अखिल भारतीय कवयित्री सम्मेलन संस्था का 25वा स्थापना दिवस उत्सव के रूप में मनाया गया

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बदायूँ।।अखिल भारतीय कवयित्री सम्मेलन नामक अन्तर्राष्ट्रीय संस्था जो शार्ट में AIPC नाम से अधिक प्रसिद्ध है – का 25 वां स्थापना दिवस रजत-जयन्ती उत्सव के रूप में जिले की संस्था सदस्याओं और प्रतिष्ठित महिला साहित्यकारों द्वारा ‘पी डब्ल्यू डी के पास स्थित प्रमिला गुप्ता के आवास पर मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ अध्यक्षता कर रहीं डॉ, कमला माहेश्वरी कमल प्रभारी बदायूंँ व उत्तर प्रदेश अध्याय ,सदस्या सुनीता मिश्रा संस्था प्रवक्ता, प्रमिला गुप्ता ,मंजू गुप्ता के कर कमलों द्वारा मां शारदे के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर किया गया। हौसलों की उड़ानों , से हम तो उड़े । थे अवनि मात्र बस,पर गगन में चढ़े । देख लीने नजारे , असम्भव से भी ,नारी हैं नाज से,ध्वज ये लेकर खड़े ।। सुंदर व सरस स्वर में सरस्वती वंदना सुनीता मिश्रा द्वारा प्रस्तुत की गई।डॉ कमला माहेश्वरी कमल ने संस्था का परिचय तथा उसकी महत्ता बताई -“उन्होंने बताया कि इस रजिस्टर्ड संस्था की स्थापना डॉ. लारी आजाद के द्वारा 30 अप्रैल 2000 को की गई थी ।जिसमें उनके साथ प्रशंसित साहित्यकार समाज- -सुधारक ,सदी की  बड़ी कवयित्री अमृता प्रीतम जी, फिल्म गीतकार माया गोविंद पद्मश्री, पद्मा सचदेव जी, प्रभजोत कौर जी और ज्ञानपीठ अवार्डी इंदिरा गोस्वामी जी तथा फिल्म गीतकार माया गोविंद पद्मश्री जी आदि के सानिध्य में की गई थी, जिसमें कई प्रान्तों के राज्यपाल , मुख्यमंत्री ,केंद्रीय और राज्य मंत्री ,कला और संस्कृति के अन्य प्रशासनिक क्षेत्रों की हस्तियांँ भी सम्मिलित हुई थीं ।”  सुनीता मिश्रा व प्रमिला गुप्ता ने क्रमश: बताया-” इस संस्था का उद्देश्य कवयित्रियों को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मंच प्रदान करना, महिलाओं की सामाजिक-सांस्कृतिक जागृति और उत्थान, लिखित साहित्य को बढ़ावा, नारीवादी आत्मीयता का विकास, कवयित्रियों की समस्याओं के निराकरण हेतु प्रयास , भाषाई सद्भाव, साहित्य प्रकाशन,  जरूरतमन्द अनाथ विधवा या अकेली वृद्ध महिलाओं की मदद, नारी सशक्तिकरण और  समानता, महिला साहित्य प्रकाशन तथा भारत और विश्व पर्यटन की खोज आदि रही है।

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इस तरह यह संस्था ज्वलंत प्रश्नों के साथ पूर्व गृहीत दाय पूर्ण निष्ठा से निभा रही है । “तीन देशों के राष्ट्रीय अध्यक्ष इसके सदस्य हैं । अभी जल्दी में ही पंजाब में कार्यक्रम सम्पन्न हुआ है जिसमें हमारे बदायूँ की प्रतिनिधि सुनीता मिश्रा और प्रमिला गुप्ता सम्मानित हुईं थीं । भूटान और यूनान में अगला कार्यक्रम कार्यक्रम वांछित है । कार्यक्रम में बदायूं की प्रसिद्ध साहित्यकारों में डॉ ममता नौगरैया, सरला चक्रवर्ती,डॉ उमा सिंह गौर, सीमा चौहान, डॉ गार्गबुलबुल,शिल्पी शर्मा,संध्या सिंह, श्रद्धा सारस्वत,सरिता सिंह, प्रमिला गुप्ता, डॉ कमला माहेश्वरी , सुनीता मिश्रा, डॉ शुभ्रा माहेश्वरी ने कविताओं की गंगा बहायी।कवयित्री सीमा चौहान ने गंगा की व्यथा को कुछ यूं कहा- सृष्टि के संताप सब वह सह रही है।है अनंता आदि से वह बह रही है। डॉ उमा सिंह गौर ने अपने पिता की रचना को पढ़ते हुए कहा -अब मुझको ऐसा लगता है, जैसे सब-कुछ हार गया हूं।।सरला चक्रवर्ती ने कहा कि पर्व है लोकतंत्र का, चले इसे मनाने।मीठी-मीठी बोलियों की चले दुकानें सजाने।। प्रमिला गुप्ता ने कहा – जाने कितनी अजीज हो तुम ख्वाबों में आते हो कितने करीब हो तुम। वरिष्ठ साहित्यकार डॉ ममता नौगरैया ने कहा -बात बात पर आंसू लाती नहीं, रंग अपने में भी भरने लगी हूं। डॉ कमला माहेश्वरी ने कहा- वामन सा अवतार ले, जल थल नभ सब माप।मानक नवल बना रही, नारि आज गुन आप ।।नारी अब नारायणी, बन उभरी है आज।काँधे से काँधा मिला , करे संग नर काज।।संध्या सिंह ने कहा आखिर क्यों टूटती हूं उजड़ती हूं ,रोज तिनका तिनका बिखरती हूं मैं। श्रृद्धा सारस्वत ने कहा – भूल पाएंगे नहीं हमको भुलाने वाले, लौट कर आएंगे फिर छोड़कर जाने वाले।। शिल्पी शर्मा ने कहा पत्नी बेटी बहन मां बन। जीवन देने वाली तो सरिता सिंह ने कहा प्रेम का जल तरल नहीं होता, हर नदी में कमल नहीं होता। डॉ इन्दु शर्मा ने कहा -बेटी अंश है तो बेटा वंश है। डॉ गार्गी बुलबुल ने कहा आओ फिर से दिया जलाएं दधीचि की हड्डियां बनाएं। सुनीता मिश्रा ने कहा -द्वार षडयंत्रों के बंद कर दीजिए ,लक्ष्य संधान हेतु प्रण कीजिए। संचालन कर रही डॉ शुभ्रा माहेश्वरी ने कहा -वो सामान की लिस्ट और बीबी बच्चों का मायूस चेहरा नजर आता है।।साहेब मर्द हूं दर्द दिल में लेकर हर पल बस मुस्कुराता हूं।। मुख्य बात रही कि जो जिला बदाऊं है के लेखक स्वतंत्र प्रकाश गुप्ता ने लखनऊ से वीडियो काल पर जुड़ते हुए बलवीर सिंह रंग की रचना सुनायी।कार्यक्रम का कुशल संचालन कवयित्री डॉ शुभ्रा माहेश्वरीजी द्वारा किया। अन्त में राष्ट्र – गान व धन्यवाद ज्ञापन से कार्यक्रम का समापन किया गया ।

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