रामनवमी पर मेयर डॉ. उमेश गौतम और पार्थ गौतम ने किया 500 कन्याओं का किया पूजन बांटे उपहार
बरेली। चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि यानी रामनवमी के पावन अवसर पर आज बरेली में भक्ति और सामाजिक समरसता की एक अद्भुत तस्वीर देखने को मिली। बरेली के महापौर डॉ. उमेश गौतम और उनके पुत्र, पार्थ गौतम फाउंडेशन के अध्यक्ष पार्थ गौतम, ने मिलकर भव्य कन्या पूजन का आयोजन किया। इस दौरान नाथ नगरी बरेली की 500 से अधिक कन्याओं का विधि-विधान से पूजन कर उनका आशीर्वाद लिया गया।

500 से अधिक देवियों का हुआ वंदन ,कार्यक्रम में 500 से अधिक छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनका स्वागत किया गया। मेयर डॉ. उमेश गौतम और युवा सेवक संघ के प्रधान सेवक पार्थ गौतम ने खुद प्रत्येक कन्या का तिलक लगाया और उन्हें पुष्प अर्पित कर नमन किया। पूरे आयोजन के दौरान “जय माता दी” और “जय श्री राम” के जयकारों से वातावरण गुंजायमान रहा।
पार्थ गौतम फाउंडेशन की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में पार्थ गौतम ने सेवा की मिसाल पेश की। उन्होंने स्वयं अपने हाथों से सभी कन्याओं को हलवा-पूरी और चने का प्रसाद खिलाया। पिता-पुत्र की इस जोड़ी ने कन्याओं के चरण स्पर्श कर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस कन्या पूजन की खास बात यह रही कि इसमें पार्थ गौतम फाउंडेशन द्वारा होली और दिवाली के दौरान चलाए गए “खुशियों के रंग, अपनों के संग” और “हर घर दिवाली” जैसे विशेष कैंपेन के माध्यम से संपर्क में आए परिवारों की कन्याएं प्रमुखता से शामिल हुईं। इसके अतिरिक्त शहर के अन्य क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में कन्याएं इस पावन उत्सव का हिस्सा बनीं।
इस अवसर पर महापौर डॉ. उमेश गौतम ने कहा कि कन्याएं साक्षात देवी का रूप होती हैं और उनका पूजन करना सौभाग्य की बात है। वहीं पार्थ गौतम ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि पार्थ गौतम फाउंडेशन का लक्ष्य केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि समाज के हर तबके को सम्मान और मुख्यधारा से जोड़ना है।
पूजन के पश्चात सभी 500 कन्याओं को विशेष उपहार और दक्षिणा भेंट की गई। उपहार पाकर नन्ही कन्याओं के चेहरे खुशी से खिल उठे।
महापौर परिवार द्वारा आयोजित इस बड़े स्तर के कन्या पूजन में शहर के विभिन्न क्षेत्रों से आई कन्याओं ने भाग लिया, जिससे समाज में नारी शक्ति के सम्मान का सकारात्मक संदेश गया।
इस आयोजन ने न केवल धार्मिक महत्ता को दर्शाया, बल्कि ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ और महिला सम्मान की भावना को भी मजबूती दी।














































































