भाजपा ने मौन जुलूस निकालकर देश विभाजन पर जान गवाने वाले लोगों का स्मरण किया, मोमबत्ती जलाकर श्रद्धा सुमन अर्पित किए

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बदायूँ। 14 अगस्त को देश के बंटवारे की घटना की स्मृति में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर बदायूँ क्लब बदायूँ में प्रर्दशनी का उद्घाटन व अवलोकन, गोष्ठी का आयोजन किया गया तथा बदायूँ क्लब से गुरुद्वारा जोगीपुरा तक मौन जुलूस निकालकर विभाजन के अवसर पर जान गवाने वाले लोगों का स्मरण कर मोमबत्ती जलाकर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। माध्यमिक शिक्षा मंत्री/प्रभारी मंत्री गुलाब देवी ने कहा देश के बंटवारे के दर्द को कभी भुलाया नहीं जा सकता। नफरत और हिंसा की वजह से हमारे लाखों बहनों एवं भाइयों को विस्थापित होना पड़ा और अपनी जान तक गंवानी पड़ी। उन लोगों के संघर्ष और बलिदान की याद में 14 अगस्त को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के तौर पर याद किया जाता है, साथ ही कहा कि 14 अगस्त को भारत का विभाजन हुआ था। यह भारत के इतिहास का एक दुर्भाग्यशाली दिन है। यह भारत के संघर्ष और बलिदान का दिन है। अखंड भारत की आजादी के इतिहास में ये घटना रक्तरंजित हो गई थी। यह दिन भारत के संघर्ष और बलिदान का दिन है। इस दिन लाखों लोग अपने मूल स्थान से विस्थापित हुए थे। उनके साथ यातनपूर्ण व्यवहार हुआ था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसलिए विभाजन विभीषिका दिवस मनाने का निर्णय लिया है। केंद्रीय राज्यमंत्री बी०एल० वर्मा ने कहा 14 अगस्त 1947 का दिन भारत के इतिहास में वह काला दिन बना हैं, जब एक अखंड देश के रूप में सांस्कृतिक भारत दो हिस्सों विभाजित हो गया। एक हिस्सा भारत बना और दूसरा पाकिस्तान कहलाया। साथ ही उन्होंने लाहौर से पठानकोट तक खंडित भारत में लाखों शरणर्थी आए थे। उनके मन में पीड़ा थी। दिल्ली के मंदिर मार्ग पर न्यायमूर्ति निर्मल चटर्जी ने कहा था कि कांग्रेस ने करोड़ों भारतीय लोगों की पीठ में छुरा भोंका है। पूर्वी बंगाल में हिंदुओं पर जाजिया कर लगाया गया। इसका कम्युनिस्ट पार्टी ने भी समर्थन किया था। कांग्रेस के मानसपुत्र आज भी देश के टुकड़े कर रहे हैं। साथ ही उन्होंने कहा इससे देश में एकता, सद्भाव और देश प्रेम की भावना जगती है, विस्थापित परिवारों द्वारा जीवन-यापन के लिए किए गए संघर्ष से युवाओं को प्रेरणा लेनी चाहिए। जिलाध्यक्ष राजीव कुमार गुप्ता ने कहा आज के दिन को कोई कैसे भूल सकता है। एक तरफ 14 अगस्त 1947 को अंग्रेजों के गुलामी से आजादी मिल रही थी तो दूसरी ओर धर्म के नाम पर भारत के दो टुकड़े हो रहे थे। यह विभाजन भारत के लिए किसी विभीषिका से कम नहीं थी। इसका दर्द आज भी देश को झेलना पड़ रहा है। अंग्रेजों ने पाकिस्तान को 1947 में भारत से अलग कर एक मुस्लिम देश के रूप में मान्यता दी थी और पाकिस्तान अस्तित्व में आया। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस हमें भेदभाव, वैमनस्य और दुर्भावना के जहर को खत्म करने के लिए प्रेरित करेगा।

