दातागंज की शिप्रा अपने पर्यावरण प्रेम के कारण जानी जाती है वाटर वूमेन के नाम से
नर्मदा जन्मोत्सव पर एक करोड़ बीज तैयार करा बनाया ऐतिहासिक रिकॉर्ड
दातागंज । मध्य प्रदेश में स्थित माँ नर्मदा नदी का 7 फरवरी को प्रकाट्य उत्सव है। मध्य प्रदेश में नर्मदा की मान्यता उत्तर प्रदेश की गंगा के समान हैं।इस समय उत्सव की तैयारी नर्मदा खंड में हर्ष और उल्लास से चल रही है। भक्त, साधक, साधु और ग्रहस्थ अपनी-अपनी तरह से मैया का उत्सव मनाने की तैयारी कर रहे हैं।
इसी क्रम में नर्मदा खंड को अपना जीवन समर्पित करने वाली पंचतत्व फाउंडेशन की फाउंडर एवं वॉटर वुमन के नाम से विख्यात शिप्रा पाठक ने गत वर्ष माँ नर्मदा के जन्मोत्सव पर नर्मदा जी के तट पर एक करोड़ पौधे रोपने का संकल्प लिया थ। इस वट वृक्ष सरीखे संकल्प के अंतर्गत कोरोना जैसी महामारी के बावजूद जगत जननी माँ नर्मदा एवं मोक्षदायिनी माँ शिप्रा के किनारों पर एवं तट पर बसे आश्रमों में लगभग तीन लाख पौधों का रोपण करते हुए “शिप्रा वाटिका” तैयार की जा चुकी है।।इस संकल्प के बारे में सुनने के बाद नर्मदा एवं शिप्रा खंड से जुड़े असंख्य लोग इस संकल्प को पूर्ण करने के लिए आगे आने लगे, जिनमें मुख्यतः इन पौधों के रोपण में मोक्षदायिनी माँ शिप्रा नदी को अपना जीवन समर्पित करने वाले शशि अवस्थी एवं उनके साथियों का विशेष योगदान रहा। तटीय गाँव वालों का कहना है की एक बेटी के निःस्वार्थ भाव से प्रकृति को बचाने के प्रयास अनुकरणीय हैं, इसलिए इस संकल्प को पूर्ण करने का दायित्व हर नागरिक का है, साथ ही इस अभियान में नर्मदा खंड के साधु समाज ने भी अपना विशिष्ट योगदान दिया है।
एक करोड़ पौधे रोपने के संकल्प पर शिप्रा का कहना है निरंतर प्रयास, समर्पण एवं मेहनत से कुछ भी सम्भव है। माँ नर्मदा की परिक्रमा के उपरांत भिक्षावृत्ति पर अपना जीवन यापन करने वाली शिप्रा ने भिक्षा में केवल पौधे ही स्वीकार करने का निर्णय लिया है। भिक्षा में प्राप्त सभी पौधे नर्मदा किनारे एवं आश्रमो में रोपित कराए जा रहे हैं। एक करोड़ पौधे रोपने के संकल्प को पूर्ण करने के लिए इस बार पंचतत्व फाउंडेशन और अधिक गम्भीरता और अधिक तीव्रता से पौधों का रोपण करते हुए जल को कपड़े की चुनरी न चढ़ा कर भूमि को हरियाली चुनरी पहनायेगा।
उल्लेखनीय है कि 3600 किलो मीटर की पैदल परिक्रमा करने वाली शिप्रा ने इस वर्ष मोक्षदायिनी शिप्रा एवं राम प्रिया माँ सरयू की भी पैदल यात्रा की है, उनकी पद यात्राए स्थान-स्थान प्रवास के साथ प्रकृति संवाद करते हुए आगे बढ़ती है। प्रकृति को समर्पित यात्रायें जल संरक्षण एवं पौधों के रोपण को लेकर जागरूकता हेतु की जा रही है। पंचतत्त्व फाउंडेशन के अंतर्गत मध्य प्रदेश के जिला इंदौर में स्थित ग्राम खुडेल बुजुर्ग के किसान संतोष सोमतीया ने 5000 फलदार पौधों के रोपण के साथ साथ भूमि में एक करोड़ औषधिए बीजों का रोपण कर “शिप्रा वाटिका” बनायी है, उनका कहना था कि शिप्रा जी ने माँ के जल को लेकर जो संकल्प लिया है, वो एक ही वर्ष में पूर्ण हो जाए, इस भाव से संतोष जी ने एक करोड़ औषधिए बीज की पौध तैयार कर शिप्रा के संकल्प में अपना सहयोग दिया है। शिप्रा ने उनके प्रेम, सहयोग एवं भावना को प्रणाम करते हुए कहा कि यद्धपि उन्होंने अपने सहयोग से मेरा एक करोड़ का संकल्प बीज के रूप में पूर्ण किया पर, एक करोड़ वृक्ष का संकल्प विधिवत जारी रहेगा। सभी से माँ समान नदियों में गंदगी न करने का एवं अधिक से अधिक पौधों के रोपण करने का आग्रह करते हुए वॉटर वुमन ने “माँ नर्मदा के प्रकाट्य उत्सव” की सभी को बधाई दी।उन्होंने नर्मदा खंड वासियो से ये आग्रह किया कि जैसे माँ नर्मदा के जन्मोत्सव के पहले घाट स्वच्छ रहते है।माँ के जन्मोत्सव अगले दिन भी सब आकर घाटों को साफ़ करे।केवल आटे के दियों से माँ की आरती करे ताकि हमारे धर्म का भी प्रचार प्रसार हो और माँ की स्वच्छता भी हो सके।
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वॉटर वुमन शिप्रा ने मुख्यमंत्री का आभार जताया
पंचतत्व फाउंडेशन की फाउंडर एवं वॉटर वुमन के नाम से विख्यात शिप्रा पाठक ने होशंगाबाद को नर्मदापुरम करने पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का आभार जताते हुए कहा कि माँ की गरिमा बचाने और बढ़ाने के कारण माँ का आशीर्वाद उन्हें निश्चित ही मिलेगा। शिप्रा पाठक ने कहा कि माँ नर्मदा के साथ अन्य नदियों के अस्तित्व को बचाने की दिशा में सरकार को अभी और प्रयास करने की आवश्यकता है।













































































