लॉर्ड कृष्णा इंटरनेशनल स्कूल मेंआज के परिदृश्य में “शिक्षा के अधिकार” के महत्व पर चर्चा की
बदायूं। लॉर्ड कृष्णा इंटरनेशनल स्कूल में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिसमें अपर जिला जज – सारिका गोयल, एसडीएम – जीत सिंह, बीएसए – स्वाति भारती, एवं तहसीलदार – करमवीर सिंह सहित राजकीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य सहित कुछ अन्य प्रधानाचार्यों को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था। आयोजन का उद्देश्य आज के परिदृश्य में “शिक्षा के अधिकार” के महत्व पर चर्चा करना था।

इस कार्यक्रम की शुरुआत अध्यक्ष – वेदब्रत त्रिवेद एवं उपाध्यक्ष – तेजस्व त्रिवेदी की उपस्थिति में दीप प्रज्वलन के साथ हुई; जिसके बाद स्कूल के सम्मानित अध्यक्ष द्वारा मुख्य अतिथियों का हार्दिक स्वागत किया गया । कार्यक्रम के सम्मानित अतिथियों ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि- ‘शिक्षा एक बुनियादी मानव अधिकार है जो पुरुषों और महिलाओं को गरीबी से बाहर निकालने, असमानताओं को दूर करने और सतत विकास सुनिश्चित करने का काम करता है।’ उन्होंने कहा कि 86वें संवैधानिक संशोधन (2002) ने भारतीय संविधान में अनुच्छेद 21ए डाला, जिसमें कहा गया है:

“राज्य 6 से 14 वर्ष के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करेगा, जैसा कि राज्य कानून द्वारा निर्धारित कर सकता है।” उन्होंने मुफ्त शिक्षा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि ‘मुफ्त शिक्षा’ का मतलब यह है कि बच्चे के अलावा कोई भी बच्चा, जिसे उसके माता-पिता ने ऐसे स्कूल में भर्ती कराया है, जो उपयुक्त सरकार द्वारा समर्थित नहीं है, किसी भी तरह का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं होगा। शुल्क या शुल्क या व्यय का प्रकार जो उसे प्रारंभिक शिक्षा को आगे बढ़ाने और पूरा करने से रोक सकता है।

शिक्षा हमें कई चीजों में मदद करती है, लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह एक व्यक्ति को सोचने, सवाल करने और स्पष्ट से परे देखने की शक्ति प्रदान करती है। अतः यह कहना गलत नहीं होगा कि शिक्षा एक आवश्यक मानवीय गुण है। शिक्षा से मनुष्य ‘मनुष्य’ बनता है। वह वही है जो शिक्षा उसे बनाती है और हर बच्चे के जीवन में एक महत्वपूर्ण हिस्सा रखती है और किसी भी बच्चे को इस अधिकार का लाभ उठाने से दूर नहीं रखा जाना चाहिए। विद्यालय प्रबंधन द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।













































































