1444 हिजरी-माह-ए-मोहर्रम : हजरत इमाम हुसैन की शहादत को दुनिया करती है सलाम

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बदायूँ।मोहर्रम की 10 तारीख मंगलवार को यौमे आशुरा के रूप में मनाई गई। समाजजन ने हजरत इमाम हुसैन शहादत की याद में रोजे रखे। सुबह 10 बजे से मस्जिद सहित घरों पर नमाज व कुरान की तिलावत की गई। जगह-जगह सबील वितरित किया गया। और अनीस सिद्दीकी ने आरिफपुर नवादा में शरबत और केलों की लंगडदारी की

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इंसानियत को बचाने के लिए करबला के मैदान में अपने बहत्तर साथियों के साथ अजीम शहादत पेश करने वाले हजरत इमाम हुसैन (अस.) की याद मनाने के महीने को मोहर्रम कहते मोहर्रम का चांद दिखाई देने पर हिजरी 1444 की शुरुआत भी हो गई। हजरत इमाम हुसैन की बहादुरी और जुल्म का सामने जांबाजी से खड़े रहने के हौसले चौदह सौ बरस बाद भी दुनिया सलाम करती है, जो कयामत तक जारी रहेगा। अजाखानों मेें या हुसैन-हक हुसैन की सदाएं गूंजने लगी हैं। इस मौके पर रिजवान सलीम सिद्दीकी,मुजाहिर सिद्दीकी, आजम सिद्दीकी, हस्सान सिद्दीकी,सकैलन सिद्दीकी,शारिक सिद्दीकी, असिम सिद्दीकी ,हिकमत सिद्दीकी,दिलनावाज सिद्दीकी,शहवाज सिद्दीकी,फैजान सिद्दीकी आदि मौजूद रहे।

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