परमार्थ निकेतन में देवी चित्रलेखा ने परिवार संग की गंगा आरती, मानव अधिकार दिवस पर दिया सनातन संदेश
ऋषिकेश । परमार्थ निकेतन में प्रसिद्ध कथावाचक देवी चित्रलेखा अपने परिवार के साथ पहुंचीं। इस अवसर पर उन्होंने परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती और साध्वी भगवती सरस्वती के साथ सांध्यकालीन गंगा आरती में सहभाग किया। आध्यात्मिक वातावरण में संपन्न हुई गंगा आरती के दौरान श्रद्धा और भक्ति का भाव देखने को मिला।
गंगा आरती के उपरांत स्वामी चिदानंद सरस्वती और साध्वी भगवती सरस्वती ने देवी चित्रलेखा और उनके परिवार का स्वागत करते हुए उन्हें रुद्राक्ष का पौधा भेंट किया। इस अवसर पर स्वामी चिदानंद सरस्वती ने मानव अधिकार दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मानव गरिमा, स्वतंत्रता और समानता कोई आधुनिक अवधारणा नहीं हैं, बल्कि ये सनातन भारत की शाश्वत परंपरा का अभिन्न हिस्सा रही हैं। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों में मानवाधिकारों की अवधारणा युद्धों और संघर्षों के बाद दस्तावेजों के माध्यम से सामने आई, जबकि भारत ने इन मूल्यों को हजारों वर्षों से अपने जीवन, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं में आत्मसात किया है।
स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि भारत की दर्शन परंपरा वसुधैव कुटुंबकम की भावना पर आधारित रही है, जिसमें सभी मानवों के सम्मान और समान अधिकार की बात की गई है। मानव अधिकार दिवस के अवसर पर इन मूल्यों को पुनः स्मरण करना आज के समय की आवश्यकता है।
इस दौरान देवी चित्रलेखा ने मां गंगा की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि मां गंगा केवल एक नदी नहीं हैं, बल्कि वे दिव्यता की सजीव अनुभूति हैं। गंगा के तट पर आकर मन, शरीर और आत्मा को शांति का अनुभव होता है। उन्होंने परमार्थ निकेतन के आध्यात्मिक वातावरण की सराहना करते हुए इसे आत्मिक ऊर्जा का केंद्र बताया।
कार्यक्रम के दौरान परमार्थ निकेतन परिसर में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही और आध्यात्मिक वातावरण में मानवता, करुणा और सनातन मूल्यों का संदेश दिया गया।













































































