बरेली। बैंक राष्ट्रीयकरण दिवस 19 जुलाई की पूर्व संध्या पर यूनियन बैंक की मुख्य शाखा में यूपी बैंक एम्प्लॉइज यूनियन की ओर से संगोष्ठी आयोजित की गई। इसमें बैंक कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों ने बैंक राष्ट्रीयकरण के इतिहास, उपलब्धियों और वर्तमान चुनौतियों पर विचार रखे।यूनियन बैंक स्टाफ एसोसिएशन यूपी के महामंत्री एवं यूनाइटेड फोरम बरेली के अध्यक्ष पी.के. माहेश्वरी ने बताया कि 19 जुलाई 1969 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. वी.वी. गिरी के अध्यादेश से 14 बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ, जबकि 1980 में छह और बैंक राष्ट्रीयकृत किए गए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीयकरण के बाद कृषि, ग्रामीण विकास और सामाजिक बैंकिंग को नई गति मिली, लेकिन 1991 के बाद निजीकरण की नीतियों और 2020 में बैंकों के विलय से शाखाओं और कर्मचारियों की संख्या में कमी आई। यूपीबीईयू के अध्यक्ष प्रवीण राठौर ने सार्वजनिक बैंकों को बचाने का संकल्प दोहराते हुए कहा कि निजीकरण देशहित में नहीं है। उन्होंने कहा कि 60 करोड़ से अधिक जनधन खाते, पेंशन वितरण और सरकारी योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचाने में सार्वजनिक बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।पूर्व बैंक यूनियन नेता एवं बरेली ट्रेड यूनियंस फेडरेशन के महामंत्री संजीव मेहरोत्रा ने कहा कि राष्ट्रीयकृत बैंक देश की अमूल्य धरोहर हैं। कृषि, पशुपालन, शिक्षा, उद्योग तथा स्वरोजगार के लिए ऋण उपलब्ध कराकर इन बैंकों ने देश के विकास में अहम योगदान दिया है। उन्होंने छात्र, युवा और कर्मचारी संगठनों से राष्ट्रीयकरण की भावना को मजबूत करने का आह्वान किया।