बरेली। प्राचीन एवं भव्य बाबा त्रिवटीनाथ मंदिर के श्री रामालय में चल रही श्रीरामचरितमानस कथा के सप्तम दिवस परम पूज्य कथा व्यास पंडित प्रभाकर त्रिपाठी ने भगवान शिव की महिमा, भक्ति और धर्म के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। कथा व्यास ने बताया कि ‘रूद्र’ का अर्थ है प्रभु श्रीराम के प्रेम में विभोर होकर रोने वाले। भगवान शंकर श्रीराम के प्रति गहन प्रेम के कारण ग्यारह प्रकार से भावविभोर होते हैं, इसलिए उन्हें ग्यारह रूद्र कहा गया है। उन्होंने नारद भक्ति सूत्र में वर्णित ग्यारह आसक्तियों तथा भगवान शिव के ग्यारह गुणों की व्याख्या करते हुए ‘व्याज स्तुति’ का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि नारद जी ने माता पार्वती के समक्ष भगवान शिव के गुणों को दोषों के रूप में प्रस्तुत किया, जो वास्तव में उनकी महिमा का ही वर्णन था। कथा के दौरान ब्रह्मा जी और माता पार्वती से जुड़ा प्रसंग सुनाते हुए भगवान शिव की भक्तवत्सलता का वर्णन किया गया। साथ ही अंगद और रावण संवाद के माध्यम से धर्म, नीति और अहंकार के परिणामों पर प्रकाश डाला गया। कथा व्यास ने कहा कि परमात्मा मनुष्य को विभिन्न माध्यमों से सन्मार्ग दिखाते हैं और जो व्यक्ति उस अवसर का सदुपयोग करता है, उसका कल्याण निश्चित होता है। कथा के समापन पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने श्रीरामायण की आरती में भाग लिया तथा प्रसाद ग्रहण किया। कार्यक्रम में मंदिर कमेटी के प्रताप चंद्र सेठ, मीडिया प्रभारी संजीव औतार अग्रवाल और सुभाष मेहरा का विशेष सहयोग रहा।