स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर नगर पालिका में सजा काव्य और शायरी का रंग
बदायूं। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर नगर पालिका परिषद के प्रांगण में यौम-ए-आजादी पर आधारित भव्य कवि सम्मेलन एवं मुशायरे का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता, आपसी भाईचारे और सामाजिक सरोकारों से जुड़ी रचनाओं ने श्रोताओं को देर रात तक बांधे रखा। कवियों और शायरों की प्रभावशाली प्रस्तुतियों पर सभागार में मौजूद लोगों ने जमकर तालियां बजाईं।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री आबिद रजा रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि नगर पालिका परिषद की अध्यक्ष फातमा रजा रहीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता आशा राठौर ने की। मुशायरे का शुभारंभ नात-ए-पाक एवं सरस्वती वंदना से किया गया। नात-ए-पाक और सरस्वती वंदना की प्रस्तुति सगीर सैफी एवं सरिता चौहान ने दी। इसके बाद एक-एक कर कवियों और शायरों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कर स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या को साहित्यिक रंग में रंग दिया।कवि सम्मेलन एवं मुशायरे में अशोक खुराना, अहमद अमजदी बदायूंनी, जयवीर चंद्रवंशी, सगीर सैफी, षट्वदन शंखधार, शम्स मुजाहिदी, राजवीर सिंह तरंग, शैलेंद्र मिश्रा देव, डॉ. नासिर, सुनील शर्मा समर्थ, असरार मुज्तर, कमला माहेश्वरी, हैदर खान, सरिता चौहान और पवन शंखधार सहित अन्य कवियों एवं शायरों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं।

कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से देश की आजादी के लिए बलिदान देने वाले अमर शहीदों को याद किया। वहीं शायरों ने मोहब्बत, इंसानियत, गंगा-जमुनी तहजीब और सामाजिक एकता का संदेश देने वाली शायरी पेश की। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आयोजित इस साहित्यिक कार्यक्रम में देशभक्ति की भावना के साथ-साथ सांप्रदायिक सौहार्द और आपसी भाईचारे की झलक भी देखने को मिली।
मुशायरे का संचालन वरिष्ठ कवि सुनील शर्मा समर्थ ने अपने प्रभावशाली अंदाज में किया। उन्होंने कवियों और शायरों को क्रमवार आमंत्रित करते हुए कार्यक्रम को देर रात तक रोचक बनाए रखा। प्रत्येक प्रस्तुति के बाद श्रोताओं ने तालियों के साथ कवियों और शायरों का उत्साहवर्धन किया।कार्यक्रम में नगर पालिका परिषद के समस्त स्टाफ के अलावा शहर के गणमान्य नागरिक, साहित्य प्रेमी और बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। देर रात तक चले कवि सम्मेलन एवं मुशायरे ने स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या को यादगार बना दिया। उपस्थित लोगों ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के साहित्यिक कार्यक्रम समाज में प्रेम, भाईचारे और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
















































































