न बड़ा ट्विस्ट, न हाई-वोल्टेज ड्रामा; फिर भी अहान-अनीत की जोड़ी ने जीता दर्शकों का दिल

Screenshot 2025-08-25 192816
WhatsAppImage2024-05-04at205835
previous arrow
next arrow

फिल्म रिव्यू :कुछ फिल्में आपको हंसाती हैं, कुछ रुलाती हैं…फिर कुछ ऐसी होती हैं जो लंबे वक्त तक दिल में बस जाती हैं। ‘सैयारा’ उन्हीं फिल्मों में से एक है। फिल्ममेकर मोहित सूरी, जो पहले भी ‘आशिकी 2’, ‘वो लम्हे’, ‘जहर’ और ‘एक विलेन’ जैसी इमोशनल लव स्टोरीज दे चुके हैं, इस बार यशराज फिल्म्स के साथ मिलकर एक बार फिर टूटे दिलों की आवाज लेकर आए हैं। सैयारा’ एक इमोशनल लव स्टोरी है, जिसमें दो टूटे हुए दिल एक-दूसरे की आवाज बनते हैं। वाणी बत्रा (अनीत पड्डा) को कविताएं लिखना बेहद पसंद है, लेकिन वह ये बात दुनिया से छुपाकर रखती है। शादी के दिन उसका मंगेतर उसे छोड़ जाता है, जिससे वह अंदर से टूट जाती है और लिखना भी छोड़ देती है। छह महीने बाद वाणी को पत्रकार की नौकरी मिलती है, जहां उसकी मुलाकात होती है कृष कपूर (आहान पांडे) से, सिंगर बनने की कोशिश में लगा गुस्सैल और अकेला लड़का। जब कृष वाणी की एक पुरानी कविता पढ़ता है, तो वह उस पर गीत लिखने के लिए कहता है। काम के दौरान दोनों एक-दूसरे के करीब आते हैं और उनके बीच एक अनकहा रिश्ता बनने लगता है। मगर प्यार की इस राह में कई उलझनें हैं। क्या इनका रिश्ता इन सभी मुश्किलों से गुजर पाएगा? यही फिल्म का असली सवाल है। अभिनय आहान पांडे ने कृष के किरदार को अच्छे से निभाया है। शुरुआत में थोड़े रुखे लगते हैं, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, उनकी आंखों और हावभाव से इमोशंस झलकने लगते हैं। उनका किरदार बाहर से सख्त लेकिन अंदर से बेहद भावुक है। अनीत पड्डा ने वाणी के किरदार को बहुत ही सच्चाई और मासूमियत से निभाया है। वाणी की जिंदगी में एक ऐसा मोड़ आता है जो ऑडियंस को झकझोर देता है। स्क्रीन पर उनका डर, स्ट्रगल और फिर भी मुस्कराते रहना, ये सब बहुत असरदार लगता है। उनकी मासूमियत और इमोशंस स्क्रीन पर पूरी तरह महसूस होते हैं। इस बात में कोई दोराय नहीं कि आहान और अनीत की जोड़ी में एक ताजगी और ईमानदारी है, जो आजकल के कई नए कलाकारों में नहीं दिखती। स्क्रीनप्ले कुछ सीन जरूरत से ज़्यादा वक्त लेते हैं और थोड़ा प्रेडिक्टेबल भी हैं। लेकिन फिल्म का इमोशनल ग्रैविटी उसे बैलेंस कर देता है। दूसरे हाफ में वाणी और कृष के बीच के इमोशनल मोमेंट्स दिल को छू जाते हैं…बिना कुछ कहे भी बहुत कुछ कह जाते हैं।निर्देशन मोहित सूरी, जिन्होंने ‘आशिकी 2’, ‘एक विलेन’, ‘वो लम्हे’ जैसी भावनात्मक फिल्में बनाई हैं, उन्होंने ‘सैयारा’ में भी वही दर्द और गहराई दिखाने की कोशिश की है। कहानी के कुछ हिस्से थोड़े लंबे जरूर लगते हैं, लेकिन उनका इमोशनल ट्रीटमेंट ऑडियंस को बांधे रखता है। मोहित ने पहली बार यशराज फिल्म्स के साथ काम करते हुए अपने अंदाज में एक नई जोड़ी को पेश किया है और उन्होंने इसे एक यादगार अनुभव बना दिया है।संगीत
फिल्म का म्यूजिक इसकी आत्मा है। टाइटल ट्रैक ‘सैयारा’ दिल छू जाता है और खत्म होने के बाद भी जहन में रहता है। बाकी गाने उतना प्रभाव नहीं छोड़ते, लेकिन बैकग्राउंड स्कोर हर इमोशनल सीन को और गहराई देता है। मिथून, फहीम अब्दुल्ला, विशाल मिश्रा, सचेत-परंपरा और तनिष्क बागची की टीम ने कहानी के इमोशंस को संगीत से खूबसूरती से जोड़ा है।कमजोर पहलू फिल्म की शुरुआत थोड़ी धीमी लगती है, जिससे ऑडियंस को कहानी में घुलने-मिलने में थोड़ा समय लगता है। कुछ सीन जरूरत से ज्यादा लंबे हैं और कुछ डायलॉग्स बार-बार जैसे लगते हैं। कई जगहों पर कहानी पहले से समझ में आने लगती है, खासकर अगर आपने पहले भी रोमांटिक फिल्में देखी हैं। फिल्म में कोई बड़ा ट्विस्ट या चौंकाने वाला मोड़ नहीं है, जिससे यह थोड़ी सीधी-सादी लगती है। क्लाइमेक्स और कुछ इमोशनल सीन में इमोशंस ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए हैं, जो कुछ ऑडियंस को थोड़ी बोरिंग लग सकती हैं। फाइनल वर्डिक्ट: देखें या नहीं? सैयारा’ एक सीधी-सादी लेकिन असरदार प्रेम कहानी है, जो ऑडियंस के दिल में उतर जाती है। ये फिल्म सिर्फ एक लव स्टोरी नहीं, बल्कि रिश्तों की गहराई और सच्चे प्यार की ताकत को दिखाती है। अगर आप इमोशनल, सच्ची एक्टिंग और खूबसूरत म्यूजिक वाली फिल्में पसंद करते हैं, तो ‘सैयारा’ जरूर देखें। ये फिल्म आपको इमोशंस की उस दुनिया में ले जाएगी, जहां हर सीन कुछ महसूस कराता है।

ReferralCodeLLVR11
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2024-06-13at1242061
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2025-06-11at40003PM
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2024-10-20at41111PM1
previous arrow
next arrow
WhatsAppImage2023-04-17at53854PM4
previous arrow
next arrow
Home
Live TV
VIDEO NEWS
Verified by MonsterInsights