काग़ज़ों में सजा बजट, भाषणों में विकास, पर किसान-मज़दूर फिर निराश: कांग्रेस
बरेली। केंद्रीय बजट 2026–27 को लेकर किसान सत्याग्रह स्थल पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कांग्रेस जिलाध्यक्ष असफाक सक्लेनी ने कहा कि संसद में प्रस्तुत बजट किसानों, मजदूरों, आदिवासी समाज और ग्रामीण भारत की मूल समस्याओं के समाधान में पूरी तरह विफल रहा है। उन्होंने कहा कि यह बजट काग़ज़ों और भाषणों तक सीमित है, जबकि खेत का किसान और हाथ का मज़दूर आज भी उदास है। महानगर अध्यक्ष दिनेश दद्दा ने कहा कि बढ़ती महंगाई, खाद-बीज-डीज़ल जैसी कृषि लागत में निरंतर वृद्धि, किसानों की घटती आय और आत्महत्याओं जैसी गंभीर स्थिति के बावजूद बजट में किसानों की प्रमुख मांगों को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है।
किसान सत्याग्रह आंदोलन के संयोजक डॉ. हरीश गंगवार ने कहा कि बजट में न तो किसान कर्जमाफी और न ही कर्ज राहत को लेकर कोई स्पष्ट योजना है। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को कानूनी गारंटी देने की मांग पर भी सरकार मौन रही। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि बढ़ाने की उम्मीदों पर भी कोई घोषणा नहीं की गई। अनिश्चितकालीन किसान सत्याग्रह में शामिल उल्फत सिंह ने कहा कि आदिवासी समाज के जल-जंगल-जमीन के अधिकार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका जैसे बुनियादी मुद्दों को बजट में अपेक्षित प्राथमिकता नहीं मिली। प्रवक्ता पंडित राज शर्मा ने कहा कि बजट का फोकस उच्च-मूल्य कृषि, मत्स्य पालन, एआई टूल्स और इंफ्रास्ट्रक्चर तक सीमित रहा, जबकि किसानों की तात्कालिक समस्याएं कम दाम पर फसल बिक्री, कर्ज़ का बोझ और फसल नुकसान ज्यों की त्यों बनी हुई हैं। यह बजट शहरी-कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता देने वाला है।
विपिन पटेल ने सरकार से पुनर्विचार की मांग करते हुए कहा कि किसान, मजदूर, आदिवासी और ग्रामीण भारत को केंद्र में रखकर नीतियां बनाई जाएं तथा एमएसपी की कानूनी गारंटी, कर्ज राहत, आय सुरक्षा और ग्रामीण रोजगार पर ठोस फैसले लिए जाएं।
उल्लेखनीय है कि बरेली किसान सत्याग्रह 17 जनवरी से लगातार जारी है और आंदोलन अपने 16वें दिन में प्रवेश कर चुका है। यह आंदोलन शांतिपूर्ण और गांधीवादी तरीके से किसानों के अधिकारों के लिए जारी है।
बजट पर चर्चा के दौरान राज नारायण, दिनेश कुमार, डॉ. हरीश गंगवार, ज़ाहिद अली, जगदीश सरन, विपिन पटेल, भगवान दास सक्सेना, भारतीय किसान यूनियन (शंकर गुट) के उपाध्यक्ष रमाकांत उपाध्याय, रमेश चंद्र श्रीवास्तव, अरविंद कुमार, कमरुद्धीन सैफी, प्रताप सिंह सहित अनेक किसान नेता, सामाजिक कार्यकर्ता एवं संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।













































































