बरेली। नवाबगंज क्षेत्र के ग्राम मल्लहपुर में बंद पड़े प्राथमिक विद्यालय के पुनः खुलने पर ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई। लंबे समय से चल रहे संघर्ष के बाद विद्यालय खुलने पर गांव में जश्न जैसा माहौल देखने को मिला। ग्रामीणों ने इस उपलब्धि के लिए पैनी नजर संस्था की अध्यक्ष एडवोकेट सुनीता गंगवार का भव्य स्वागत कर उनका आभार व्यक्त किया।ग्रामीणों ने बताया कि विद्यालय को खुलवाने के लिए वे पिछले जुलाई माह से लगातार प्रयासरत थे। कई जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के चक्कर काटने के बावजूद जब कोई समाधान नहीं निकला, तब वे निराश होकर सुनीता गंगवार के पास पहुंचे। उनके प्रयासों और पहल के बाद आखिरकार विद्यालय का ताला खुल सका।विद्यालय खुलने से बच्चों में भी खासा उत्साह देखा गया। अभिभावकों का कहना है कि अब उनके बच्चों को फिर से गांव में ही शिक्षा का अवसर मिल सकेगा।इस मौके पर सुनीता गंगवार ने कहा कि शिक्षा बच्चों का मौलिक अधिकार है और इससे वंचित करना कानूनन अपराध है। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में गंदी राजनीति के कारण विद्यालय बंद था, जिसमें जनप्रतिनिधियों और शिक्षा विभाग दोनों की भूमिका संदिग्ध रही।उन्होंने आगे कहा कि शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषय पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। क्षेत्र में अभी भी कई ऐसे विद्यालय हैं जो एक किलोमीटर से अधिक दूरी पर स्थित हैं, उन्हें भी खोलने और सुचारू रूप से संचालित करने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं।उन्होंने सरकार से मांग की कि सरकारी स्कूलों को बंद करने के बजाय उनमें सुधार किया जाए। अच्छी इमारत, बेहतर सुविधाएं और पर्याप्त शिक्षकों की नियुक्ति से ही शिक्षा व्यवस्था मजबूत हो सकती है, जिससे किसान और मजदूर वर्ग के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिल सके।ग्रामीणों ने संकल्प लिया कि वे अपने गांव में शिक्षा के अधिकार को सुनिश्चित करने के लिए आगे भी एकजुट होकर प्रयास करते रहेंगे।