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बेटी के निकाह में भाईचारा बना तो फतवा, भोजीपुरा की घटना पर मचा सियासी-सामाजिक घमासान

December 15, 2025By admin0 comments
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बरेली । भोजीपुरा से सामने आए इस मामले ने समाज में गहरी बहस छेड़ दी है। बेटी के निकाह जैसे पवित्र मौके पर जब एक परिवार ने आपसी भाईचारे की मिसाल पेश की, तो उसी पर सवाल खड़े कर दिए गए। इस पूरे घटनाक्रम पर समाजसेवी पंडित सुशील पाठक ने कहा कि यह बेहद दुखद है कि आज भी कट्टर सोच समाज को तोड़ने का काम कर रही है। उन्होंने संकेतों में कहा कि जिन लोगों ने देश की आजादी के लिए साथ मिलकर फांसी का फंदा चूमा, उनकी कुर्बानी को आज भुलाया जा रहा है।देश की आजादी और आज का समाज पंडित सुशील पाठक ने इस मुद्दे पर विस्तार से अपनी बात रखते हुए कहा कि पंडित रामप्रसाद बिस्मिल और अशफाक उल्ला खां ने हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल कायम करते हुए देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। आज उसी देश में अगर एक बेटी के निकाह में हिंदू समाज के लोगों को दावत देने पर फतवा जारी किया जाता है, तो यह बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि ताहिर अली जैसे लोग समाज में भाईचारा बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन कुछ कट्टरपंथी सोच वाले मौलाना ऐसे प्रयासों को कुचलना चाहते हैं। पंडित सुशील पाठक ने शासन-प्रशासन से अपील की कि इस तरह की मानसिकता के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। क्या है पूरा मामला
दरअसल, भोजीपुरा इलाके में रहने वाले मुस्लिम युवक ताहिर अली की बेटी का निकाह तय हुआ था। परिवार ने निकाह की दावत में अपने परिचितों के साथ-साथ हिंदू समाज के लोगों को भी आमंत्रित किया। ताहिर अली का कहना है कि वे वर्षों से आपसी सौहार्द के साथ रहते आए हैं और इसी भावना के तहत उन्होंने दावत दी। जब यह बात निकाह पढ़ाने वाले मौलवी को पता चली तो उन्होंने निकाह पढ़ाने से इनकार कर दिया। आरोप है कि इसके बाद फतवा भी जारी कर दिया गया, जिससे परिवार आहत हो गया।समाजसेवा की लंबी मिसाल पंडित सुशील पाठक ने बताया कि वे अब तक 1125 कन्याओं का विवाह करा चुके हैं। इनमें 10 मुस्लिम धर्म की कन्याओं के निकाह भी शामिल हैं। उनका कहना है कि शादी-विवाह धर्म से ऊपर उठकर मानवता और समाज को जोड़ने का माध्यम होना चाहिए। इस घटना के बाद इलाके में चर्चा तेज है और लोग इसे सामाजिक सौहार्द के खिलाफ मान रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इस संवेदनशील मामले में आगे क्या कदम उठाता है।

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