बरेली की स्वास्थ्य सेवाएं वेंटिलेटर पर

बरेली। जुलाई माह की स्वास्थ्य डैशबोर्ड रिपोर्ट ने बरेली जिले की हालत पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है। प्रदेश के 75 जिलों में बरेली का सबसे नीचे स्थान केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह संकेत है कि प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की नाकामी अब लोगों की जान पर भारी पड़ रही है। संस्थागत प्रसव और टीकाकरण में गिरावट स्वास्थ्य रिपोर्ट में साफ दिखा कि नवाबगंज, भदपुरा, भोजीपुरा, मझगवां और बहेड़ी ब्लॉक सबसे ज्यादा पिछड़े हुए हैं। यहां संस्थागत प्रसव का स्तर बेहद खराब है और बच्चों के टीकाकरण की गति संतोषजनक नहीं। विशेषज्ञ मानते हैं कि जब ग्रामीण इलाकों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ही अपेक्षित सेवाएं न दें तो स्थिति बिगड़ना तय है। आशा कार्यकर्ताओं का असंतोष जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली आशा कार्यकर्ताओं को भुगतान में लगातार देरी हो रही है। योजनाओं का लाभार्थियों तक न पहुंच पाना सीधे तौर पर लापरवाही की ओर इशारा करता है। आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब उनके प्रोत्साहन और मेहनताने का भुगतान समय पर नहीं होगा तो वे पूरी तरह काम कैसे कर पाएंगी? सीएमओ की चेतावनी : कितनी असरदार? मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विश्राम सिंह ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अब किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल चेतावनी देने से हालात सुधर जाएंगे? जिला प्रशासन ने इससे पहले भी कई बार सुधार के निर्देश दिए, लेकिन जमीन पर बदलाव दिखाई नहीं दिया। इस बार भी लोग आशंकित हैं कि कहीं कार्रवाई महज कागजों तक सीमित न रह जाए। उपलब्धियां भी छुपा न सकीं कमियां जिले ने टीबी नियंत्रण और प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) में अव्वल स्थान हासिल किया है। लेकिन इन उपलब्धियों के बावजूद बरेली की समग्र रैंकिंग सबसे नीचे पहुंच गई। यानी, थोड़ी-सी सफलता जिले की समग्र नाकामी को ढकने में नाकाम रही। जनता की सेहत पर खतरा सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब बरेली में मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल मौजूद हैं, तब भी बुनियादी सेवाएं क्यों ठप हैं? क्या ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों में संसाधनों की कमी प्रशासन की अनदेखी का नतीजा है? आशा कार्यकर्ताओं को समय पर भुगतान क्यों नहीं मिल पा रहा? क्या योजनाओं का लाभ सिर्फ आंकड़ों में ही सीमित है? इन सवालों के जवाब प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को ही देने होंगे। नतीजा : सुधारो या फिर भुगतो बरेली की स्वास्थ्य सेवाओं पर आई यह रिपोर्ट महज़ चेतावनी नहीं, बल्कि एक गंभीर अलार्म है। यदि हालात अब भी नहीं सुधरे तो आने वाले दिनों में जिले को न केवल जनता के गुस्से का सामना करना पड़ेगा, बल्कि मातृ मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर और बीमारियों का खतरा भी और गहरा जाएगा।