बदायूँ । गीता भवन बिरुआबाड़ी में चल रही श्रो गौर कथा में गौरदास महाराज ने समझाया कि सभी विग्रह यानी अलग अलग मंदिरों एवं घरों में विराजित ठाकुर एक ही हैं। माधवेन्द्र पुरी पाद गोवर्धन से अपने ठाकुर के आदेश अनुसार नीलाचल जगन्नाथ पुरी से मलयागिरी चंदन लेने को गए वह चंदन लेकर आ रहे थे तब मार्ग में ही ठाकुरजी का स्वप्नादेश हुआ कि यह चंदन आप गोपीनाथ को अर्पण कर दे क्यो कि उनमें और गोपीनाथ में कोई भेद नही है। सारे ठाकुर एक ही हैं यही हमारी भारतीय सर्वग्रहयी संस्कृति है कि अक्षय तृतीया पर सभी विग्रहों की चंदन सेवा होती है । क्षीरचोरा गोपीनाथ की मार्मिक कथा कहते हुए उन्होंने कहा कि अपने भक्त के लिए ठाकुर ने खीर का कुल्हड़ अपने बस्त्र में छिपा लिया और भक्तों की प्रसन्नता के लिए क्षीरचोरा गोपीनाथ बनना भी स्वीकार कर लिया यह ठाकुर आज भी रैमुना में विराजित हैं । आज की आरती गौर निताई संकीर्तन ट्रस्ट के गौर भक्तों द्वारा की गई ।