पूर्णागिरी देवी मंदिर भी 108 शक्तिपीठों की कड़ी में है शामिल

WhatsApp Image 2026-05-05 at 7.28.20 PM
WhatsAppImage2026-02-15at42216PM1
previous arrow
next arrow

बरेली। उत्तराखंड के चंपावत जिले के टनकपुर में समुद्र तल से लगभग 5 हजार फिट ऊंचाई पर स्थित पूर्णागिरी देवी मंदिर देश के प्रमुख 51 (कुल 108) शक्तिपीठों वाली कड़ी में से एक है। जहां हर वर्ष चैत्र नवरात्रि में मेला लगता है जो जून तक लगभग डेढ़ माह तक चलता है। वर्षाकाल को छोड़कर पूरे वर्ष लोग पूर्णागिरी मां के दर्शन को आते रहते हैं । पौराणिक धार्मिक ग्रंथ की कथा के अनुसार भगवान शिव जब अपनी अर्धांगिनी सती के पार्थिव शरीर को लेकर तांडव कर रहे थे। और धरती हिल रही थी। जिस पर भगवान विष्णु ने सृष्टि के विनाश को रोकने के लिए अपने सुदर्शन चक्र का उपयोग किया। भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र से सती के 51, (कुछ ग्रंथों में 52) टुकड़े कटकर अलग अलग जगह गिरे थे। श्री भागवत पुराण के अनुसार 108 शक्तिपीठ माता सती के अंगों और आभूषणों के गिरने वाले स्थानों पर बने। जो पूरे भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल में अब फैले हुए हैं। इन शक्ति पीठ में से प्रमुख 51, 52 या आभूषण गिरने के स्थान वाले कुल 108 शक्तिपीठ ग्रंथों के अनुसार माने जाते हैं। प्रमुख शक्ति पीठों में कामाख्या देवी मंदिर (असम), मां वैष्णो देवी मंदिर (जम्मू), ज्वाला देवी मंदिर (हिमाचल) और महाकालिका देवी मंदिर (कोलकाता) आदि शामिल हैं, 51 शक्ति पीठ कहलाए गए। इस पर्वत पर यहाँ भगवान शिव की सती हुई अर्धांगिनी की नाभि कटकर गिरी थी जिसे अब पूर्णागिरी मंदिर के नाम से देश भर में जाना जाता है। यह पूर्णागिरी मंदिर उत्तराखंड के चंपावत जिले के टनकपुर रेल स्टेशन से लगभग 20- 21 किलोमीटर दूर है। टनकपुर रेलवे स्टेशन के बाहर से ठुलीगाड़ फिर टुन्नास तक दो चरण में आने को टैक्सी वाहन मिलते हैं। लोग अपने निजी वाहन से भी सड़क मार्ग से ठुलीगाड़ होकर सीधे टुन्नास तक आ सकते हैं। जहां वाहन पार्किंग एवं रात्रि में रहने, स्नान भोजन की व्यवस्था हर समय रहती है। लगभग 3 किलोमीटर के सीढ़ी वाले पूरे मार्ग पर पक्की टिन शेड की व्यवस्था है। पूरे मार्ग पर ठहरने, स्नान, भोजन एवं चाय नाश्ता हर समय मिलता रहता है । पूर्णागिरी मंदिर का इतिहास /पौराणिक कथाएं : पौराणिक मान्यता है कि भगवान शिव की अर्धांगिनी अपने पिता राजा दक्ष के कराए जा रहे यज्ञ में पति के अपमान से क्षुब्ध होकर उसी यज्ञ कुंड में सती हो गई थी। भगवान शिव अर्धांगिनी सती के पार्थिव शरीर को लेकर जब तांडव कर रहे थे तभी भगवान विष्णु ने विनाश रोकने को अपने चक्र से उनकी अर्धांगिनी सती के शरीर के 51 टुकड़े कर दिए थे। सुदर्शन चक्र से कट कर सती की नाभि का भाग इस स्थल पर गिरा था। जिसे आजकल पूर्णागिरी मंदिर के नाम से जाना जाता है। विकलिपीडिया के अनुसार गुजरात के एक व्यापारी चंद्र तिवारी ने माता के