श्रीमद्भागवत कथा के छठे दिन भगवान श्री कृष्ण द्वारा किया गया कशं वध की कथा का वर्णन

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कुंवरगांव। सलारपुर ब्लाक क्षेत्र के ग्राम पंचायत बादल में श्रीमद्भागवत गीता कथा का आयोजन चल रहा है। जिसमें छठे दिन की कथा में कथा साध्वी अंजलि शास्त्री ब कबिता शास्त्री के मुखारविंद से भगवान श्री कृष्णा ने कंस का वध किस प्रकार से किया था उसका सुंदर वर्णन किया गया। देखते ही देखते कंस के पांचों प्रमुख पहलवान श्री कृष्ण और बलराम द्वारा मारे गए।भगवान श्री कृष्ण और बलराम की इस अद्भुत लीला को देखकर दर्शकों को बड़ा आनंद हुआ। चारों ओर उनकी जय-जय कार और प्रशंसा होने लगी, परंतु कंस को इससे बहुत दुख हुआ। वह और भी चिढ़ गया। जब उसके प्रधान पहलवान मारे गए और बचे हुए भाग गए, तब उसने बाजे बंद करवा दिए। जिस प्रकार गरुड़ सांप को पकड़ लेता है वैसे ही श्री कृष्ण ने कंस को पकड़ लिया।

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कंस का मुकुट गिर गया। भगवान ने केश पकड़ कर उसे मंच से धरती पर पटक दिया। फिर श्री कृष्ण स्वयं उसके ऊपर कूद पड़े। उनके कूदते ही कंस की मृत्यु हो गई कंस निरंतर शत्रु भाव से श्री कृष्ण का ही चिंतन करता रहता था। वह खाते-पीते, उठते-बैठते अपने सामने भगवान श्री कृष्ण को ही देखता रहता था। इसके प्रभाव से उसे सारूप्य मुक्ति की प्राप्ति हुई। सबके देखते ही देखते उसके शरीर से एक दिव्य तेज निकल कर श्री कृष्ण में समा गया । कंस के मरते ही कङ्क इत्यादि उसके आठ छोटे भाई श्री कृष्ण और बलराम जी का वध करने के लिए दौड़े परंतु बलराम जी ने क्षण भर में ही उन सब का काम तमाम कर डाला। उस समय आकाश में दुंदुभियां बजने लगीं। ब्रह्मा, शंकर तथा इंद्र आदि देवता बड़े आनंद से भगवान श्री कृष्ण पर पुष्पों की वर्षा करते हुए उनकी स्तुति करने लगे।

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