हिन्दी दिवस पखवाड़ा पर 5 हिन्दी सेवियों एवं 2 दिवंगत साहित्यकारों का मरणोपरान्त सम्मान

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बदायूं । बदायूं क्लब के तत्वावधान में आज हिन्दी दिवस पखवाड़ा अन्तर्गत हिन्दी सेवी सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। आयोजन में मुख्य अतिथि जिलाध्यक्ष भारतीय जनता पार्टी ने 07 हिन्दी सेवियों एवं दिवंगत साहित्यकारों के परिजनों का सम्मान किया। इससे पूर्व मुख्य अतिथि ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्जवलन कर एवं पुष्प अर्पित कर शुभारम्भ किया।

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अभिषेक अनंत ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। इस अवसर कार्यकारिणी की ओर मुख्य अतिथि राजीव गुप्ता का सम्मान किया। आयोजन में बदायूं क्लब की ओर बदायूं जनपद के दो दिवंगत साहित्यकारों को मरणोपरान्त सम्मानित किया गया, ये सभी सम्मान इन दिवंगत साहित्यकारों के परिजनों को सम्मानित किया गया जिसमें हास्य व्यंग कवि स्व. दुर्गेश नंदन वशिष्ठ का सम्मान उनके पुत्र आशीर्वाद वशिष्ठ, अभी हाल ही में दिवंगत हुये कवि आनंद मिश्र अधीर का सम्मान उनके पुत्र अमन मिश्रा को माल्यार्पण कर, शॉल उड़ाकर एवं प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर जनपद के अलग अलग क्षेत्र के 5 हिन्दी विद्वान एवं साहित्यकारों को हिन्दी सेवी सम्मान से सम्मानित किया गया जिसमें आलोचक, कहानीकार एवं नेहरु मैमोरियल शिवनारायण दास कालिज के बी.एड. विभाग में एसोसियेट प्रोफेसर डॉ. सुधाकर आशावादी, नेहरु मैमोरियल शिवनारायण दास कालिज के हिन्दी. विभाग में विभागाध्यक्ष डॉ. मोहनलाल मौर्य, समालोचक, साहित्यकार एवं नेहरु मैमोरियल शिवनारायण दास कालिज के हिन्दी विभाग में असिस्टैन्ट प्रोफेसर रविभूषण पाठक, युवा ग़ज़लकार एवं इलैक्ट्रोनिक मीडिया में पत्रकार भारत शर्मा एवं युवा ग़ज़लकार कुमार आशीष प्रमुख रहे। इस अवसर सभी साहित्यकारों को सम्मानित करते हुये जिलाध्यक्ष राजीव गुप्ता ने कहा, हिन्दी हमारे मन की भाषा है, सारे धर्म, जाति, वर्ग में हिन्दी ही ऐसी भाषा है जो आत्मा से जुड़ी है, बदायूं में हिन्दी के उत्थान में बहुत साहित्यकारों ने कार्य किया है और मौजूदा कवि भी कर रहे हैं, आज आवश्यक्ता ऐसे आयोजनों, और सार्थक कार्यों द्वारा हिन्दी के प्रसार एवं प्रचार और सम्मान के लिए हम सब मिल कर कार्य करें। कवि भारत शर्मा ने काव्यपाठ करते हुये कहा, उसूलों पे अड़ गया हूं मैं, इसलिये पिछड़ गया हूं, मार दी ख़जानों को ठोकर, मुहब्बत में पड़ गया हूं मैं। कवि कुमार आशीष ने कहा, ये अदब की महफिलें हैं इनके कुछ आदाब हैं,
कर नहीं सकते अमल तो ये कबीला छोड़ दो।। संयोजक व बदायूं क्लब के सचिव डॉ. अक्षत अशेष ने कहा, हिन्दी भाषा ही नहीं है यह सिर्फ जुबान, यह अपने जयहिन्द के नारे की पहचान। रवि भूषण पाठक ने कहा, उपसंहार —
अभी तो सारे रस पार्श्व में है
कथा भी उठान पर है
कई पात्रों का हुआ तक नहीं प्रवेश। दास कलिज के हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. मोहनलाल मौर्य ने कहा, हिन्दी हमारी संस्कृति, जीवन, वातावरण में रची बसी है और हम ही लोग उसका तिरस्कार कर रहे हैं जो सोचने की बात है, हमें हिन्दी के महत्व को अपनी नई पीढीं को बताना और समझाना चाहिए । कार्यक्रम का संचालन सांस्कृतिक सचिव रविन्द्र मोहन सक्सेना ने किया। इस अवसर पर आयोजन में इलैक्ट्रोनिक मीडिया एवं प्रिन्ट मीडिया के पत्रकारगण, उपाध्यक्ष डॉ. एस. के. गुप्ता, भाजपा मंत्री प्रभाशंकर, अनूप रस्तोगी, दीपक सक्सेना, संजय रस्तोगी, कुलदीप रस्तोगी, डॉ. रामबहादुर व्यथित, नितिन गुप्ता, राजीव रायजादा, मनोज रस्तोगी, अनूप पाराशर, सुशील शर्मा अनुज सक्सेना, डॉ. सत्यम मिश्र, शराफत समीर, नरेश चन्द्र शंखधार, सौरभ शंखधार, सुमित मिश्रा, प्रदीप शर्मा, आदि उपस्थित रहे।

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