रेडियो कॉलर आईडी लगाकर पीटीआर में छोड़ी गई बाघिन, टीम रखेगी नियमित नजर

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पीलीभीत। कलीनगर थाना क्षेत्र के अटकोना गांव से पकड़ी गई बाघिन को छठें दिन पीटीआर के जंगल में छोड़ दिया गया। गले में कॉलर आईडी लगाकर बाघिन को छोड़ा गया। अब पीटीआर की एक टीम बाघिन पर नियमित नजर भी रखेगी। कतर्नियाघाट घाट और पीटीआर के पशु चिकित्सक की मौजूदगी में बाघिन को जांच कर छोड़ा गया।जानकारी के अनुसार, कलीनगर क्षेत्र के अटकोना गांव में 26 दिसंबर को किसान सुखविंदर सिंह के घर से बाघिन को रेस्क्यू किया गया था। बाघिन के शांत स्वभाव को देख विशेषज्ञों ने उसके स्वस्थ होने को लेकर आशंका जताई थी। इसके बाद बाघिन के खून के सैंपल आईवीआरआई भेजे गए थे। जांच रिपोर्ट में बाघिन को कोई बीमारी नहीं निकली। मामला सुर्खियों में आने के बाद एनटीसीए के डीआईजी ने भी बाघिन को आकर देखा व उसे स्वस्थ पाया था।  जांच रिपोर्ट आने के बाद दो दिन तक टीम ने बाघिन के स्वभाव को देखा। बाघिन को निगरानी में रखने का फैसला लिया गया। कतर्नियाघाट के चिकित्सक डॉ. दीपक को पीटीआर भेजा गया। माला गेस्ट हाउस में बाघिन को बेहोश कर उसके गले में कॉलर आईडी लगाई गई। इसके बाद रविवार दोपहर को डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल की मौजूदगी में पीटीआर के जंगल में बाघिन को छोड़ दिया गया। रेडियो कॉलर एक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस है। इसमें लगे ट्रांसमीटर के जरिए सिग्नल का आदान प्रदान होता है, जिससे जगह की जानकारी होती रहती है। इससे कई किलोमीटर तक वन्य जीव की लोकेशन ट्रेस की जा सकती है। इनमें वीएचएफ, जीपीएस, सैटेलाइट कॉलर्स शामिल हैं। रेडियो कॉलर आमतौर पर नायलॉन या चमड़े से बनाया जाता है। इससे टाइगर की गर्दन को नुकसान नहीं पहुंचता। इसे बाघ की गर्दन में बांधा जाता है।  ऐसा पहली बार हुआ है कि किसी बाघिन को कॉलर आईडी लगाकर पीटीआर के जंगल में छोड़ा गया हो, हालांकि 2019 में लगातार इंसानों पर हमलावर हो रहे एक बाघ को कलीनगर के गांव चांदूपुर से बेहोश कर पकड़ा गया था। अफसर के निर्देश के बाद बाघ को कॉलर आईडी लगाकर दुधवा के जंगल में छोड़ा गया था। हालांकि कुछ समय बाद बाघ की लोकेशन न मिलने की बात भी सामने आई थी। ऐसे में अटकोना गांव से पकड़ी गई बाघिन को कॉलर आईडी लगाकर छोड़ने के बाद उसकी नियमित निगरानी पीटीआर प्रशासन के लिए चुनौती बनी रहेगी।  पीटीआर के डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल ने बताया कि बाघिन के स्वास्थ्य की जांच कर आला अफसरों के निर्देश पर कालर आईडी लगाई गई है। उसे पीटीआर के कोर जोन के क्षेत्र में छोड़ दिया गया।

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