उन्हें सपने में आने के उपरांत उन्होंने लगभग वर्ष 1632 में राजा ज्ञानचंद के शासनकाल में इस पूर्णागिरी मंदिर की स्थापना कराई थी। टनकपुर में स्थित पूर्णागिरी मंदिर जाने के टनकपुर रेल एवं बस की सुविधा है। टनकपुर रेल स्टेशन के बाहर से ठुलीगाड़/टुन्नास के लिए टैक्सी सेवाएं मेले के दौरान काफी मिलती है । टुन्नास से लगभग 3 किलोमीटर की 500 सीढ़ियों से भक्तगण खड़ी चढ़ाई पूरी कर पूर्णागिरी मंदिर आते हैं और पूर्णागिरी मां के दर्शन कर अपने को सौभाग्यशाली मानते हैं। पूरा लगभग 500 सीढ़ियों वाला मार्ग टिन शेड से ढका हुआ है। वापसी में पूर्णागिरी मंदिर के दर्शन के बाद भक्त इसी रास्ते पर बने भैरो मंदिर के भी दर्शन करते हैं। मंदिर के पूरे रास्ते में आराम करने एवं रात्रि में रुकने एवं स्नान आदि की पक्की व्यवस्था काफी संख्या में हैं । झूठे का मंदिर की कथा के अनुसार पूर्णागिरी मंदिर के पास ही ‘झूठे का मंदिर’ नामक एक स्थान है। मान्यता है कि एक व्यापारी ने मन्नत मांगी थी कि यदि उसके पुत्र होने की इच्छा पूरी हुई तो वह सोने की वेदी बनवाएगा लेकिन पुत्र होने वाली इच्छा पूरी होने पर उसने लालच में तांबे पर सोने की परत चढ़ा दी। मां की नाराजगी के कारण वह वेदी वहीं रुक गई और तब से इसे ‘झूठे का मंदिर’ के नाम से जाना जाता है। सिद्धबाबा का मंदिर : प्राचीन कथा के अनुसार एक साधु ने पूर्णागिरी के शिखर पर पहुंचने की जिद की तो मां पूर्णागिरी ने उन्हें शारदा नदी के पार फेंक दिया था लेकिन बाद में माता पूर्णागिरी ने उन्हें ‘सिद्ध बाबा’ के रूप में प्रसिद्ध होने का आशीर्वाद भी दिया था। पूर्णागिरी मंदिर आने वाले भक्तगण माँ पूर्णागिरी के दर्शन के बाद शारदा नदी पर बने बेराज को पार करके कुछ ही दूर स्थित अब नेपाल के कंचनपुर में स्थित सिद्ध बाबा के दर्शन भी करते हैं। जहां जाने के लिए शारदा बेराज पार कर वहां बने भारतीय सेना के चेकपोस्ट पर इंट्री करा भक्तगण पैदल ही नेपाल में लगभग एक किलोमीटर दूर कंचनपुर स्थित सिद्धबाबा मंदिर जाते हैं । यहां मोटर बाइक की सस्ती सवारी भी 10 रुपए प्रति व्यक्ति दिन के समय उपलब्ध रहती है । यहां पर एक बाजार भी है जहां विदेशी सामान भी मिलता है। बीते दिनों मई 2026 में हमने भी अपने कुछ पत्रकार साथियों अशोक शर्मा, पुत्तन सक्सेना, नीरज आनंद, ललित कश्यप, शुभम ठाकुर, सुयोग्य सिंह, लोटा मुरादाबादी, गुरुवचन दास, अरविंद, पंकज शर्मा आदि के साथ पूर्णागिरी एवं सिद्धबाबा मंदिर के दर्शन किए। निर्भय सक्सेना

ReferralCodeLLVR11
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2024-06-13at1242061
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2025-06-11at40003PM
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2024-10-20at41111PM1
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2023-04-17at53854PM4
previous arrow
next arrow
Home
Live TV
VIDEO NEWS
Verified by MonsterInsights