गायत्री शक्तिपीठ एवं आध्यात्मिक चेतना केंद्र पर सामूहिक श्राद्ध-तर्पण कार्यक्रम हुआ
बदायूं। गायत्री शक्तिपीठ एवं आध्यात्मिक चेतना केंद्र में रविवार को आयोजित सामूहिक श्राद्ध-तर्पण कार्यक्रम में श्रद्धा और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। प्रातःकाल से ही गायत्री शक्तिपीठ पर श्रद्धालुओं का जमावड़ा लग गया। गायत्री परिजनों द्वारा वेदमंत्रोच्चारण कर पूजन कराया गया। श्रद्धालुओं ने अपने पितरों का स्मरण कर तर्पण व पिंडदान किया। पूरे वातावरण में भक्ति, श्रद्धा और पवित्रता की छटा बिखरी रही।श्राद्ध संस्कार में पवित्रता की प्रतीक गऊ माता, कर्त्तव्यनिष्ठा के प्रतीक श्वान, मलीनता निवारक कौवों, देवत्व संवर्धक शक्तियों को भोजन और श्रमनिष्ठा की प्रतीक चींटियों के लिए आटा व गुड़ रखा गया।जीवों को अन्नदान करने से श्राद्ध का पुण्य और फल कई गुना बढ़ जाता है। परिव्राजक सचिन देव ने कहा कि श्राद्ध-तर्पण केवल कर्मकांड भर नहीं है, बल्कि यह पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का सबसे बड़ा माध्यम है। उन्होंने कहा कि जब हम श्रद्धा से पिंडदान और तर्पण करते हैं, तो हमारे पितरों की आत्मा तृप्त होती है और वे अपने वंशजों को सदैव सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। श्राद्ध संस्कार आत्मकल्याण और पारिवारिक सौहार्द की भावना को प्रबल करता है।आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं ने वेदमंत्रोच्चारण के बीच अपने-अपने पितरों के नाम से तर्पण किया। 30 से अधिक परिवारों ने एक साथ सामूहिक रूप से विधि-विधान से पिंडदान किया। शक्तिपीठ पर सत्संग, भजन-कीर्तन हुए। सुखपाल शर्मा ने कहा कि धार्मिक अनुष्ठान हमारी परंपराओं को जीवित रखते हैं बल्कि नई पीढ़ी को भी अपनी संस्कृति और संस्कारों से जोड़ते हैं। पूरे परिसर में पूरे दिन धार्मिक वातावरण बना रहा। लोग श्रद्धा और भावुकता के साथ अपने पूर्वजों का स्मरण करते रहे। इस मौके पर योगेश पाल, यशवीर सिंह, पंकज शर्मा, रेखा शर्मा, गोपाल किशोर, अयोध्या प्रसाद शर्मा, नाथू लाल शर्मा, दया शर्मा, जगदंबा सहाय, महेश, सत्येंद्र पाल, श्याम निवास राजपूत, कैलाश शर्मा, कल्पना शर्मा, अनोखेलाल शर्मा, माया सक्सेना, रजत कुमार सैनी, जलधारा देवी, राकेश कुमार सक्सेना, दिनेश चंद्र गुप्ता, सुमित कुमार, राधा देवी आदि मौजूद रहीं।













































































