गुरु-शिष्य की परंपरा को मजबूत करता है शिक्षक दिवस: राज्यमंत्री

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बदायूं। देश में 5 सितम्बर पर शिक्षक दिवस यानी टीचर्स डे मनाया जाता है। यह दिन जीवन को सही मार्ग दिखाने वाले गुरुओं को समर्पित है। डॉ. सर्वपल्ली राधा कृष्णन के जन्मदिन को टीचर्स डे के तौर पर मनाया गया। पहली बार शिक्षक दिवस 1962 में मनाया गया था।
रविवार को नगर विकास राज्यमंत्री महेश चन्द्र गुप्ता ने जनपद के नोडल अधिकारी/आयुक्त बरेली मण्डल बरेली आर0 रमेश कुमार, जिलाधिकारी दीपा रंजन, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संकल्प शर्मा, मुख्य विकास अधिकारी निशा अनंत, अपर जिलाधिकारी प्रशासन ऋतु पुनिया, जिला विद्यालय निरीक्षक डॉ0 प्रवेश कुमार एवं बीएसए डॉ0 महेश प्रताप सिंह के साथ श्री कृष्ण इंटर कॉलेज में माँ सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलित कर एवं माल्यार्पण कर शिक्षक दिवस का शुभारंभ किया। इस मौके पर मुख्य अथिति ने माध्यमिक शिक्षा के 75 तथा बेसिक शिक्षा के 75 कुल 150 शिक्षकों को माला पहनाकर, शॉल ओढ़ाकर तथा सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया।

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नगर विकास राज्यमंत्री ने कहा कि गुरु-शिष्य परंपरा को मजबूत करने के लिए शिक्षक दिवस का मौका हम सबके लिए खास होता है। 5 सितंबर का दिन एक ऐसा दिन होता है जब हम अपने गुरुओं (शिक्षकों) के द्वारा किए गए मार्गदर्शन और ज्ञान के बदले हम उन्हें श्रद्धा से याद करते हैं। यह सब अपने गुरु के प्रति आदर-सम्मान दर्शाना होता है। जिस प्रकार से सरकार की योजनाएं चल रही हैं, तो निश्चित ही भारत विश्वगुरु जरूर बनेगा। अब ऐसा लगता है कि सतयुग आ गया है। जब मोदी जी और योगी जी चिंतित हैं कि हमारे देश-प्रदेश की अवाम की कैसे तरक्की हो, तो जरूर इस देश का भाग्य बदलेगा। अच्छा सोचो-अच्छा होगा, आज नहीं तो कल होगा। हम सब जो बोलते हैं, वह इसी ब्रहमाण्ड में गूंजता है। जब हम और आप अच्छा सोचेंगे तो निश्ंिचत ही अच्छा होगा। आपने जब अच्छा सोचा तभी भारत का डंका विश्व में बज रहा है। जब मोदी जी प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने अपना माथा संसद भवन की सीढ़ियों पर रखकर कहा कि हे परमपिता परमेश्वर मुझे इतनी ताकत देना, जिससे मेरे देश के सब लोगों का भला हो। जिसकी कथनी और करनी में कोई अन्तर नहीं होता, उसकी बाणी में दम होता है। अब विश्व भारत की ओर देख रहा है।


आयुक्त बरेली मण्डल बरेली ने कहा कि शिक्षक का बच्चों को एक जिम्मेदार और आदर्श नागरिक बनाने में बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान होता है। डॉ. राधाकृष्णन से जब उनके कुछ दोस्तों और विधार्थियों ने उनके जन्मदिन का आयोजन करने के लिए कहा तो उन्होंने कहा, कि आप सब मेरे जन्म दिन को मनाना चाहते हैं ये बहुत ही खुशी की बात है लेकिन अगर आप मेरे इस खास दिन को शिक्षकों द्वारा किए गए शिक्षा के क्षेत्र में योगदान, समर्पण और उनकी मेहनत को सम्मानित करते हुए मनाएं तो मुझे और ज्यादा प्रसन्नता होगी। उनके इसी इच्छा को ध्यान में रखते हुए सन् 1962 से हर साल 5 सितम्बर को पूरे भारत में शिक्षक दिवस मनाया जाता है। किसी भी गुरु के लिए इससे बड़ी गुरु दक्षिणा नही हो सकती कि उसके शिष्य ने अपने गुरु से मिली शिक्षा से जग में श्रेष्ठता प्राप्त किया हो। गुरु अपने शिष्य को आगे बढ़ते देख निःस्वार्थ रूप से प्रसन्न होते हैं, इसी लिए गुरु की तुलना परमब्रह्म परमेश्वर से भी किया जाता है।
डीएम ने शिक्षक दिवस की बधाई देते हुए कहा कि किसी भी विद्यार्थी का जीवन निर्माण करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका शिक्षक की होती है। विद्यार्थी एक कच्ची मिट्टी के समान होता है उसको आकार शिक्षक द्वारा ही प्राप्त होता है। विद्यार्थियों को अच्छी शिक्षा देना ही काफी नहीं है बल्कि उनको बदलते वातावरण तथा आ रही चुनौतियों से सामना करते हुए उनको तैयार करना भी जरूरी है। पाठ्यक्रम के साथ-साथ बच्चियों को सेक्सुअल हरासमेंट, वीमेन फाइटिंग, साइबर क्राइम इत्यादि के बारे में भी जागरूक करें। विद्यालयों में बच्चों को एक अच्छे वातावरण में शिक्षा ग्रहण कराई जाए। अध्यापकों की जिम्मेदारी है कि पढ़ाई में कमजोर बच्चों को पिछड़ने ना दे उन पर खास ध्यान देकर ऐसे बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाएं।

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