विवादित बयानों से फिर घिरे मंत्री विजय शाह, बयानबाजी का लंबा रहा है इतिहास

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मध्यप्रदेश के जनजातीय कार्य विभाग मंत्री विजय शाह एक बार फिर अपने बयानों को लेकर विवादों में आ गए हैं। रतलाम में मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना को लेकर दिए गए उनके बयान के बाद सियासी हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। बयान के बाद भाजपा प्रदेश संगठन को भी सफाई देनी पड़ी और खुद मंत्री विजय शाह को यू-टर्न लेते हुए सफाई सामने आनी पड़ी।

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विजय शाह भाजपा के सीनियर नेताओं में गिने जाते हैं। वे वर्ष 1990 से लगातार विधानसभा सदस्य हैं और वर्तमान में आठवीं बार विधायक बने हैं। आदिवासी नेता होने के चलते उन्हें बाबूलाल गौर सरकार से लेकर शिवराज सिंह चौहान और मौजूदा मोहन यादव सरकार तक में मंत्री पद की जिम्मेदारी मिलती रही है। उन्होंने 1990 में पहली बार हरसूद विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा था। नवंबर 1962 में मकड़ाई के राजघराने में जन्मे विजय शाह का विवाह देवास जिले की बागली जागीर की भावना कुशवाहा से हुआ है। उनका एक पुत्र दिव्यादित्य है।

हालिया विवाद रतलाम में एक बैठक के दौरान सामने आया, जहां मंत्री विजय शाह ने महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारियों से लाड़ली बहनों की संख्या को लेकर सवाल किया। इस दौरान उन्होंने कथित तौर पर धमकी भरे लहजे में कहा कि सरकार करोड़ों रुपये दे रही है, ऐसे में बहनों को भी सम्मान दिखाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि जो बहनें कार्यक्रमों में नहीं आएंगी, उनकी जांच कराई जा सकती है और भुगतान पेंडिंग किया जा सकता है। बयान सामने आने के बाद विपक्ष ने तीखा हमला बोला और भाजपा संगठन ने भी उनसे जवाब-तलब किया। इसके बाद विजय शाह ने सफाई देते हुए कहा कि उनके बयान को गलत तरीके से पेश किया गया है।

यह पहला मौका नहीं है जब विजय शाह अपने बयानों के कारण चर्चा में आए हों। इससे पहले 12 मई को उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी एक प्रेस वार्ता के दौरान कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी कर दी थी, जिसमें उन्होंने उन्हें आतंकियों की बहन कहा था। बयान पर देशभर में विरोध हुआ तो अगले ही दिन उन्होंने इसे तोड़-मरोड़कर पेश किया गया बयान बताते हुए सफाई दी थी। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को लेकर कैलाश विजयवर्गीय के बयान का समर्थन करने पर भी वे पहले विवादों में घिर चुके हैं।

विजय शाह का नाम उस वक्त भी सुर्खियों में आया था, जब मध्यप्रदेश में फिल्म शेरनी की शूटिंग के दौरान उन्होंने अभिनेत्री विद्या बालन को डिनर का न्योता भेजा था। विद्या बालन द्वारा इंकार किए जाने के बाद फिल्म यूनिट को वन क्षेत्र में शूटिंग की अनुमति न मिलने की बात सामने आई थी, जिसे लेकर भी काफी विवाद हुआ।

अक्तूबर 2023 में खंडवा जिले के हरसूद तहसील में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने दिव्यांगजनों को लेकर अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल किया था। मंच से दिए गए उनके इस बयान का वीडियो वायरल हुआ और उन्हें भारी आलोचना का सामना करना पड़ा। इससे पहले भी वे जंगल में आग जलाकर पार्टी करने की पोस्ट, चुनाव के दौरान विरोधी प्रत्याशियों को धमकाने और आदिवासी छात्रावास में युवतियों से आपत्तिजनक बातचीत जैसे मामलों में घिर चुके हैं।

वर्ष 2013 में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की पत्नी साधना सिंह को लेकर की गई टिप्पणी के चलते उन्हें अपना मंत्री पद भी गंवाना पड़ा था। वहीं, 1998 में एक आंदोलन के दौरान थाना प्रभारी को थप्पड़ मारने के बाद पुलिस द्वारा की गई पिटाई में उनका पैर फ्रैक्चर होने की घटना भी काफी चर्चित रही थी।

लगातार विवादों के बावजूद विजय शाह प्रदेश की राजनीति में प्रभावशाली आदिवासी नेता बने हुए हैं, लेकिन लाडली बहनों को लेकर दिया गया ताजा बयान एक बार फिर उनकी मुश्किलें बढ़ाता नजर आ रहा है। संगठन स्तर पर जवाब देने के बाद भी यह मामला अभी शांत होता नहीं दिख रहा है।

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