धर्म ही मोक्ष का सच्चा मार्ग, सतगुरु की शरण में आने वाला ही भवसागर से होता है पार : सत्पुरुष बाबा फुलसंदे
बदायूँ। शहर के राजमहल गार्डन में आज आध्यात्मिक चेतना, भक्ति और श्रद्धा के माहौल के बीच “एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा” मंत्र के ऋषि सत्पुरुष बाबा फुलसंदे वालों के दो दिवसीय भव्य सत्संग का शुभारंभ हुआ। कार्यक्रम का आरंभ ईश वंदना और प्रार्थना के साथ हुआ, जिसके बाद दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं एवं आगंतुकों ने बाबा फुलसंदे का माल्यार्पण कर स्वागत एवं सम्मान किया। सत्संग स्थल पर बड़ी संख्या में धर्मप्रेमियों की उपस्थिति ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
सत्संग को संबोधित करते हुए सत्पुरुष बाबा फुलसंदे ने कहा कि मनुष्य का शरीर पाप और पुण्य का रथ है, जिस पर ज्योति स्वरूप आत्मा सवार रहती है। यदि मनुष्य धर्म को अपना सारथी बना ले तो वह जीवन के समस्त कष्टों और जन्म-मरण के चक्र से मुक्त होकर मोक्ष प्राप्त कर सकता है। उन्होंने कहा कि संसार में वही व्यक्ति सफल होता है, जो अपने जीवन में शुभ कर्मों, पुण्य कार्यों और सतगुरु की शिक्षाओं को अपनाता है। जो लोग परमात्मा के नाम का निरंतर स्मरण करते हैं, उनकी आत्मा का प्रकाश बढ़ता जाता है और उनका जीवन सुख, शांति एवं संतोष से भर जाता है।बाबा फुलसंदे ने कहा कि इंसान की जिंदगी क्षणभंगुर है। यह जीवन कटे-फटे कागज और पुराने वस्त्र के समान है, जिसे परमात्मा अपनी कृपा से निरंतर संवारता रहता है। जो व्यक्ति प्रत्येक सांस के साथ प्रभु का स्मरण करता है, परमात्मा उसे अपना बना लेता है और उसके जीवन में उजाला भर देता है। उन्होंने कहा कि आज का मनुष्य संसार की चकाचौंध में इतना खो गया है कि उसे मृत्यु और जीवन की वास्तविकता दिखाई नहीं देती। धर्म और अध्यात्म की बातें उसे केवल कहानी जैसी लगती हैं, जबकि यही बातें जीवन का वास्तविक सत्य हैं।उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में अधिकांश लोग पाप, अहंकार और स्वार्थ के मार्ग पर चल रहे हैं। जिन लोगों के विचारों और हृदय में विष भरा होता है, उनकी बुद्धि कभी स्थिर नहीं रह सकती और वे निरंतर दुखों का सामना करते हैं। इसके विपरीत जो लोग अपने जीवन को परमात्मा और सतगुरु को समर्पित कर देते हैं, उनके जीवन के दुख दूर हो जाते हैं और उन्हें आत्मिक शांति प्राप्त होती है।
सत्पुरुष बाबा फुलसंदे ने कहा कि ब्रह्मरूप गुरु के चरणों की छाया में रहने वाला साधारण व्यक्ति भी चंदन के समान सुगंधित और सम्मानित बन जाता है। जिस व्यक्ति को शिव स्वरूप गुरु का सान्निध्य प्राप्त हो जाता है, उसके जीवन के कांटे भी मधुबन में परिवर्तित हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि सच्चा सतगुरु ही मनुष्य को अज्ञानता के अंधकार से निकालकर ज्ञान और प्रकाश के मार्ग पर ले जाता है।
उन्होंने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि संसार की सुंदरता और भौतिक सुख स्थायी नहीं हैं। मृत्यु का सत्य हर व्यक्ति के सामने एक दिन अवश्य आता है। इसलिए मनुष्य को चाहिए कि वह अपने जीवन में धर्म, सेवा, सत्संग और प्रभु भक्ति को स्थान दे। जिसके सिर पर पारब्रह्म स्वरूप गुरु का हाथ होता है, उसका जीवन रूपी बेड़ा पार हो जाता है, जबकि मनमाने आचरण और पापकर्म करने वाले लोग जीवन की कठिनाइयों में फंसकर रह जाते हैं।
सत्संग के उपरांत बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने “एक तू सच्चा तेरा नाम सच्चा” मंत्र की दीक्षा ग्रहण की और आध्यात्मिक जीवन अपनाने का संकल्प लिया। पूरे कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला तथा सत्संग स्थल पर भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनूठा संगम दिखाई दिया।
इस अवसर पर जिला मंत्री उदयवीर सिंह यादव, राजेश कुमार, अमित यादव, आयुष भारद्वाज, अक्षत, कौस्तुभ, प्रखर, डॉ. प्रतिष्ठा, मीना रानी, राजेश्वरी राठौर, रजनी यादव, प्रेमलता, अंजू रानी, हरीश यादव, ऋषिपाल, भगवान सिंह, रामावतार मिश्रा, सुशील शर्मा, अरुण शर्मा, तेज प्रकाश शर्मा, रोहिताश सिंह, मो. अराफात, मो. उजैर अहमद, कमल, वैभव शर्मा, जवाहर रस्तोगी, राजेंद्र प्रसाद, रमन सिंह, नदीम अंसारी, सुधीर सक्सेना सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं धर्मप्रेमी उपस्थित रहे।















































































