स्काउटिंग के जन्मदाता लार्ड बेडेन पावेल के 165 वां जन्मदिवसोत्सव स्काउटिंग के जन्मदाता की जीवन गाथा

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संजीव कुमार शर्मा
(पूर्व जिला ट्रेनिंग कमिश्नर, बदायंू)
उ0प्र0 भारत स्काउट गाइड, बदायूँ

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22 फरवरी……. स्काउटिंग के जन्मदाता लार्ड बेडेन पावेल के 165 वां जन्मदिवसोत्सव
स्काउटिंग के जन्मदाता की जीवन गाथा
स्काउटिंग के जन्मदाता राबर्ट स्टीफेन्सन स्मिथ लार्ड बेडेन पावेल एक अंग्रेज सैनिक थे। इनका जन्म इग्लैण्ड स्थित स्टैनपोल टैरेस, लैंकस्टार गेट, लंदन में 22 फरवरी 1857 को हुआ। इनके पिता प्रोफेसर हरबर्ट जार्ज बेडेन पावेल आॅक्सफोर्ड विश्वविद्यालय में ज्योमिति के प्राध्यापक और महान प्रकृतिवादी थे। इनकी माता हैनरिट्टा ग्रेस स्मिथ बर्तानवी एडमिरल डब्ल्यू टी स्मिथ की पुत्री थीं।
बेडेन पावेल को बचपन में स्टी नाम से जाना जाता था। इनमें अनेकों प्रतिभाऐं थी। जिसकी बजह से बेडेन पावेल की अलग पहिचान थी। दोनों हाथों से चित्र बनाना, लिखना, अभिनय करना, नौका चालन, प्रकृति भ्रमण, घुड़ सवारी करना इनके प्रमुख शौक थे।
बेडेन पावेल के पिता का सन् 1860 में निधन हो गया तब बी.पी. 3 वर्ष के थे। इनकी माता को कठोर परिस्तिथियों से गुजरना पड़ा। अपनी माता से खाना बनाने की कला और भाईयों से समुद्री यात्रा, हाईकिंग करना बचपन में ही सीख लिया था। ग्रेट ब्रिटेन के किनारे पर नाव चलाते और कैम्पिंग करते समय उत्तरी सागर से नार्वे तक का बी.पी. ने रास्ता तय किया। साहस का कार्य था।
स्कूली शिक्षा- बी.पी. को सर्वप्रथम केन्सिंगटन में डेम स्कूल में सन् 1869 में प्रवेश दिलाया गया। लंदन के ‘चार्टर हाई स्कूल‘ में छात्रवृत्ति पाकर ‘गाउन ब्वाय फांउडेशन‘ के रूप में प्रवेश किया।
समय का उपयोग-बी.पी. का अतिरिक्त समय स्कूल के पीछे जंगल में पशु-पक्षियों को देखनंे, चाकू-कुल्हाड़ी का प्रयोग करने, बिना बर्तन भोजन बनानें, झोपड़ी तैयार करने में बीतता था। यह सब स्काउटिंग की भव्य तैयारी थी। कम्पास का प्रयोग और मानचित्र बनाना भी सीखा। इन सब कलाओं ने बी.पी. को सेना में तरक्की के अवसर प्रदान किए।
सैनिक काल-बी.पी. सन् 1876 में सैनिक परीक्षा में सफल हुए 13 वीं हसर्स जिसने क्रीमियन युद्ध में प्रसिद्धि की थी। सीधे उप लैफिटनेंट के पद पर नियुक्त हुए। उस समय सेना लखनऊ में तैनात थी। बी.पी. ने सन् 1883 में मथुरा (भारत) में आयोजित ‘पिग स्टिकिंग‘ प्रतियोगिता में नायब कादिर कप जीता। यह कप सूकराखेट में सर्व भारतीय ट्राफी के रूप में प्रसिद्ध था। इस खेल में छोटे भाले से जंगली सूकर का शिकार किया जाता था। यह खतरे वाला खेल था। भारत में बी.पी. के पास ‘बीटल‘ नाम का कुत्ता और ‘पेशन्स‘ नाम की घोड़ी थी। सेना के प्रयोगार्थ सन् 1884 में पहली पुस्तक ‘रिकोनेसैन्स एण्ड स्काउटिंग‘ लिखी। यह स्कूलों में बहुत लोक प्रिय हुई। इसी दौरान बी.पी. की रेजिमेंट ने मथुरा से नटाल के लिए प्रस्थान किया।
अशांत वन जाति-प्रम्पेह इस जाति का राजा था। इसका ब्रिटिशाधीन लोगों पर जुल्म करना, व्यापार में अढ़चनें पैदा करना, लोगों को बलि और यातना देने के लिए पकड़नें का गलत कार्य था। बी.पी. ने अपनी सूझबूझ से प्रम्पेह को पकड़ लिया। जब वह आगे बढ़ा और अपना बांया हाथ निकाला परन्तु बी.पी. ने अपना दांया हाथ बढ़ाया। बी.पी. के कारण पूंछने पर प्रम्पेह ने बताया कि उसके देश में वीर पुरूष ही बांया हाथ मिलाते हैं। स्काउटिंग में बांया हाथ मिलाने की प्रेरणा बी.पी. को यहीं से मिली।
