वाहनों से जातीय महिमामंडन के चिह्न हटे, स्कूलों में पढ़ाया जाए जातिवाद के खिलाफ पाठ
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को वाहनों और सोशल मीडिया पर जातीय महिमामंडन के चिह्नों पर प्रतिबंध लगाने का निर्देश दिया। साथ ही कहा है कि सरकार स्कूलों में जातिवाद विरोधी पाठ और जागरूकता अभियान चलाए। यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की अदालत ने शराब तस्करी मामले के आरोपी इटावा के प्रवीण छेत्री के खिलाफ लंबित आपराधिक कार्यवाही रद्द करने से इन्कार कर दिया। हालांकि, पुलिस के दस्तावेज में जाति आधारित एंट्री को लेकर कड़ी फटकार लगाई है। इससे पहले कोर्ट ने मार्च में डीजीपी से हलफनामा तलब कर पूछा था कि किस कानून में लिखा है कि पुलिस आरोपी की जाति पूछेगी। इस खबर को अमर उजाला ने छह मार्च के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित भी किया था। इसके बाद डीजीपी ने हलफनामा दाखिल कर कहा कि जाति से लोगों की पहचान करने में मदद मिलती है। इस पर कोर्ट ने उनके तर्कों को सिरे से खारिज कर दिया। कहा, अत्याधुनिक तकनीक के उपलब्ध रहते यह कुतर्क है। इस दौर में पुलिस के पास पहचान के लिए फिंगरप्रिंट, आधार, मोबाइल नंबर और माता-पिता के विवरण जैसे आधुनिक साधन उपलब्ध हैं। कोर्ट ने प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह तत्काल पुलिस फॉर्म से अनुसूचित जाति/जनजाति संबंधित मामलों को छोड़कर अन्य की जाति और धर्म की प्रविष्टियां हटाए। जाति महिमामंडन वाले साइन बोर्ड भी थानों में नजर न आएं। 29 अप्रैल 2023 को प्रवीण और अन्य की इटावा में दो कार की तलाशी के दौरान 300 बोतल अवैध शराब बरामद की गई थी। दोनों वाहन पर फर्जी नंबर प्लेट थे। पुलिस ने दावा किया कि छेत्री शराब तस्करी गिरोह का सरगना था। इस पर उसने सफाई दी थी कि वह पारिवारिक समारोह में गया था और लिफ्ट ले रहा था, उसका शराब से कोई वास्ता नहीं है। छेत्री ने ट्रायल कोर्ट में लंबित आपराधिक कार्यवाही को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पुलिस के दस्तावेजों में आरोपी की जाति का उल्लेख देख डीजीपी से हलफनामा तलब किया था।













































































