बदायूं की बड़े सरकार की दरगाह पर नगर पालिका का रोज़ा इफ्तार, कौमी एकता की दिखी मिसाल
बदायूं। शहर की गंगा-जमुनी तहज़ीब और आपसी भाईचारे की खूबसूरत झलक उस समय देखने को मिली जब सदर नगर पालिका परिषद की ओर से उर्स के अवसर पर हज़रत सुल्तानुल आरफ़ीन बड़े सरकार की दरगाह पर भव्य रोज़ा इफ्तार का आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में हिन्दू-मुस्लिम रोज़ेदारों और शहरवासियों ने शामिल होकर एक साथ रोज़ा इफ्तार किया और आपसी प्रेम, सद्भाव तथा एकता का संदेश दिया।
नगर पालिका परिषद की ओर से आयोजित यह रोज़ा इफ्तार कार्यक्रम वर्षों पुरानी परम्परा का हिस्सा है। हर वर्ष उर्स के मौके पर दरगाह परिसर में रोज़ेदारों के लिए इफ्तार का आयोजन किया जाता है, जिसमें विभिन्न समुदायों के लोग बड़ी संख्या में शामिल होकर सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश करते हैं।
इस बार भी नगर पालिका चेयरमैन फात्मा रज़ा की देखरेख में इस कार्यक्रम को बड़े ही व्यवस्थित और श्रद्धा के साथ आयोजित किया गया।
इफ्तार से पहले दरगाह परिसर में अकीदतमंदों की भीड़ उमड़ पड़ी। रोज़ेदारों के साथ-साथ शहर के कई गणमान्य लोग और आम नागरिक भी कार्यक्रम में पहुंचे। सभी ने बड़े सरकार की दरगाह पर हाज़िरी लगाई और देश में अमन-चैन, तरक्की और खुशहाली की दुआ मांगी।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे सपा सांसद आदित्य यादव और पूर्व मंत्री आबिद रज़ा ने बड़े सरकार की दरगाह पर अकीदत पेश की। दोनों नेताओं ने दरगाह पर मौजूद लोगों को रमजान की मुबारकबाद दी और रोज़ा इफ्तार कार्यक्रम की सराहना की।
सांसद आदित्य यादव ने अपने संबोधन में कहा कि इस तरह के धार्मिक और सामाजिक आयोजन समाज में आपसी सौहार्द और भाईचारे को मजबूत करने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि बदायूं की पहचान ही उसकी गंगा-जमुनी तहज़ीब है, जहां अलग-अलग धर्मों के लोग सदियों से मिलजुल कर रहते आए हैं।
उन्होंने कहा, “बड़े सरकार और छोटे सरकार की इस पवित्र धरती से अमन और शांति का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचता है। रमजान का पवित्र महीना केवल मुस्लिम समाज के लिए ही नहीं बल्कि सभी धर्मों के लोगों के लिए प्रेम, सहयोग और भाईचारे की सीख देने वाला महीना है।”
सांसद ने आगे कहा कि ऐसे आयोजन केवल धार्मिक रस्मों तक सीमित नहीं होते, बल्कि इनका उद्देश्य समाज के सभी वर्गों को एक मंच पर लाकर सामाजिक समरसता और एकता को मजबूत करना भी होता है। जब अलग-अलग धर्मों और समुदायों के लोग एक साथ बैठकर इफ्तार करते हैं तो यह हमारे देश की संस्कृति और परंपरा की खूबसूरती को दर्शाता है।
पूर्व मंत्री आबिद रज़ा ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत दुनिया में कौमी एकता और भाईचारे की सबसे बड़ी मिसाल है। यहां सभी धर्मों और संस्कृतियों के लोग एक गुलदस्ते की तरह रहते हैं और यही हमारे देश की सबसे बड़ी ताकत है।
उन्होंने कहा कि रमजान का मुबारक महीना रहमतों, बरकतों और इबादतों का महीना है, जो इंसान को संयम, सेवा और भाईचारे का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि इस पवित्र महीने में लोग रोज़ा रखकर आत्मसंयम और इंसानियत की राह पर चलने का संकल्प लेते हैं।
पूर्व मंत्री आबिद रज़ा ने कहा कि बदायूं की धरती हमेशा से गंगा-जमुनी तहज़ीब की प्रतीक रही है। यहां हिन्दू-मुस्लिम समुदाय के लोग एक-दूसरे के त्योहारों में शामिल होकर खुशियां बांटते हैं। रोज़ा इफ्तार जैसे आयोजन इस भाईचारे को और मजबूत करते हैं।
उन्होंने कहा, “आज यहां जिस तरह से हिन्दू-मुस्लिम भाई एक साथ बैठकर रोज़ा इफ्तार कर रहे हैं, वह हमारे शहर की खूबसूरत परंपरा को दर्शाता है। यह संदेश देता है कि हम सब एक परिवार की तरह हैं और एक-दूसरे की खुशियों और त्योहारों में बराबर के भागीदार हैं।”
उन्होंने आगे कहा कि रमजान का महीना हमें सब्र, सेवा और इंसानियत की राह पर चलने की प्रेरणा देता है। ऊपर वाला हम सभी की इबादतें कबूल करे और अपने रहमतों से नवाजे। उन्होंने कहा कि कुछ ही दिनों बाद ईद का त्योहार आने वाला है और इस मौके पर उन्होंने सभी लोगों को अग्रिम बधाई दी।
नगर पालिका चेयरमैन फात्मा रज़ा ने कहा कि रोज़ा इफ्तार जैसे आयोजन समाज में समाजवाद, भाईचारे और आपसी सौहार्द को मजबूत करने का माध्यम बनते हैं। उन्होंने कहा कि नगर पालिका परिषद का प्रयास हमेशा यही रहता है कि शहर में सभी समुदायों के बीच प्रेम और सद्भाव का माहौल बना रहे।
उन्होंने बताया कि बड़े सरकार की दरगाह पर उर्स के अवसर पर रोज़ा इफ्तार कराने की परंपरा कई वर्षों से चली आ रही है और नगर पालिका परिषद हर साल इसे पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ निभाती है।
कार्यक्रम के दौरान दरगाह परिसर में इफ्तार के लिए खजूर, फल, शरबत और अन्य व्यंजनों की व्यवस्था की गई थी। जैसे ही मग़रिब की अज़ान हुई, रोज़ेदारों ने दुआ पढ़कर रोज़ा खोला और एक-दूसरे को रमजान की मुबारकबाद दी।
इस दौरान हजारों की संख्या में मौजूद लोगों ने एक साथ बैठकर इफ्तार किया, जिससे भाईचारे और एकता का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। कार्यक्रम में शहर के विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक संगठनों से जुड़े लोग भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
रोज़ा इफ्तार के इस आयोजन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि बदायूं की पहचान केवल ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों से ही नहीं, बल्कि यहां की आपसी एकता, भाईचारे और गंगा-जमुनी संस्कृति से भी है। ऐसे आयोजन समाज में प्रेम, सद्भाव और सहयोग की भावना को मजबूत करने का काम करते हैं और यही हमारे देश की असली ताकत है।
इस अवसर पर पूर्व सपा जिलाध्यक्ष प्रेमपाल सिंह, कैप्टन अर्जुन, जवाहर सिंह यादव, जिलाबार पूर्व अध्यक्ष पवन गुप्ता, बलवीर सिंह यादव समेत गणमान्य मौजूद रहा














































































