भक्त पर संकट होने पर भगवान स्वयं रक्षा करते है
बिल्सी में भागवत कथा का दूसरा दिन
बिल्सी। नगर के बादशाहपुर रोड पर प्रकाश पाली के मैदान पर चल रही श्रीमदभागवत कथा के दूसरे दिन कथावाचक पप्पू शास्त्री ने भक्त प्रहलाद की कथा का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि भगवान के भक्त पर जब भी कोई संकट आता है तो भगवान स्वयं उसकी रक्षा करते है। उन्होने कहा कि भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लिया था और राजा हिरण्यकश्यप का वध किया था। हिरण्यकश्यप को वध करना इतना आसान नहीं था, क्योंकि उसे भगवान ब्रह्मा से एक विशेष वरदान प्राप्त था। जिसके चलते वह स्वयं को ही भगवान मानने लगा था। एक पौराणिक कथा के अनुसार बहुत समय पहले कश्यप नामक ऋषि थे। ऋषि की पत्नी का नाम दिति था। जिससे दो पुत्र हरिण्याक्ष और हिरण्यकश्यप थे। भगवान विष्णु ने हिरण्याक्ष का वराह रूप धारण कर वध किया था क्योंकि उसके अत्याचार बढ़ते ही जा रहे थे। अपने भाई का बदला लेने के लिए
हिरण्यकश्यप ने कठोर तपस्या की और ब्रह्मा जी से अजेय होेने का वरदान प्राप्त किया। वरदान मिलने के बाद हिरण्यकश्यप इतना अंहकारी हो गया कि उसने अपनी प्रजा से स्वयं को भगवान की तरह पूजने का आदेश दिया। आदेश न मानने पर हिरण्यकश्यप ने प्रजा पर अत्याचार करने लगा। हिरण्यकश्यप का पुत्र प्रहलाद अपने पिता के कृत्यों का विरोध करता था। उसने
कई बार समझाने की कोशिश की और प्रभु की शरण में जाने के लिए कहा। यह हिरण्यकश्यप को कतई पसंद नहीं था। प्रहलाद भगवान विष्णु की आराधना में लीन रहते थे। हिरण्यकश्यप ने इसका विरोध किया। जब प्रहलाद ने पिता की बात नहीं मानी तो हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को यातनाएं देना शुरू कर दिया। जब उसके अत्याचार बढ़ते गए तब भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लिया। नरसिंह भगवान ने भक्त प्रहलाद को अर्शीवाद दिया कि जो भी आज के दिन मेरा व्रत रखेगा वह सभी प्रकार के कष्टों से दूर रहेगा। जीवन में सुख शांति बनी रहेगी। कथावाचक ने कई अन्य प्रसंगों को भी सुनाया। इस मौके पर प्रकाश पाली, जगदीश पाल, हिमांशु कुमार, प्रेमशंकर, दीपक, वीरेंद्र कुमार, नन्हे लाल, रोहिताश आदि मौजूद रहे।













































































