एडी हैल्थ के निरीक्षण में खुली जिला अस्पताल की हकीकत, सवालों के घेरे में स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली
बरेली। जिला अस्पताल और महिला अस्पताल का औचक निरीक्षण करने पहुंचीं एडी हेल्थ डॉ. सीमा अग्रवाल को सोमवार को कई ऐसे सवालों का सामना करना पड़ा, जिन्होंने स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए। निरीक्षण के दौरान जहां उन्होंने महिला अस्पताल में मिली खामियों पर सीएमएस टी पी प्रसाद को सुधार के निर्देश दिए, वहीं अस्पताल की जमीनी समस्याओं पर पूछे गए कई सवालों पर वह असहज नजर आईं।सबसे बड़ा मुद्दा जिला अस्पताल के अल्ट्रासाउंड केंद्र पर मरीजों को कई-कई दिनों, बल्कि हफ्तों बाद की तारीख मिलने का मामला उठा। जब पत्रकारों ने पूछा कि आखिर गरीब मरीजों को समय पर जांच क्यों नहीं मिल पा रही और इतनी लंबी वेटिंग किसकी जिम्मेदारी है, तो एडी हेल्थ सीमा अग्रवाल स्पष्ट जवाब देने से बचती दिखाई दीं। उन्होंने मामले को दिखवाने की बात कहकर जवाब टाल दिया।निरीक्षण के दौरान आउटसोर्स कर्मचारियों ने 11 महीने से वेतन न मिलने की शिकायत भी रखी। महिला कर्मचारी शशि यादव ने आरोप लगाया कि वेतन मांगने पर डॉ. शशि सक्सेना ने उनके साथ धक्का-मुक्की की। इस गंभीर आरोप पर भी एडी हेल्थ ने अनभिज्ञता जताई।इसके अलावा एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पर मरीजों से अभद्र व्यवहार करने के आरोप भी सामने आए। वहीं चपरासी द्वारा बाबू का काम किए जाने के सवाल पर भी एडी हेल्थ ने कहा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं है और वह इसकी जांच कराएंगी।निरीक्षण के दौरान यह भी साफ नजर आया कि अस्पताल में कई जगह व्यवस्थाएं अधिकारियों के नियंत्रण से बाहर होती दिख रही हैं। खुद एडी हेल्थ ने माना कि व्यवस्थाओं में सुधार की जरूरत है, लेकिन सवाल यह है कि यदि बार-बार शिकायतों और निरीक्षणों के बावजूद हालात नहीं बदल रहे, तो जिम्मेदारी आखिर तय कब होगी?
अल्ट्रासाउंड की लंबी तारीखें, कर्मचारियों का महीनों का बकाया वेतन, मरीजों से अभद्रता के आरोप और प्रशासनिक शिथिलता इन सबने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि स्वास्थ्य विभाग में समस्याएं केवल कागजों पर नहीं, बल्कि अस्पताल की रोजमर्रा की व्यवस्था में गहराई तक पैठ बना चुकी हैं।















































































