सरकार इंडिगो एयरलाइंस द्वारा नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों को लागू करने में कथित लापरवाही की जांच करेगी। आरोप है कि 1 नवंबर से लागू नियमों की तैयारी करने के बजाय एयरलाइन ने हफ्तों तक छूट और ढील मांगने में समय गंवाया, जिससे देशभर में उड़ानों के बड़े पैमाने पर रद्दीकरण और देरी की स्थिति पैदा हुई। मामले की जांच के लिए बनाई गई चार सदस्यीय समिति यह भी देखेगी कि क्या क्रू और पायलटों की ड्यूटी तैनाती नियमों के विपरीत की गई। सूत्रों के अनुसार डीजीसीए की समिति इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स और सीओओ इसिड्रे पोरक्वेरस को तलब कर सकती है और अक्तूबर के अंत तक डीजीसीए के साथ हुई बातचीत की समीक्षा करेगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि क्या नियमों को टालने या कमजोर करने का प्रयास किया गया। जांच में यह बिंदु भी शामिल है कि नए नियमों के तहत जरूरी जेप्पेसन क्रू रोस्टरिंग सॉफ्टवेयर के अपडेट में देरी जानबूझकर की गई या नहीं। साथ ही DGCA की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं कि कोर्ट के निर्देशों के बावजूद इंडिगो के अनुरोधों को कैसे निपटाया गया। संचालन संकट के चलते देरी से रोस्टर जारी किए जाने और यात्रियों को भारी रिफंड देने की स्थिति बनी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियमों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और यह कार्रवाई अन्य एयरलाइनों के लिए एक मिसाल होगी।