संघर्ष की जीवंत मिसाल हैं मास्टर शेफ उर्मिला बेन उर्फ गुज्जू। हरिद्वार में हुई मुलाकात और बातचीत
बरेली। हरिद्वार में बीते 8 अप्रेल 2023 को अपने होटल से बाहर आते समय साथ चल रही बिटिया संचिता ऊर्फ टिया और श्रेयांश सक्सेना ने सामने खड़ी एक वृद्ध महिला की ओर इशारा कर कहा की नाना यह मास्टर शेफ उर्मिला बेन उर्फ गुज्जु हैं। चलो इनसे मिलते हैं। जाते ही उन्हें प्रणाम किया और परिचय देकर बताया मैं एक पत्रकार हूं और परिवार के साथ सहारनपुर से आज ही हरिद्वार आया हूं। इन बच्चों ने आपको पहचाना और आपके साथ एक फोटो खिंचवाना चाहते हैं। 78 वर्षीय उर्मिला जमनादास अशर उर्फ गुज्जू बेन ने मुस्करा कर हामी भरी। और उनके साथ बच्चों एवम परिजनों के फोटो क्लिक किए। फोटो के बाद उनसे खड़े खड़े ही कुछ बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ तो गुजरात की उर्मिला बेन गुज्जू ने बताया कि वह भी हरिद्वार अपने साथी महिलाओं के साथ आई थीं और आज रात में वापस लौटना है। 78 साल की उम्र में भी उर्मिला बेन अपनी मेहनत और सरलता से देश की गृहणी और घर में रहने वाली महिलाओं के लिए एक मिसाल कायम की है। सरल स्वभाव वाली महिला उर्मिला अशर गुज्जू बेन को उनके यूट्यूब चैनल पर गुज्जू बेन के नाम से जाना जाता है। उर्मिला बेन मास्टर शेफ इंडिया में आ चुकी हैं और उनके बनाए डिश को लोगो ने बहुत प्रभावित किया है। उर्मिला बेन ने बहुत ही कम उम्र में पति और तीन बच्चों को खोने के बाद भी हिम्मत नहीं हारी थी। आर्थिक तंगी में जीने को मजबूर होने के बाद भी वह लोगो के लिए एक प्रेरणा बनीं और लॉक डाउन में 2020 में “गुज्जू बेन नाश्ता” के नाम से अपना यूट्यूब चैनल शुरू किया था। घरों में खाना बनाकर गुजारा करने वाली उर्मिला बेन देखते ही देखते अपना स्थान बनाती चली गईं।
78 वर्षीय उर्मिला बेन, जिन्हें उनके यूट्यूब चैनल “गुज्जु बेन” के नाम से जाना जाता है, मास्टर शेफ इंडिया में आने के बाद वह सोशल मीडिया पर भी अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। उर्मिला बेन ने ऐसा भी वक्त देखा है, जब वह काफी घरों में खाना बनाकर अपना गुजारा करती थीं और अब आजकल वह एक सफल महिला व्यापारी हैं। दुखी मन से बताती हैं कि उनकी ढाई साल की बच्ची तीसरी मंजिल से गिर गई थी, जिसके बाद उसकी मौत हो गई। उनके एक लड़के का दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई थी। दूसरे को ब्रेन ट्यूमर था, जिससे उसकी भी मौत हो गई। कम उम्र में अपने पति और बच्चों को खोने के बाद भी उर्मिला बेन ने हार नहीं मानी और अपने जीवन को दूसरा मौका दिया। उन्होंने हार से टूटने के बाद भी खाली बैठने की जगह अपने कंधे पर सबकी जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने अपनी बीमार सास का इलाज करवाया, पूरा घर भी चलाया। बच्चों का भी पालन- पोषण किया। पोते हर्ष का भी 2019 में दुर्घटना में काफी चोटिल हो गया था जिससे घायल होने पर हर्ष का भी काम धाम बंद हो गया था। उसके बाद उर्मिला बेन ने अपने घर के गली के एक कॉर्नर पर गुजराती स्नैक्स स्टार्टअप ”गुज्जू बेन का नाश्ता” का स्टोर खोला। इस स्टोर पर ड्राई नाश्ता मिलता है। वह सुबह 7 बजे से रात 9 बजे तक किचन में लगातार 10 से 12 घंटे काम करती हैं। दो बार दिल का दौरा झेल चुकी 78 साल की उम्र में भी उर्मिला जमनादास अशर उर्फ गुज्जू बेन घर भी इसके साथ-साथ चलाती हैं। सबसे पहले उन्होंने देसी आचार से अपना बिजनेस शुरू किया था। इसके बाद उन्होंने थेपला, ढोकला, पुरन पोली, हलवा, साबुदाना खिचड़ी बनाने लगीं। सोशल मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार उर्मिला बेन हर महीने 5 लाख रुपये कमाती हैं। उर्मिला बेन की जिंदगी शुरुआत से ही संघर्ष भरी रही है। आज उर्मिला बेन के साथ एक पूरी की पूरी टीम काम करती हैं। प्रतिदिन सुबह 5:30 बजे से उनका खानपान का काम शुरू होता है।













































































