भाजपा नेता डॉ. शैलेश पाठक ने बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत शिविर का किया शुभारंभ

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दातागंज। भारी बारिश और बाढ़ की त्रासदी से जूझ रहे हजारों लोगों के लिए भाजपा नेता डॉ. शैलेश पाठक एक बार फिर राहत की किरण बनकर सामने आए हैं। उन्होंने दातागंज विधानसभा क्षेत्र में बाढ़ पीड़ितों के लिए राहत शिविर की शुरुआत की है, जहां प्रतिदिन जरूरतमंदों को निःशुल्क भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। लोगों की सेवा को सर्वोपरि मानने वाले भाजपा नेता डॉ. शैलेश पाठक ने पहले भी अपने निजी संसाधनों से बाढ़ प्रभावित परिवारों को करीब 15 दिन का राशन वितरित किया था। लेकिन जब उन्हें यह ज्ञात हुआ कि भारी बारिश की वजह से पीड़ित परिवार कच्चा राशन होने के बावजूद चूल्हा नहीं जला पा रहे हैं, तो उन्होंने तुरंत राहत शिविर के माध्यम से पका हुआ भोजन उपलब्ध कराने की पहल की। उन्होंने बताया कि जब तक बारिश का कहर थमेगा नहीं और हालात सामान्य नहीं हो जाते, तब तक यह शिविर प्रतिदिन खुलेगा और हजारों लोगों को भोजन के साथ-साथ आवश्यक सहयोग प्रदान करेगा।

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भोजन ही नहीं, चिकित्सा व अन्य सहायता भी राहत शिविर केवल भोजन वितरण तक ही सीमित नहीं है। यहां चिकित्सा सहायता, प्राथमिक इलाज और आवश्यक समान भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। शिविर में मौजूद स्वयंसेवक लगातार यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि हर जरूरतमंद तक समय पर सहायता पहुंचे। डॉ. पाठक ने स्वयं शिविर का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की और कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए कि किसी भी बाढ़ पीड़ित को असुविधा न हो। उन्होंने यह भी कहा कि पीड़ित परिवार किसी भी प्रकार की समस्या लेकर शिविर से संपर्क कर सकते हैं।

पहले भी कर चुके हैं राहत कार्य

यह पहली बार नहीं है जब डॉ. पाठक ने आपदा की घड़ी में लोगों की मदद की हो। कोरोनाकाल के दौरान उन्होंने अपने निजी संसाधनों से हजारों परिवारों तक भोजन और दवाइयां पहुंचाई थीं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में उन्होंने पहले ही राशन किट वितरण कर लोगों के घरों का चूल्हा जलाया। अब जब कच्चा राशन उपयोग में नहीं आ पा रहा है तो उन्होंने पके भोजन का शिविर लगाकर एक बार फिर जनसेवा की मिसाल कायम की है। बीते कई दिनों से हो रही भारी बारिश ने दातागंज सहित आसपास के क्षेत्रों में जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। खेत और फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। पीड़ित परिवारों के सामने भोजन और आश्रय की समस्या खड़ी हो गई है। ऐसे हालात में राहत शिविर उन परिवारों के लिए बड़ी सहारा साबित हो रहा है, जिन्हें कई दिनों से भोजन तक मयस्सर नहीं हो पा रहा था। लोगों में उत्साह और राहत की लहर शिविर की शुरुआत होते ही बड़ी संख्या में बाढ़ पीड़ित वहां पहुंचे। महिलाओं और बच्चों ने भोजन प्राप्त कर राहत की सांस ली। बुजुर्गों ने कहा कि “अब तक हमें खाने के लाले पड़ रहे थे, लेकिन डॉ. पाठक ने हमारी चिंता की और समय पर मदद पहुंचाई।” युवाओं ने शिविर की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए इसे जनता के लिए संजीवनी करार दिया। लोगों का कहना है कि डॉ. पाठक लगातार जनता से जुड़े रहते हैं और हमेशा हर समस्या में उनके साथ खड़े मिलते हैं। “जनसेवा ही मेरा धर्म” – डॉ. शैलेश पाठक शिविर का शुभारंभ करते हुए डॉ. शैलेश पाठक ने कहा –> “बाढ़ और बारिश की मार झेल रहे लोगों के लिए यह समय कठिनाई का है। मेरा कर्तव्य है कि मैं जनता के साथ खड़ा रहूं। जब तक हालात सामान्य नहीं हो जाते, यह शिविर प्रतिदिन खुलेगा और पीड़ित परिवारों को भोजन उपलब्ध कराएगा। जनसेवा ही मेरा धर्म है और मैं हर स्थिति में जनता के साथ खड़ा रहूंगा।”

उन्होंने यह भी बताया कि अगर किसी परिवार को स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो शिविर में डॉक्टर और दवाइयों की भी व्यवस्था की गई है।

स्वयंसेवक भी जुटे सेवा कार्य में

डॉ. पाठक की अपील पर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और स्वयंसेवक राहत शिविर में सहयोग कर रहे हैं।
कोई भोजन वितरण में लगा है।
कोई चिकित्सा सुविधा संभाल रहा है।
तो कोई बाढ़ प्रभावित परिवारों की सूची बना रहा है, ताकि हर जरूरतमंद तक सहायता पहुंचे।

शिविर का माहौल सेवा भावना से सराबोर नजर आ रहा है।

लगातार सुर्खियों में शैलेश पाठक

डॉ. शैलेश पाठक की पहचान केवल एक राजनेता की नहीं, बल्कि सामाजिक कार्यकर्ता की भी है।

समय-समय पर उनकी जनसेवा की पहलें सुर्खियों में आती रही हैं।

चाहे बाढ़ हो या कोरोना महामारी, वे लगातार मदद करते रहे हैं।

इसी वजह से उन्हें जनता का व्यापक समर्थन और स्नेह मिलता है।

दातागंज और आसपास के इलाकों में जब बाढ़ पीड़ितों का जीवन संकट में फंसा हुआ है, ऐसे समय में भाजपा नेता डॉ. शैलेश पाठक का यह राहत शिविर उम्मीद की नई किरण लेकर आया है।
निःशुल्क भोजन, चिकित्सा और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराकर उन्होंने साबित कर दिया है कि राजनीति से ऊपर भी एक मानवीय संवेदना होती है।
बारिश और बाढ़ से जूझ रहे हजारों लोगों के लिए यह शिविर न केवल भोजन की थाली है, बल्कि उनके जीवन में विश्वास और उम्मीद का संचार भी कर रहा है।

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