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Uttar Pradesh

कफ सिरप कांड में आरोपियों को हाईकोर्ट से राहत नहीं, एफआईआर रद्द करने की अर्जी खारिज

December 19, 2025By admin0 comments
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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के चर्चित कोडीनयुक्त कफ सिरप मामले में दर्ज एफआईआर को खारिज करने की मांग वाली अर्जी को नामंजूर कर दिया है। मुख्य आरोपी शुभम अग्रवाल समेत 40 आरोपियों ने गिरफ्तारी पर रोक लगाने और एफआईआर रद्द करने की मांग को लेकर याचिका दाखिल की थी। शुक्रवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी, जिससे आरोपियों की गिरफ्तारी का रास्ता साफ हो गया है।

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कोडीनयुक्त कफ सिरप कांड की जांच के दौरान यूपी एसटीएफ ने लखनऊ के आलमबाग के पास से सहारनपुर निवासी दो अभियुक्त अभिषेक शर्मा और शुभम शर्मा को गिरफ्तार किया था। पूछताछ में 25 हजार रुपये के इनामी शुभम जायसवाल का पूरा नेटवर्क सामने आया। दोनों अभियुक्तों ने बताया कि वे विशाल और विभोर राणा के लिए काम करते थे, जिनका शुभम जायसवाल के साथ व्यापारिक संबंध था। तीनों मिलकर कोडीनयुक्त कफ सिरप की तस्करी करते थे।

जांच में सामने आया कि कफ सिरप की खेप वाराणसी, लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर और आगरा सहित कई शहरों से फर्जी ई-वे बिल बनाकर बंगाल और अन्य राज्यों में भेजी जाती थी। विशाल और विभोर के नेटवर्क के जरिए यह सिरप देश के कई राज्यों तक पहुंचाया जाता था। इसी दौरान शुभम जायसवाल ने अपने पिता भोला जायसवाल के नाम पर रांची में एबॉट कंपनी की सुपर स्टॉकिस्टशिप हासिल कर ली और दोनों से अलग हो गया।

इसके बाद शुभम ने लाइसेंस और दस्तावेजों की आड़ में बड़े पैमाने पर कफ सिरप की सप्लाई को कानूनी शिपमेंट के रूप में दिखाना शुरू कर दिया। सुपर स्टॉकिस्ट बनने के बाद उसकी सप्लाई चेन पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गई। सहारनपुर से गिरफ्तार दोनों अभियुक्तों ने बताया कि सिरप की कई खेप रांची से सीधे यूपी और हरियाणा रूट पर भेजी गई।

ड्रग विभाग की जांच में यह भी सामने आया कि शुभम ने अपनी फर्म शैली ट्रेडर्स के नाम पर हिमाचल प्रदेश की एक कंपनी से कफ सिरप मंगवाया और उसे गाजियाबाद स्थित गोदाम में स्टोर किया। फर्जी फर्मों के दस्तावेज तैयार कर इस सिरप को आगरा, लखनऊ और वाराणसी तक सप्लाई किया जाता था। वाराणसी से सिरप की बड़ी खेप सोनभद्र के रास्ते झारखंड और पश्चिम बंगाल भेजी जाती थी, जहां से इसे बांग्लादेश और नेपाल तक पहुंचाया जाता था।

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