगी को आज भी हिंदुत्व के बड़े ब्रांड हैं। माना जा रहा है कि इसके बाद ही योगी ने तय किया मेरठ से हरिद्वार मार्ग पर कांवड़ मार्ग पर दुकानदारों के नाम लिखने के कानून को कड़ाई से लागू करके वे अपने प्रखर हिंदुत्व को धार दे सकते हैं। माना जा रहा है कि प्रदेश के 10 विधानसभा सीटों के लिए होने वाले चुनाव से पहले योगी सरकार ने यह फैसला लेकर फिर से ध्रुवीकरण को मजबूत करने की कोशिश की है। इन 10 सीटों में गाजियाबाद, कुंदरकी और मीरापुर कांवड़ यात्रा प्रभावित क्षेत्र हैं। इसलिए माना जा रहा है कि अगर सरकार के फैसले से लोकसभा चुनाव में बिखरे हिंदू मतदाता एकजुट होंगे तो इसका फायदा भाजपा को हो सकता है। हालांकि गाजियाबाद जहां भाजपा के खाते की है तो मीरापुर रालोद के खाते की है जबकि कुंदरकी पर सपा का कब्जा था।

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