इतिहासकारों ने देश के क्रांतिकारियों के साथ न्याय नहीं किया

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बरेली। संस्कृति विभाग भारत सरकार एवं अखिल भारतीय साहित्य परिषद ब्रजप्रान्त के तत्वावधान में 105 दिवसीय श्रृंखला का समापन समारोह में प्रान्त के चालीस से भी ज्यादा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, क्रांतिकारियों के परिवार जनों सहित प्रमुख क्रांतिकारी अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह के प्रपौत्र शरद रोशन सिंह को भी प्रदेश के वनमंत्री डॉ अरुण कुमार ने सम्मानित किया गया। इसके साथ ही अन्य सम्मानित होने वालो में धर्मेेद्र कुमार मिश्र, राज त्रिपाठी, राजीव गुप्त, तरुण राज सिंह, शरद मिश्र, दीपक अग्रवाल, रिंपल सक्सेना, शचीन्द्र सक्सेना, हर्ष अग्रवाल, अमर आनन्द राजेन विद्यार्थी, मुन्नू आदि शामिल रहे। उनको भी शाल और स्मृति चिन्ह देकर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वनमंत्री डा. अरुण कुमार, डॉ. उमेश गौतम, मुख्य वक्ता संजय मिश्र हर्ष, अतिविशिष्ट अतिथि पवन पुत्र बादल, डा, विनोद पागरानी और महेन्द्र सिंह बासु की उपस्थिति में सम्मानित किया गया। आई. एम. ए. हाल में हुए कार्यक्रम में निबन्ध और भाषण प्रतियोगिता के 300 छात्र-छात्राओं को सुरेश बाबू मिश्रा, शशिवाला राठी, एस पी मौर्य, आनंद गौतम, निर्भय सक्सेना, प्रवीण शर्मा, सुरेंद्र बीनू सिन्हा, प्रकाश चंद्र, आदि ने प्रमाण-पत्र और स्मृति चिन्ह देकर पुरस्कृत किया । कई साहित्यकारों को उनकी साहित्य सेवा एवम लोकतंत्र सेनानी वीरेंद्र अटल, विनोद गुप्ता, रमेश गुप्ता आदि को उनकी अनुकरणीय सेवाओं के लिये सम्मानित किया गया। समारोह का प्रारंभ अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन से किया गया। सरस्वती वंदना मधु वर्मा ने की। सभी अतिथियों और आगन्तुकों का स्वागत ब्रज प्रान्त के संरक्षक प्रो. एन. एल. शर्मा ने किया। ब्रज प्रान्त के अध्यक्ष सुरेश बाबू मिश्रा ने 105 दिन चली क्रान्ति तीर्थ श्रृंखला के बारे में विस्तार से बताया। क्रान्तितीर्थ श्रृंखला पर आधारित पत्रिका का अतिथियों द्वारा विमोचन किया गया।प्रमुख क्रांतिकारी अमर शहीद ठाकुर रोशन सिंह के प्रपौत्र शरद रोशन सिंह ब्हील चेयर पर आए थे। ब्रज प्रांत के 12 जनपदों के विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजयी छात्र / छात्राओं को मुख्य वक्ता संजय मिश्र, डाॅ पवनपुत्र बादल ने स्मृति चिन्ह और प्रमाण पत्र देकर पुरस्कृत किया और बधाई दी । इस अवसर पर मुख्यवक्ता संजय मिश्र हर्ष ने अपने सम्बोधन में कहा कि हमारे कर्णधारों ने और इतिहासकारों ने हमारे क्रांतिकारियों के साथ न्याय नहीं किया । उनके संघर्षो और बलिदानों को इतिहास में भी स्थान नहीं दिया । डाॅ पवन पुत्र बादल ने कहा कि देश के इतिहास को नए संदर्भ मे लिखे जाने की आवश्यकता है । साहित्य परिषद द्वारा इस दिशा में कार्य प्रारम्भ हो चुका है । दूसरे सत्र में गीतांजलि कार्यक्रम में देशभक्ति के गीतों की जोरदार प्रस्तुति प्रकाश चंद्र सक्सेना, अरुणा सिन्हा, जितेन्द्र सक्सेना, शकुन सक्सेना, मुकेश सक्सेना, मधु वर्मा, अजय चौहान, निधि मिश्रा ने की। द्वितीय सत्र में भी अध्यक्ष बरिष्ठ साहित्यकार डाॅ ओमप्रकाश शुक्ल अज्ञात तथा डाॅ पवनपुत्र बादल ने सभी को माल्यार्पण कर स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया । प्रथम सत्र का संचालन डाॅ स्वाति गुप्ता ने और द्वितीय सत्र का संचालन सुरेन्द्र वीनू सिन्हा ने किया ।
कार्यक्रम मे बड़ी संख्या में छात्र, शिक्षक, प्रधानाचार्य, साहित्यकार, लोकतंत्र सेनानी एवं बुद्धिजीवी मौजूद रहे । खासतौर से मौजूद लोगों में प्रो एन एल शर्मा , डाॅ सुरेश बाबू मिश्रा, डाॅ शशि बाला राठी, डाॅ एस पी मौर्य, निर्भय सक्सेना, सुरेंद्र बीनू सिन्हा, ब्रिजेश शर्मा, हर्ष अग्रवाल, शचीन्द्र सक्सेना, राजीव अस्थाना, प्रवीण शर्मा, आनंद गौतम, उपमेंद सक्सेना, निरुपमा अग्रवाल, ब्रज किशोर शर्मा, डाॅ रवि प्रकाश शर्मा , अखिलेश गुप्ता, गुरविंदर सिंह, विनीता सिंह, मधु वर्मा, एस के कपूर, डाॅ सी पी शर्मा, विकास सारस्वत, जितेन्द्र सिंह चौहान तथा मनीराम का विशेष योगदान रहा । निर्भय सक्सेना

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