बरेली। स्थानीय रोज़गार को बढ़ावा देने और पारंपरिक कला को संरक्षित करने की दिशा में बरेली कैंटोनमेंट बोर्ड ने सराहनीय पहल की है। बोर्ड की सीईओ डॉ. तनु जैन स्वयं एक मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कारीगर के घर पहुँचीं और उनकी कार्यप्रणाली को करीब से समझा। दौरे के दौरान उन्होंने हाथ से दीये और अन्य मिट्टी के बर्तन बनाने की बारीक प्रक्रिया देखी। बड़ी संख्या में तैयार दीयों को सावधानी से सुखाने के लिए सजाया गया था, जो आने वाले त्योहारों की तैयारी और कारीगर परिवारों की मेहनत का प्रतीक है। डॉ. जैन ने कारीगर परिवार से बातचीत कर उनकी समस्याएँ जानीं, जिनमें सीमित संसाधन, बाज़ार तक पहुँच की कमी, आर्थिक तंगी और संस्थागत सहयोग की आवश्यकता प्रमुख हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि इन कारीगरों को प्रदर्शनियों, बेहतर मार्केट लिंक और कैंटोनमेंट स्तर पर आयोजित हस्तशिल्प कार्यक्रमों से जोड़ा जाएगा। स्थानीय प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के लिए उन्होंने कारीगरों को उत्पादों के ऑर्डर भी दिए, जिससे “वोकल फॉर लोकल” का संदेश व्यवहारिक रूप में सामने आया। उन्होंने कहा कि देश की सांस्कृतिक विरासत को बचाने के लिए ज़मीनी कारीगरों को सशक्त बनाना और टिकाऊ रोज़गार उपलब्ध कराना आवश्यक है। कैंटोनमेंट बोर्ड अब ऐसी कारीगर इकाइयों को भविष्य की हस्तशिल्प प्रदर्शनियों और सामुदायिक आयोजनों से जोड़ने की योजना बना रहा है, ताकि पारंपरिक कारीगर परिवारों की आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित की जा सके।