शिवखोड़ी गुफा में भस्मासुर से बचने को छुपे थे भगवान शिव निर्भय सक्सेना

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बरेली। जम्मू से 140 दूर किलोमीटर दूर बसे रियासी जिले के संगर गांव में भगवान भोले नाथ की शिव खोड़ी गुफा शिव भक्तो के लिए आस्था का केंद्र है। बताया तो यह भी जाता है की इस गुफा का रास्ता अमरनाथ होकर स्वर्ग तक भी जाता है। पांडवो ने अपने छिपने के दौरान यहीं भगवान शिव की प्रार्थना की थी। और यही से अमरनाथ गए थे। भोले भक्तो के लिए अब इस गुफा में 130 मीटर तक ही जाने की इजाजत है । वह वहां गुफा में प्राकृतिक बने शिवलिंग एवम अन्य पिंडियो के दर्शन गर्मियों में सुबह सात से शाम सात बजे तक कर सकते हैं । गुफा में आने के लिए पहले वहां ही बने रजिस्ट्रेशन काउंटर पर पर्ची भी कटाना जरूरी है। बताया गया कि एक किवदंती के अनुसार भस्मासुर राक्षस की तपस्या से खुश होकर भगवान शिव ने उसे वरदान दिया की वह जिसके भी सिर पर पर हाथ रखेगा वह भस्म हो जाएगा। भस्मासुर ने गलत इरादे से जब भगवान शिव को ही भस्म करना चाहा तो वह भागकर शिवालिक पहाड़ियों के जम्मू के इस संगर गांव पहुंचे और अपने त्रिशूल से डमरू आकार की गुफा का निर्माण कर उसमे छिप गए। उधर भगवान विष्णु को जब पता चला तो उन्होंने मोहिनी का रूप धारण कर भस्मासुर के साथ नृत्य किया। नृत्य करते हुए मोहिनी बने विष्णु ने अपने सिर पर हाथ रखा था। जिस पर भस्मासुर ने भी वही किया और वहीं वह भस्म हो गया।

