यूजीसी विनियम 2026 लागू करने की मांग को लेकर वाल्मीकि धर्म समाज ने सौंपा ज्ञापन
बरेली। विश्वविद्यालयों व उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता और समावेशी शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित करने की मांग को लेकर भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज ने यूजीसी विनियम 2026 को लागू कराने की अपील की है। इस संबंध में समाज के पदाधिकारियों ने महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन जिला अधिकारी कार्यालय में सौंपा। ज्ञापन सौंपने वालों में वेद प्रकाश वाल्मीकि, रणवीर सिंह जाटव और दीपक बाल्मीकि प्रमुख रूप से शामिल रहे। पदाधिकारियों ने बताया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा 14 जनवरी को अधिसूचित उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने वाले विनियम 2026 को 15 जनवरी से लागू किया गया था। यह विनियम देशभर के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में निष्पक्ष, समावेशी और सुरक्षित शैक्षणिक वातावरण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
रणवीर सिंह जाटव और दीपक बाल्मीकि ने कहा कि भारतीय संदर्भ में यह विनियम विशेष महत्व रखता है, क्योंकि जाति, लिंग, दिव्यांगता, धर्म और जन्म स्थान के आधार पर होने वाला भेदभाव लंबे समय से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच में बाधा रहा है। भेदभाव की स्पष्ट परिभाषा और मजबूत सहायता प्रणालियों के माध्यम से यह विनियम उन छात्रों को सुरक्षा और भरोसा देता है, जिन्होंने पहले स्वयं को असुरक्षित या अवांछित महसूस किया है।उन्होंने दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि कुछ वर्गों द्वारा इन सुरक्षात्मक उपायों को विशेष वर्ग के विरुद्ध बताकर पूरे देश में विरोध किया जा रहा है, जबकि वंचित वर्गों के लिए संवैधानिक सुरक्षा को अक्सर सामाजिक तनाव का कारण बताकर नजरअंदाज किया जाता है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि माननीय न्यायालय द्वारा यूजीसी विनियम 2026 पर संज्ञान लेते हुए स्थगन आदेश पारित किया गया है। इस संदर्भ में समाज ने भारत सरकार से आग्रह किया है कि बहुसंख्यक वंचित छात्रों के हित में न्यायालय में ठोस पैरवी कर यूजीसी विनियम 2026 को लागू कराने हेतु पुनर्विचार और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
ज्ञापन के दौरान एडवोकेट ऋषिपाल सिंह वेद प्रकाश वाल्मीकि, दीपक वाल्मीकि अमर सिंह एडवोकेट, नेत्रपाल , सुमित ,अंकुर भारती एडवोकेट , विजय सिंह आदि मौजूद रहे।













































































