भू-अधिग्रहण पीड़ित किसान आंदोलन की राह पर,दिग्गज किसान नेता डॉ राजाराम से मार्गदर्शन अपील

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छत्तीसगढ़। कोंडागांव के भूमि अधिग्रहण से प्रभावित डोगरीगांव ,पलारी, मसोरा, कोंडागांव आदि गांवों पीड़ित किसानों की बैठक कोंडागांव-उमरकोट (उड़ीसा) अंतरराज्यीय सड़क के किनारे डोंगरीगुड़ा में संपन्न हुई, जिसमें सैकड़ों पीड़ित आदिवासी किसान परिवारों ने भाग लिया। भूमि अधिग्रहण से प्रभावित किसानों ने अपने आंदोलन की आगामी रणनीति तय करने हेतु यह बैठक बुलाई गई थी। इस बैठक में मार्गदर्शन हेतु “अखिल भारतीय किसान महासंघ (आईफा)” के राष्ट्रीय संयोजक तथा देश के जाने माने किसान नेता डॉ राजाराम त्रिपाठी को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। उल्लेखनीय है कि डॉ त्रिपाठी देश के 223 किसान संगठनों द्वारा गठित “एमएसपी-किसान मोर्चा” के राष्ट्रीय प्रवक्ता भी हैं।

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बैठक में पीड़ित किसानों ने एक बार फिर दोहराया कि , हम सभी किसान विकास के खिलाफ बिल्कुल नहीं हैं, और हम भी चाहते हैं कि जल्द से जल्द हमारा बाईपास बनाया जाए। लेकिन हमारे पुरखों की अमानत हमारी अनमोल जमीनों को शासन हमसे कौड़ियों के मोल अधिकृत कर रहा है, और जमीनों का जो मूल्य शासन ने तय किया है, वह वर्तमान बाजार मूल्य से बहुत ही कम है। यह सरासर अन्याय है। दुखद है कि इस संदर्भ किसान क्षेत्र के सभी अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों से चर्चा कर चुके हैं, पर हम गरीब आदिवासी किसानों की बात कोई भी सुनने को तैयार नहीं है। इसलिए हम सभी किसानों ने आज की बैठक में एक मत होकर डॉ राजाराम त्रिपाठी को इस मामले में हमारा मार्गदर्शन करने देश के सभी किसान संगठनों को हमें न्याय दिलाने में मदद करने हेतु निवेदन किया है । इस संबंध में हमने लगभग 100 पीड़ित किसानों के द्वारा हस्ताक्षरित सामूहिक आवेदन पत्र भी देश किसान के संगठनों के मुखिया को सौंपा है । पीड़ित किसानों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण के मुआवजे के लिए जो नीति तथा दरें शासन ने तय की है वह बहुत ही पक्षपातपूर्ण हैं। बाईपास हेतु भूमि अधिग्रहण में जिस किसान की कम जमीन जा रही है उसे तो ज्यादा पैसा मिल रहा है जबकि जिस किसान की जमीन ज्यादा जा रही है उसे अपेक्षाकृत कम मूल्य मिल रहा है। सरकार द्वारा किसानों की भूमि का तय किया रेट भी वास्तविक बाजार मूल्य से बहुत ही कम है। जो हमें स्वीकार्य नहीं है।

किसानों ने कहा कि उनकी भूमि का मुआवजा व्यवसायिक भूमि की दर से दिया जाए। प्रभावित किसानों का यह भी कहना है कि उनके पास कृषि जमीनों के अलावा आजीविका का अन्य कोई साधन नहीं है। इसलिए सरकार कृपा कर उनके लिए समुचित वैकल्पिक नियमित रोजगार की व्यवस्था के उपरांत तथा न्यायोचित मूल्य भुगतान करने के उपरांत ही उनकी भूमि का अधिग्रहण करें। आज की बैठक के संबंध में डॉ त्रिपाठी ने कहा पीड़ित किसानों ने अब अपना एक संगठन बनाया है और अपनी मांगों को पूरा कराने के लिए वो आंदोलन की ओर अग्रसर हैं तथा किसानों ने आंदोलन के मार्गदर्शन हेतु उनसे संपर्क किया है। हालांकि उन्होंने कोई भी आंदोलन प्रारंभ करने के पूर्व किसानों और सरकार दोनों को मिल बैठकर, यथासंभव इस समस्या का उचित व्यवहारिक हल ढूंढने हेतु कहा है। आगे उन्होंने कहा कि बायपास रोड कोंडागांव की बहुत जरूरी व बहुप्रतीक्षित मांग है। इसकी मांग हमारे जनप्रतिनिधि भी वर्षों से करते आ रहे हैं, पर इस दिशा में ठोस पहल अभी तक नहीं हो पाई है। इसमें पहले ही बहुत देर हो चुकी है और इसके अभाव में तेज रफ्तार वाहनों के कारण नगर में आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं में कई जानें जा चुकी हैं, नगर में दुर्घटनाओं में अकाल मौतों का यह सिलसिला आज भी बदस्तूर जारी है। इसलिए बायपास के शीघ्र अति शीघ्र निर्माण हेतु हम सभी को हर प्रकार से सहयोग देना ही चाहिए। लेकिन यह भी देखना जरूरी है कि किसानों को उनकी बाप दादों की धरोहर जमीन का उचित तथा पर्याप्त मुआवजा राशि पहले प्रदान की जाए। इस मामले में वे राष्ट्रीय राजमार्ग भूमि अधिग्रहण के अंतर्गत वर्तमान कानूनी प्रावधानों, मुआवजा नीति तथा तत्संबंधी व्यवस्थाओं के बारे में संबंधित अधिकारियों से चर्चा कर हम जरूरी जानकारी हासिल कर रहे हैं। इस संबंध में विधि-विशेषज्ञों से भी हमारी चर्चा हुई है। भूमि अधिग्रहण पीड़ित किसानों ने अब अपना एक संगठन भी बना लिया है और ये किसान अब निराश होकर तीव्र आंदोलन की ओर अग्रसर हो रहे हैं, यह दुखदाई स्थिति है। हमारा स्पष्ट रूप से मानना है कि अन्नदाता किसानों को उनका वाजिब हक मिलना चाहिए और उनके साथ कहीं भी, किसी भी स्तर पर अन्याय नहीं होना चाहिए । आईफा सदैव किसानों के हितों के लिए सजग है और पूरी मजबूती से उनके साथ खड़ा रहा है, और आगे भी हम किसानों के वाजिब मांग तथा उनके हक के लिए सदैव उनके साथ खड़े रहेंगे। उन्होंने कहा कि विकास के मामलों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। इसलिए इससे पहले कि किसान आंदोलन की राह पकड़े तथा यह मामला और बिगड़े सरकार और प्रभावित किसानों को मिल बैठकर इस मामले को शीघ्र अति शीघ्र शांतिपूर्ण ढंग से निपटा लेना चाहिए। बाईपास रोड जल्द से जल्द बनाया जाना चाहिए तभी दुर्घटनाओं पर लगाम लगेगी, और अकाल मौतों का सिलसिला बंद होगा , पर हमें यह भी ध्यान देना होगा कि यह विकास किसानों की कीमत पर नहीं होना चाहिए किसानों को भी उनकी जमीनों का वाजिब और पर्याप्त मुआवजा दिया जाना चाहिए ताकि अंचल के अन्नदाता किसान भी खुशहाल हों।

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