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जिससे भगवान शिव को राहत मिली। वैसे तो शिव खोड़ी शिव तीर्थ का कोई प्रामाणिक इतिहास अभी तक उपलब्ध नहीं हो पाया है। विकिलीपिडीया के अनुसार लोक श्रुतियों में कहा गया है कि सियालकोट (वर्तमान में यह स्थान पाकिस्तान में है) के राजा सालवाहन ने ही जम्मू के रियासी स्थित संगर गांव में शिव खोड़ी में शिवलिंग के दर्शन किए थे और इस क्षेत्र में कई मंदिर भी निर्माण करवाए थे। जो बाद में सालवाहन मंदिर के नाम से ही जाने गए। शिवालिक पहाड़ियों में बनी डमरू आकार की शिव खोड़ी की इस प्राकृतिक डमरू आकार वाली गुफा में दो कक्ष हैं। बाहरी कक्ष कुछ बड़ा है, लेकिन अंदर का कक्ष छोटा है। बाहर वाले कक्ष से अंदर वाले कक्ष में जाने का रास्ता कुछ तंग और कम ऊंचाई वाला है जहां से झुक कर गुजरना पड़ता है। आगे चलकर यह रास्ता दो हिस्सों में बंट जाता है। जिसमें से एक के विषय में ऐसा विश्वास है कि यह कश्मीर जाता है। यह रास्ता अब पूर्णता बंद कर दिया गया है। दूसरा मार्ग गुफा की ओर जाता है, जहां स्वयंभू शिव की मूर्ति है। गुफा की छत पर सांप एवम गाय के स्तन की आकृति वाली चित्रकला है, जहां से दूध युक्त जल भी शिवलिंग पर टपकता रहता है। दूसरा मार्ग गुफा की ओर जाता है, जहां स्वयंभू शिव की मूर्ति है। शिवालिक पर्वत शृंखलाओं में अनेक गुफाएँ हैं। यह गुफाएँ प्राकृतिक हैं। कई गुफाओं के भीतर अनेक देवी-देवताओं के नाम की प्रतिमाएँ अथवा पिंडियाँ हैं। उनमें कई प्रतिमाएँ अथवा पिंडियाँ प्राकृतिक भी हैं। देव पिंडियों से संबंधित होने के कारण ये गुफाएं भी पवित्र मानी जाती हैं। पवित्र गुफाओं में शिव खोड़ी का नाम प्रसिद्ध है। यह गुफा तहसील रियासी के अंतर्गत संगर गांव के नजदीक स्थित है। जम्मू से यहां पहुंचने के लिए जम्मू से बस मिल जाती है। यहां के लोग कटड़ा, रियासी, अखनूर, कालाकोट से भी बस द्वारा रियासी पहुंचते रहते हैं। रियासी के रणसू से शिव खोड़ी छह किलोमीटर दूरी पर है। यह एक छोटा-सा पर्वतीय आंचलिक गांव है। यहां कई जलकुंड भी हैं। यात्री जलकुंडों में स्नान के बाद देव स्थान की ओर आगे बढ़ते हैं। रणसू से दो किलोमीटर का सड़क मार्ग है। यात्री सड़क को छोड़ कर आगे पर्वतीय पगडंडी की ओर बढ़ते हैं। पर्वतीय मार्ग समृद्ध प्राकृतिक दृश्यों से भरपूर है। यहां पर मार्ग में बहते जल स्रोत, छायादार वृक्ष, पक्षी तीरथ यात्रियों का मन अपनी ओर खींच लेते हैं। चार किलोमीटर टेढ़ी-मेढ़ी पर्वतीय पगडंडी पर चलते हुए यात्री गुफा के बाहरी भाग में पहुंचते हैं। डमरू आकार की शिव खोड़ी गुफा का बाह्‌य भाग बड़ा ही विस्तृत है। हजारों यात्री एक साथ खड़े हो सकते हैं। बाह्‌य भाग के बाद गुफा का भीतरी भाग आरंभ होता है। यह बड़ा ही संकीर्ण है। यात्री सरक-सरक कर आगे बढ़ते जाते हैं। कई स्थानों पर घुटनों के बल भी चलना पड़ता है। गुफा के भीतर भी गुफाएं हैं। गुफा के भीतर दिन के समय भी रोशनी कम होती है। अब विद्युत प्रकाश की व्यवस्था की गई है। गुफा के भीतर एक स्थान पर सीढ़ियां भी चढ़नी पड़ती हैं, तदुपरांत थोड़ी सी चढ़ाई के बाद प्राकृतिक बने एक मीटर के शिवलिंग के दर्शन होते हैं। शिवलिंग गुफा की प्राचीर के साथ ही बना है। शिवलिंग के आसपास गुफा की छत से पानी टपकता रहता है। यह पानी दुधिया रंग का है। उस दुधिया पानी के जम जाने से गुफा के भीतर तथा बाहर सर्पाकार कई छोटी-मोटी रेखाएं बनी हुई हैं, जो बड़ी ही विलक्षण किंतु बेहद आकर्षक लगती हैं। शिवलिंग के आगे भी एक और भी बड़ी लंबी गुफा है। इसके मार्ग में कई अवरोधक हैं। जनश्रुति है कि यह गुफा अमरनाथ होकर स्वर्ग तक जाती है। सदियों से बंद पड़ी आगे की इस गुफा में अब कोई नही जाता है। बरेली से गए जत्थे ने 29 जून 2023 को शिव खोड़ी की इस पवित्र गुफा के दर्शन लाभ किए थे। जिसमे निर्भय सक्सेना, पुत्तन सक्सेना, अशोक शर्मा, अशोक शर्मा लोटा, शुभम ठाकुर, विवेक मिश्रा, उमेश शर्मा के अलावा सक्षम शर्मा और गोविंद मिश्र भी थे। यू पी जर्नलिस्ट एसोसिएशन, बरेली के उपजा प्रेस क्लब के कई पत्रकार इस बार 27 जून 2023 को अमरनाथ, शिव खोड़ी एवम मां वैष्णो देवी के दर्शन को गए थे। जो 5 जुलाई को वापस बरेली लोटे थे। विश्व शान्ति के कल्याण और सद्भावना के उद्देश्य से पत्रकारों यह जत्था लगातार सातवीं बार बरेली से रवाना हुआ था। इस जत्था में निर्भय सक्सेना, पुत्तन सक्सेना, अशोक शर्मा, अशोक शर्मा लोटा, शुभम ठाकुर, विवेक मिश्रा, उमेश शर्मा, के अलावा सक्षम शर्मा और गोविंद मिश्र भी थे।

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