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साथ ही इससे एकता, सामाजिक सद्भाव और मानवीय संवेदनाएं भी मजबूत होंगी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस विभीषिका को भारतीय इतिहास में न भूले जाने वाली घटना बताते हुए विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाने का आह्वान किया है। साँसद डॉ० संघमित्रा मौर्य ने कहा विभाजन में न केवल भारतीय उपमहाद्वीप के दो टुकड़े किए गए बल्कि बंगाल का भी विभाजन किया गया। बंगाल के पूर्वी हिस्से को भारत से अलग कर पूर्वी पाकिस्तान बना दिया गया। 1971 के युद्ध के बाद बांग्लादेश बना। आज जब हम स्वतंत्रता के अमृत काल में प्रवेश कर रहे हैं और पूरे देश में आजादी का अमृत महोत्सव, धूमधाम से मनाया जा रहा है। तब यह एक दुखद सच्चाई है कि पिछले 75 वर्षों में वक्त से जुड़े घाव भले ही भर गए हों, मगर निशान अभी कायम हैं। यह ऐसा निशान है जो भारत को स्वतंत्रता बाद से ही दुःख दे रहा है। कभी आक्रमण के द्वारा तो कभी भारत के अंदर आंतकवाद का वित्त पोषण करके भारत के साथ पाकिस्तान ने कारगिल तक चार युद्ध लडे और हर बार मुंह की खाई लेकिन इसके बाद भी पकिस्तान भारत के खिलाफ आज भी खड़ा है। भारत के अंदर पाकिस्तान ड्रग्स और आतंकवाद को पोषण दे रहा है। पूर्व मंत्री सदर विधायक महेश चन्द्र गुप्ता ने कहा पिछले कई वर्षो से विभाजन की विभीषिका को याद करने और इसी पीड़ादायी त्रासदी के बारे में युवा पीढ़ी को जागरूक करने के लिए विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस का आयोजन किया गया है। इसलिये आज जरूरत है कि नई पीढ़ी विभाजन के दौरान प्राण गंवाने वाले लोगों को याद करे और वृहद स्तर पर पूरे प्रदेश में आज श्रद्धांजलि दी जा रही है। दातागंज विधायक राजीव कुमार सिंह ने कहा विभाजन के समय दर्द और पीड़ा सहने और अपनी जान गंवाने वाले लोगों को पहली बार पहचान व सम्मान देने की पहल मोदी सरकार ने की। मोदी सरकार के इस कदम के बाद निश्चित रूप से विभाजन की पीड़ा सहने वाले लोगों के दर्द को लंबे समय बाद एक मंच तो मिला ही, वहीं उनके दर्द पर मरहम लगाने के लिए भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी आगे आए। समाजसेवी अशोक खुराना ने कहा विभाजन के समय पाकिस्तान के पंजाब वाले हिस्से से अधिकांश लोग उस समय संयुक्त पंजाब के हरियाणा में सबसे अधिक संख्या में आए थे। पंजाब में करीब 50 लाख हिंदू परिवार आए थे। इस दौरान लाखों लोग शहीद भी हुए। इन शहीदों को न तो कभी याद किया गया और न ही कांग्रेस सरकारों ने कभी कोई समारोह किया।

समाजसेवी मेघराज सपड़ा ने कहा मुझे गर्व महसूस हो रहा है कि भारत विभाजन का दंश सहने वाले परिवारों को भाजपा सरकार सम्मानित करने का काम भी कर रही है। इस अवसर पर वीरेंद्र गुसाई अविनाशी लाल मक्कड़ मेघराज सपड़ा हर शरण कपूर प्रेमसिंह मक्कड़ रामजस अनेजा अजीत सिंह नरूला अमरनाथ मेंहदीरत्ता मनोहर लाल को विभाजन का दंश सहने पर अंग वस्त्र व माला पहनाकर सम्मानित किया गया। संचालन शैलेन्द्र मोहन शर्मा ने किया। इस मौके पर जिलाधिकारी मनोज कुमार मुख्य विकास अधिकारी केशव कुमार जिला पंचायत राज अधिकारी श्रेया मिश्रा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी स्वाति भारती जिला विद्यालय निरीक्षक प्रवेश कुमार पूर्व चेयरमैन दीपमाला गोयल अक्षत अशेष शारदाकान्त शर्मा एमपी सिंह राजपूत भगवान सिंह मौर्य नेकपाल कश्यप आशीष शाक्य जितेन्द्र साहू मनोज गुप्ता केशव चौहान धीरज पटेल पंकज शर्मा सीमा राठौर रानी सिंह पुण्डीर मोनिका गंगवार अनुभव उपाध्याय उपस्थित रहे।

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