बरेली। केंद्रीय बजट से देशभर के सोना-चांदी व्यापारियों को बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन सरकार एवं वित्त मंत्री द्वारा इस क्षेत्र के लिए कोई ठोस घोषणा न किए जाने से व्यापारी वर्ग निराश है। व्यापारियों का कहना है कि सोना-चांदी केवल आभूषण नहीं, बल्कि नारी की सुरक्षा, आत्मसम्मान और पारिवारिक भविष्य से गहराई से जुड़ा हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी सोना-चांदी आपातकालीन परिस्थितियों में आर्थिक सहारा होता है और महिला के लिए यह सम्मान व सामाजिक सुरक्षा का प्रमुख साधन माना जाता है। व्यापारियों ने बताया कि बीते एक वर्ष में सोने की कीमतों में लगभग 100 प्रतिशत और चांदी में करीब 300 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम जनता के लिए आभूषण खरीदना मुश्किल हो गया है। व्यापारियों का आरोप है कि सोना-चांदी का व्यापार पूरी तरह कमोडिटी बाजार के हवाले हो गया है। चांदी के भाव में एक ही दिन में एक-एक लाख रुपये तक का उतार-चढ़ाव हो रहा है, जिससे व्यापारी और ग्राहक दोनों असमंजस की स्थिति में हैं। उन्होंने मांग की कि सोने-चांदी के भाव पर MCX के प्रभाव को सीमित किया जाए, ताकि देशभर में एक समान दर लागू हो सके। व्यापारियों का कहना है कि भावों में स्थिरता आने पर ही ग्राहक बाजार की ओर लौटेगा। साथ ही जीएसटी के प्रावधानों को सरल किया जाना चाहिए, जिससे छोटे व्यापारी भी आसानी से जीएसटी के दायरे में आ सकें। हालांकि व्यापारियों ने यह भी माना कि बजट में सरकार के कुछ फैसले सराहनीय हैं, लेकिन सोना-चांदी व्यापार जैसे पारंपरिक और सामाजिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र की अनदेखी से निराशा बढ़ी है। उन्होंने आने वाले समय में सरकार से इस दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की है।