बदायूं के एचपी इंटरनेशनल स्कूल में वार्षिक परीक्षाफल वितरण महोत्सव बना उम्मीदों का उत्सव
बदायूं। शिक्षा के मंदिर में आज खुशी, गर्व और उम्मीदों का अद्भुत संगम देखने को मिला, जब एचपी इंटरनेशनल स्कूल में वार्षिक परीक्षाफल वितरण महोत्सव 2025-26 बड़े ही भव्य और भावनात्मक अंदाज़ में आयोजित किया गया। विद्यालय प्रांगण में सजे मंच, मुस्कुराते चेहरे और अभिभावकों की उत्सुक निगाहें इस आयोजन को एक खास पहचान दे रही थीं। मुख्य अतिथि सदर विधायक महेश चंद्र गुप्ता ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया, और इसी के साथ एक नए शैक्षणिक आत्मविश्वास की शुरुआत भी हो गई।

कार्यक्रम में एचपी ग्रुप के अध्यक्ष हर प्रसाद सिंह पटेल, एचपी ग्रुप निदेशक यादवेंद्र पटेल, गजेंद्र पटेल, तीर्थेद्र पटेल, एचपी इंटरनेशनल स्कूल प्रबंधक निदेशक शिवम पटेल, निदेशिका सेजल पटेल, एचपी इंस्टिट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन के निदेशक रजत पटेल, एचपी इंटरनेशनल स्कूल प्रधानाचार्य संदीप पांडे और उप-प्रधानाचार्य पंकज गुप्ता सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। लेकिन सबसे ज्यादा तालियां तब गूंजीं जब नन्हे छात्रों की ग्रेजुएशन सेरेमनी ने मंच पर मासूमियत और उपलब्धि का ऐसा संगम पेश किया, जिसे देखकर हर आंख में चमक और हर चेहरे पर गर्व साफ नजर आया।
इसके बाद शुरू हुआ वह पल, जिसका इंतजार हर छात्र और अभिभावक कर रहा था—रिजल्ट वितरण। मंच से टॉप करने वाले छात्रों को ट्रॉफी, मेडल और साइंटिफिक उपहार देकर सम्मानित किया गया। प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान पाने वाले छात्रों की खुशी देखते ही बन रही थी, वहीं 100% अटेंडेंस पाने वाले छात्रों को विशेष पुरस्कार देकर अनुशासन और समर्पण का संदेश भी दिया गया। कक्षा 10 और 12 को छोड़कर सभी कक्षाओं के परीक्षाफल घोषित किए गए, और पूरे परिसर में उत्साह का माहौल छा गया।
अपने संबोधन में मुख्य अतिथि महेश चंद्र गुप्ता ने अभिभावकों से कहा—“अच्छा सोचो, अच्छा होगा… आज नहीं तो कल जरूर होगा।” उन्होंने बच्चों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए प्रेरित किया, साथ ही यह भी कहा कि यही बच्चे देश को विश्व गुरु बनाने में अहम भूमिका निभाएंगे। अंत में प्रबंधक निदेशक शिवम पटेल ने विद्यालय परिवार, शिक्षकों और अभिभावकों का आभार व्यक्त करते हुए इस सफल आयोजन को एक सामूहिक प्रयास बताया। यह महोत्सव सिर्फ रिजल्ट का नहीं, बल्कि सपनों, मेहनत और विश्वास का उत्सव बनकर यादगार हो गया।














































































