बाबा त्रिवटीनाथ मंदिर में माँ भवानी के भव्य मंदिर का निर्माण पूर्ण, 16 से 20 फरवरी तक प्राण प्रतिष्ठा समारोह
बरेली। नाथ नगरी के प्राचीनतम एवं भव्यतम बाबा त्रिवटीनाथ मंदिर परिसर में जगदजननि माँ भवानी के नवीन एवं दिव्य भवन/मंदिर का निर्माण कार्य पूर्ण हो गया है। मंदिर सेवा समिति द्वारा गत वर्ष 15 जनवरी को आधारशिला पूजन के साथ प्रारंभ हुआ यह निर्माण कार्य मात्र 12 माह में पूर्ण कर लिया गया। मंदिर के मीडिया प्रभारी संजीव औतार अग्रवाल ने बताया कि अब तक नवदुर्गा माँ भवानी के सभी स्वरूप शिवालय में विराजित थे, किंतु भक्तों की लंबे समय से इच्छा थी कि माँ भवानी का एक भव्य और स्वतंत्र मंदिर बने। भक्तों की आस्था का सम्मान करते हुए मंदिर सेवा समिति के मंत्री प्रताप चन्द्र सेठ ने इस निर्माण का संकल्प लिया। अयोध्या की तर्ज पर पत्थर कला नवीन मंदिर के निर्माण में राम मंदिर अयोध्या में विराजित श्री रामलला के पीछे किए गए सुंदर पत्थर शिल्प को आधार बनाया गया है। मंदिर को गुलाबी जयपुरी पत्थरों से सुसज्जित किया गया है। आकर्षक फॉल्स सीलिंग और बारीक कारीगरी मंदिर की दिव्यता को और बढ़ा रही है।
माँ भवानी के सिंहवाहिनी स्वरूप की प्रतिष्ठा की जा चुकी है तथा शिवालय में विराजित सभी स्वरूपों को नवीन मंदिर में स्थापित किया जा रहा है। मंदिर समिति द्वारा बाबा त्रिवटीनाथ शिवालय को भी नए कलेवर में सजाया जा रहा है। मुख्य द्वार के ऊपर भोलेनाथ के श्री नटराज स्वरूप की स्थापना की गई है। साथ ही महाकाल बाबा शिवशंकर के 10 नए कल्याणकारी स्वरूपों से शिवालय को अलंकृत किया जा रहा है। मंदिर परिसर में चार भव्य म्यूरल स्वरूप श्री शिव, शिव बारात, श्री राम दरबार एवं श्री राधा-कृष्ण भी स्थापित किए गए हैं, जिनके दर्शन से भक्तों को आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति होगी। 16 से 20 फरवरी तक प्राण प्रतिष्ठा समारोह मंदिर सेवा समिति द्वारा माँ भवानी मंदिर की भव्य प्राण प्रतिष्ठा 16 से 20 फरवरी तक आयोजित की जाएगी। 16 से 19 फरवरी: प्रतिदिन प्रातः 9 से 11 बजे तक भजन, पूजन एवं अर्चन 20 फरवरी: मुख्य प्राण प्रतिष्ठा प्रातः 8 से 11:30 बजे तक, तत्पश्चात भव्य महाआरती मंदिर सेवा समिति के पदाधिकारियों प्रताप चन्द्र सेठ, संजीव औतार अग्रवाल, सुभाष मेहरा एवं हरिओम अग्रवाल ने बरेली के सभी सनातन धर्मावलंबी श्रद्धालुओं से कार्यक्रम में शामिल होकर माँ भवानी का आशीर्वाद प्राप्त करने का आह्वान किया है।













































































