77वें गणतंत्र दिवस की परेड में दिखी भारत की सैन्य ताकत, आत्मनिर्भरता और नारी शक्ति

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देश | नई दिल्ली । आज भारत ने 77वां गणतंत्र दिवस पूरे गौरव, शौर्य और आत्मविश्वास के साथ मनाया। राजधानी दिल्ली के कर्तव्य पथ पर आयोजित मुख्य समारोह में भव्य सैन्य परेड और सांस्कृतिक झांकियों के माध्यम से दुनिया ने भारत की बढ़ती सामरिक शक्ति और आत्मनिर्भर भारत की झलक देखी। इस वर्ष की परेड कई मायनों में ऐतिहासिक और विशेष रही।

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दो विदेशी मुख्य अतिथि, भारत-ईयू संबंधों को मिला बल
इस साल गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार दो विदेशी गणमान्य व्यक्ति मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष सैंटोस डा कोस्टा की मौजूदगी को भारत और यूरोपीय संघ के बीच संभावित व्यापार समझौते से जोड़कर देखा जा रहा है। इसके साथ ही यूरोपीय यूनियन का सैन्य दल भी परेड में शामिल हुआ, जिसमें चार ध्वजवाहक शामिल रहे।

पहली बार तीनों सेनाओं की संयुक्त झांकी
77वें गणतंत्र दिवस परेड की सबसे बड़ी खासियत रही थलसेना, नौसेना और वायुसेना की संयुक्त झांकी। ‘ऑपरेशन सिंदूर – संयुक्तता के माध्यम से विजय’ थीम पर आधारित इस झांकी में थिएटर कमांड की ताकत को प्रदर्शित किया गया। यह दिखाया गया कि कैसे तीनों सेनाएं एकीकृत कमांड के तहत मिलकर दुश्मन को करारा जवाब देने में सक्षम हैं।

बैटर एरे फॉर्मेट और स्वदेशी हथियारों का प्रदर्शन
इस बार हथियारों को वास्तविक युद्ध क्रम में पेश करने वाला बैटर एरे फॉर्मेट पहली बार देखने को मिला। परेड में स्वदेशी ध्रुव हेलीकॉप्टर, रुद्र प्रहार, भीष्म और अर्जुन टैंक, धनुष गन सिस्टम, अमोघ और आकाश मिसाइल प्रणाली ने मेक इन इंडिया की मजबूती को दर्शाया।

नारी शक्ति का सशक्त संदेश
इस साल परेड में नारी शक्ति पर विशेष फोकस रहा। सीआरपीएफ की टुकड़ी का नेतृत्व महिला अधिकारी सिमरन बाला ने किया, जो 140 से अधिक पुरुष जवानों की टुकड़ी का नेतृत्व करने वाली पहली महिला अधिकारी बनीं।

मूक योद्धाओं का ऐतिहासिक मार्च
कर्तव्य पथ पर पहली बार भारतीय सेना के पशु दस्ते ने मार्च किया। इसमें बैक्ट्रियन ऊंट, स्वान और बाज जैसे मूक योद्धा शामिल रहे, जिन्होंने परेड को अलग पहचान दी।

‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पर केंद्रित थीम
गणतंत्र दिवस समारोह का केंद्रीय विषय वंदे मातरम के 150 वर्ष रहा। मंत्रालयों की झांकियों, मंच सजावट और आमंत्रण पत्रों में यही भावना झलकी। इस अवसर पर प्रसिद्ध चित्रकार तेजेंद्र कुमार मित्रा की पेंटिंग्स भी प्रदर्शित की गईं।

10 हजार विशेष अतिथि और हाईटेक सुरक्षा
समारोह में 10 हजार विशेष आमंत्रित अतिथि शामिल हुए, जिनमें इनोवेटर, शोधकर्ता, स्वयं सहायता समूह और सरकारी योजनाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले लोग शामिल थे। सुरक्षा के लिए जवानों को पहली बार एआई से लैस स्मार्ट चश्मों के साथ तैनात किया गया।

नदियों के नाम पर दर्शक दीर्घाएं
पारंपरिक ‘VVIP’ लेबल से हटकर दर्शक दीर्घाओं के नाम भारत की नदियों—गंगा, यमुना, सिंधु, नर्मदा, कृष्णा, कावेरी, ब्रह्मपुत्र, सतलुज, रावी, पेरियार सहित अन्य नदियों के नाम पर रखे गए। इससे समारोह को समरसता और सांस्कृतिक एकता का नया संदेश मिला।

77वें गणतंत्र दिवस की परेड ने न केवल भारत की सैन्य क्षमता को प्रदर्शित किया, बल्कि यह भी दिखाया कि भारत आत्मनिर्भरता, तकनीक, समावेशिता और सांस्कृतिक गौरव के साथ भविष्य की ओर मजबूती से बढ़ रहा है।

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