तुलसी कथा और जालंधर उद्धार का मार्मिक वर्णन
बरेली। राजेंद्र नगर स्थित नीलकंठ मंदिर में चल रही श्री शिव महापुराण कथा के सातवें दिवस पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी और पूरा वातावरण शिवभक्ति में सराबोर हो गया। वृंदावन से पधारी कथा व्यास राध्या भारद्वाज जी ने आज के प्रसंग में तुलसी कथा और जालंधर उद्धार का अत्यंत विस्तृत एवं भावपूर्ण वर्णन किया।कथा के दौरान उन्होंने बताया कि तुलसी (वृंदा) की पतिव्रता शक्ति और अटूट निष्ठा के कारण ही असुरराज जालंधर अत्यंत शक्तिशाली बन गया था। उसकी शक्ति का मूल कारण उसकी पत्नी की पवित्रता और धर्मनिष्ठा थी, जिसके कारण देवता भी उसे पराजित नहीं कर पा रहे थे। जालंधर के अत्याचारों से त्रस्त होकर देवताओं ने भगवान शिव से प्रार्थना की।
कथा व्यास ने आगे बताया कि भगवान विष्णु ने लीला के माध्यम से वृंदा की तपस्या और पतिव्रत धर्म की परीक्षा ली, जिससे जालंधर की शक्ति क्षीण हो गई। इसके पश्चात भगवान शिव ने जालंधर का वध कर देवताओं को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया। इस प्रसंग के माध्यम से कथा व्यास ने धर्म, निष्ठा और सत्य के महत्व को विस्तार से समझाया।तुलसी कथा के संदर्भ में उन्होंने बताया कि वृंदा के त्याग और तपस्या के कारण ही उन्हें तुलसी के रूप में अमरत्व प्राप्त हुआ और हिंदू धर्म में तुलसी को अत्यंत पवित्र स्थान दिया गया है। तुलसी पूजन का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि यह केवल धार्मिक परंपरा ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शुद्धि का भी माध्यम है।आज के कार्यक्रम के मुख्य यजमान वार्ड 23 के पार्षद सतीश कातिब ‘मम्मा’ एवं पूर्व पार्षद माया सक्सेना रही। मुख्य अतिथि के रूप में अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक की चेयरमैन श्रुति गंगवार एवं पंजाबी सभा महिला इकाई की अध्यक्षा इंदु सेठी उपस्थित रहीं। माया सक्सेना, गीता अरोड़ा और प्रेरणा कपूर द्वारा सभी अतिथियों का भव्य स्वागत एवं सम्मान किया गया।इस अवसर पर अर्चना अग्रवाल, अनीता, सीमा कपूर, पूजा, सरिता, दुर्गा, आयुष अग्रवाल, पवन अरोड़ा, हरवेंदृ रहेजा, श्याम माथुर, रोहित कुमार, ए बी सक्सेना सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा के दौरान श्रद्धालु भक्ति रस में डूबे नजर आए और पूरा मंदिर परिसर हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठा।














































