मैफकिंग की रक्षा-मैफकिंग दक्षिण अफ्रीका का एक नगर और व्यापार का प्राकृतिक केंद्र था। इस पर बोअर का कब्जा था। उन दिनों यह प्रसिद्ध था कि दक्षिण अफ्रीका की बागडोर मैफकिंग के हाथों में है और यह बात प्रमाणित हुई। बी.पी. को बोअरों से युद्ध करना पड़ा। बोअरों की संख्या बहुत ज्यादा थी। इसी दौरान बच्चों को नन्हें सिपाही के रूप में तैयार कर युद्ध में सहयोग लिया। यह युद्ध 13 अक्टूबर 1899 से 17 मई 1900 तक चला। जिसमें बच्चों की सहायता से बी.पी. ने इस युद्ध को जीता।
विश्व का पहला प्रयोगात्मक शिविर-बी.पी. ने 20 बच्चों का पहला प्रयोगात्मक शिविर ब्राउन्सी द्वीप आईलैंड कैम्प में 29 जुलाई से 09 अगस्त 1907 तक लगाया गया। जिसमें कुछ ‘ईटन‘ से और कुछ ‘हेरो‘ से बच्चे सम्मिलित थे।
स्काउटिंग फाॅर ब्वायज-बी.पी. की सबसे महान रचना है। यह 1908 में छः पाक्षिक भागों में प्रकाशित हुई। इसका अनेक भाषाओं में प्रकाशन हुआ। इस पुस्तक ने विश्व के युवाओं को प्रभावित किया।
क्रिस्टिल पैलेस रैली-क्रिस्टिल पैलेस में 4 सितम्बर 1909 को स्काउट्स रैली का आयोजन हुआ। जिसमें 11000 स्काउट्स ने प्रतिभाग किया। उन लड़कों में 5 लड़कियां भी वर्दी पहने रैली में सम्मिलित। बी.पी. के पूछने पर उन्होंने बताया कि वे ‘वुल्फ पैट्रोल की गल्र्स स्काउट्स हैं। सन् 1910 में प्रथम गाइड कम्पनी शुरू हुई। जिसकी जिम्मेदारी बी.पी. ने अपनी बहन एग्नेस बेडेन पावेल को दी। 22 फरवरी 1889 को जन्मी आलेव सेंट क्लेयर सोम्स के साथ बी.पी. का 1912 विवाह हुआ।
भारत में स्काउटिंग- भारत में सन् 1909 स्काउटिंग और 1910 में गाइडिंग आई। सन् 1916 में ‘दी वुल्फ कब्ज हैंडबुक‘ और 1919 में ‘एड्स टू स्काउट मास्टरशिप‘ पुस्तकों का प्रकाशन हुआ। स्काउट मास्टरों के प्रशिक्षण के लिए सन् 1919 में गिलवेल पार्क की स्थापना की। 06 अगस्त 1920 को बी.पी. विश्व स्काउट चीफ बनें। 1921 में लाॅर्ड और लेडी बेडेन पावेल को भारत में दृशुभकामना मिशन को लेकर आने का निमंत्रण दिया गया। लाॅर्ड बेडेन पावेल और लेडी बेडेन पावेल दोनों बम्बई (भारत) में 28 जनवरी 1921 को उतरे और भारत में दिल्ली, इलाहाबाद, जबलपुर, लखनऊ, रांची और मद्रास का विस्तृत भ्रमण किया। 1922 में बी.पी. ने ‘रोवरिंग टू सक्सैस‘ पुस्तक का लिखी। 1930 में लेडी बेडेन पावेल विश्व गाइड चीफ बनीं। दिल्ली में 01 से 07 फरवरी 1937 को आयोजित सर्व भारतीय जम्बूरी में पुनः बी.पी. भारत आये। 25 मार्च को कूपरएज ग्राउन्ड बम्बई (भारत) से बी.पी. को विदाई दी गई। बी.पी. ने 1941 में 83 वर्ष 10 माह और 17 दिन का शानदार जीवन जीकर संसार से अन्तिम विदा ली। लार्ड बेडेन पावेल ने दुनियां को यदि कुछ दिया तो वह स्काउटिंग थी। जो खेल-खेल में आज भी दुनियां भर के बच्चों को जीवन जीने की कला सिखा रही है। यह विश्व का पहला बच्चों का वर्दीधारी संगठन है। जो दूसरों की निःस्वार्थ सेवा की लिए समर्पित है। विश्व पटल पर जब भी प्राकृतिक आपदाएं और विपŸिायां आती हैं बच्चों ने अपनी जान की बाजी लगाकर गरीब-असहाय लोगों सहायता के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। बी.पी. ने बच्चों को स्काउटिंग कला सिखाकर उनमें छिपी विलक्षण प्रतिभाओं को उभारा। जो आज श्रेष्ठ नागरिक केे रूप में अपने राष्ट्र की सेवा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं।

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