पूरे देश में 14 जनवरी को मनाया जाना है मकर संक्रांति का पर्व, शुभ मुहूर्त

makar-sankranti-2020-know-the-mythological-facts-and-beliefs-related-to-this-festival_314998
WhatsAppImage2024-05-04at205835
previous arrow
next arrow

नई दिल्‍ली। मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी, गुरुवार को पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाना है. वैदिक शास्त्रों के अनुसार, मकर राशि शनि देव के स्वामित्व वाली राशि है, ऐसे में ये माना जाता है कि इस दिन पिता सूर्य, अपने पुत्र शनि के घर में प्रवेश करते हैं, जहां पिता-पुत्र का मिलाप होता है. इसके साथ ही इस दिन से ही सूर्य देव उत्तरायण हो जाते हैं. शास्त्रों में उत्तरायण को विशेष रूप से देवताओं का दिन माना जाता है, जबकि दक्षिणायन को देवताओं की रात से संबोधित किया जाता है. ऐसे में सूर्य के उत्तरायण होने के बाद से ही, हिंदू धर्म में शुभ व मांगलिक क्रिया-कार्य की शुरुआत होती है. आइए जानते हैं मकर संक्रांति 2021 का शुभ मुहूर्त और संपूर्ण पूजा-विधि.

ReferralCodeLLVR11
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2024-06-13at1242061
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2025-06-11at40003PM
previous arrow
next arrow

मकर संक्रांति 2021 शुभ मुहूर्त

14 जनवरी, 2021 (गुरुवार)

पुण्य काल मुहूर्त- सुबह 08:03:07 बजे से दोपहर 12:30:00 बजे तक

अवधि- 4 घंटे 26 मिनट

महापुण्य काल मुहूर्त- सुबह 08:03:07 बजे से सुबह 08:27:07 बजे तक

अवधि- 24 मिनट

संक्रांति पल- सुबह 08:03:07 बजे

अलग-अलग नामों से मनाया जाता है मकर संक्रांति का पर्व

भारतवर्ष में मकर संक्रांति का पर्व अलग-अलग नामों से जाना जाता है, जैसे दक्षिणी राज्य तमिलनाडु में मकर संक्रांति के दिन पोंगल का पर्व मनाया जाता है. वहीं उत्तर-पूर्वी राज्य असम में, इसी दिन भोगाली-बिहु मनाए जाने का विधान है. बिहार में मकर संक्राति को खिचड़ी कहा जाता है, जबकि देश के कई अन्य राज्यों में इसे उत्तरायणी के नाम से भी मनाया जाता है. मकर संक्रांति केवल भारत में ही नहीं, बल्कि भारत के दूसरे पड़ोसी देश जैसे नेपाल, श्रीलंका में भी बहुत ही उल्लास के साथ मनाया जाता है. इस दिन कई राज्यों में लोग पतंगबाजी समारोह के साथ मकर संक्रांति का उत्सव मनाते हैं.

मकर संक्रांति का धार्मिक, पौराणिक और वैदिक महत्व

मकर संक्रांति के दिन लोग अच्छी फसल के लिए, ऊर्जा देने वाले एकमात्र प्रत्यक्ष देवता सूर्य को धन्यवाद करते हैं. यही कारण है की इस दिन पवित्र नदियों, कुण्ड और तालाबों में स्नान करने का विशेष महत्व होता है. मान्यता है कि जो भी व्यक्ति इस दिन किसी भी पवित्र नदियों में स्नान कर दान-पुण्य करता है, उसे हमेशा-हमेशा के लिए अपने सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है. पौराणिक काल की बात करें तो, मकर संक्रांति के दिन का महत्व कई प्राचीन वेदों और शास्त्रों में भी पढ़ने को मिल जाएगा.

श्रीमद्भागवत गीता के अनुसार, महाभारत काल में भीष्म पितामह ने भी मकर संक्रांति के दिन को ही अपनी देह त्याग करने के लिए चुना था. वहीं वैदिक शास्त्रों के अनुसार, ज्यादातर हिंदू त्योहारों की गणना चंद्रमा पर आधारित पंचांग के द्वारा की जाती है लेकिन मकर संक्रांति पर्व सूर्य पर आधारित पंचांग की गणना से मनाया जाता है. इसी दिन से ऋतु में परिवर्तन होने लगता है, साथ ही शरद ऋतु क्षीण होने लगती है और बसंत का आगमन शुरू हो जाता है, जिसके परिणामस्वरूप, भारत में दिन लंबे और रातें छोटी हो जाती हैं.

WhatsAppImage2024-10-20at41111PM1
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2023-04-17at53854PM4
previous arrow
next arrow
Home
Live TV
VIDEO NEWS
Verified by MonsterInsights