बदायूँ। बाल संस्कारशाला के बच्चों ने लोकमंगल, वैश्विक शांति, मानवीय सद्भाव तथा संतुलित जनसंख्या व्यवस्था की कामना से गायत्री मंत्र एवं महामृत्युंजय मंत्र की विशेष आहुतियां यज्ञ भगवान को समर्पित कीं। संपूर्ण वातावरण वैदिक ऋचाओं, मंत्रोच्चार एवं यज्ञीय सुगंध से आध्यात्मिक चेतना से अनुप्राणित हो उठा।परिव्राजक सुमित कुकरेती ने विधि-विधानपूर्वक यज्ञ संपन्न कराया। उन्होंने कहा कि यज्ञ भारतीय संस्कृति का शाश्वत प्राणतत्त्व है, जो मानव के अंतःकरण का परिष्कार, पर्यावरण का परिमार्जन तथा सामाजिक समरसता का सशक्त माध्यम है। वरिष्ठ ट्रस्टी सुखपाल शर्मा ने कहा कि जनसंख्या तभी राष्ट्रीय संपदा सिद्ध होती है, जब वह शिक्षित, सुसंस्कृत, स्वावलंबी, अनुशासित एवं राष्ट्रनिष्ठ नागरिकों में रूपांतरित हो।गायत्री परिवार के संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि अनियंत्रित जनसंख्या वृद्धि प्राकृतिक संसाधनों, पर्यावरणीय संतुलन, स्वास्थ्य, शिक्षा एवं रोजगार पर बहुआयामी दबाव उत्पन्न करती है। नारी सशक्तिकरण, संस्कार-संपन्न परिवार व्यवस्था आध्यात्मिक दृष्टिकोण के समन्वित प्रयासों से ही संभव है। उन्होंने कहा कि यज्ञीय जीवनदर्शन व्यक्ति में संयम, सदाचार, सेवा, त्याग एवं उत्तरदायित्वबोध का संवर्धन करता है, जिससे सुदृढ़, संतुलित और समृद्ध राष्ट्र की आधारशिला निर्मित होती है। इस मौके रिया, रौनक, नीतू, पायल, ऐनी, अनुष्का, राधिका, शिखा, दीपाली, शैलेश आदि मौजूद रहे।