वेदामऊ वैदिक विद्यापीठ में जिला स्तरीय संस्कृत प्रतिभा खोज प्रतियोगिता हुई
बदायूँ। भाषा विभाग उत्तर प्रदेश शासन के अधीन उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान, लखनऊ के तत्वावधान में संस्कृत भाषा के प्रचार-प्रसार हेतु जनपद स्तरीय ‘संस्कृत प्रतिभा खोज प्रतियोगिता’ का आयोजन संस्कृत महाविद्यालय वेदामऊ वैदिक विद्यापीठ में गरिमामयी वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातःकालीन वेला में राष्ट्र रक्षा यज्ञ में आहुतियां डालकर एवं मां शारदे के चित्र पर दीप प्रज्वलन व पुष्पार्चन के साथ हुआ। इसका शुभारंभ मुख्य अतिथि सदर विधायक महेश चंद्र गुप्ता एवं कार्यक्रम अध्यक्ष संस्कृत के प्रकांड विद्वान आचार्य वेदव्रत आर्य द्वारा किया गया।
जनपद स्तरीय इस आयोजन में दो प्रमुख प्रतियोगिताओं—संस्कृत सामान्य ज्ञान (बाल वर्ग) एवं संस्कृत गीत प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें जिले भर के विभिन्न विद्यालयों से आए छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
संस्कृत सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता में संस्कृत माध्यमिक विद्यालय वेदामऊ वैदिक विद्यापीठ के छात्र गोविंद ने प्रथम, गुरुकुल संस्कृत माध्यमिक विद्यालय सूर्यकुंड की छात्रा नंदिनी गौतम ने द्वितीय तथा पार्वती आर्य कन्या संस्कृत इंटर कॉलेज की छात्रा नीलम ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। इस प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में नेहरू मेमोरियल शिवनारायण दास कॉलेज के प्रवक्ता डॉ. बैकुंठ नाथ शुक्ला एवं गुरुकुल महाविद्यालय सूर्यकुंड के प्रवक्ता वेदप्रिय आर्य शामिल रहे।
वहीं, संस्कृत गीत प्रतियोगिता में केदारनाथ महिला इंटर कॉलेज की छात्रा प्रिया दुबे ने अपनी सुरीली प्रस्तुति से प्रथम स्थान हासिल किया। गुरुकुल संस्कृत माध्यमिक विद्यालय के छात्र आशीष द्वितीय तथा संस्कृत विद्यालय इस्लामनगर के छात्र राघव शर्मा तृतीय स्थान पर रहे। गीत प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल का दायित्व राजकीय महाविद्यालय फरीदपुर के प्रोफेसर डॉ. वेद प्रकाश एवं गिन्दो देवी महिला महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. इंदु शर्मा ने निभाया।
मुख्य अतिथि सदर विधायक महेश चंद्र गुप्ता ने कहा कि संस्कृत विश्व की प्राचीनतम भाषा और समस्त भारतीय भाषाओं की जननी है। भारत का वैश्विक गौरव इसी से जुड़ा है। केंद्र व राज्य सरकारें संस्कृत के पुनरुत्थान के लिए निरंतर कार्य कर रही हैं, लेकिन इसके संरक्षण व प्रसार के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है।
कार्यक्रम अध्यक्ष आचार्य वेदव्रत आर्य ने कहा कि संस्कृत और भारतीय संस्कृति के संवर्धन से ही भारत को पुनः विश्व गुरु बनाया जा सकता है। समाज जब अपनी जड़ों से जुड़ा रहेगा, तभी सर्वांगीण विकास संभव है।
अतिथियों ने दोनों प्रतियोगिताओं के विजेताओं को स्मृति चिह्न व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया, साथ ही प्रतिभागियों को सांत्वना पुरस्कार भी वितरित किए गए।
संयोजक व महाविद्यालय के प्राचार्य वेदमित्र आर्य तथा श्रीमती सीमा आर्य ने सभी अतिथियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का आभार प्रकट किया। इस मौके पर सहसंयोजक सर्वेश कुमार गुप्त, साहित्याध्यक्ष आचार्य शिव सिंह यादव, अंकित गुप्ता, वेदभानु आर्य, शकुन गुप्ता, अपर्णा सिंघल, हिमांशु, लोकेश, महेन्द्र पाल सिंह यादव, सत्येंद्र आर्य व प्राचार्य वेदरत्न उपस्थित रहे। संचालन गुरुकुल सूर्यकुंड के प्रवक्ता वेदवीर आर्य ने किया। कार्यक्रम का समापन वैदिक शांति पाठ के साथ हुआ।
















































































