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Uttar Pradesh

स्किन के मरीजों के इलाज में साइकोलॉजी की भूमिका महत्वपूर्ण

August 23, 2025By admin0 comments
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बरेली। तनाव, चिंता और डिप्रेशन शरीर में हार्मोनल बदलाव लाते हैं। इससे मुंहासे, सोरायसिस, एक्जिमा के साथ ही बाल झड़ने जैसी स्किन संबंधी समस्याएं होती हैं। इसी तरह त्वचा संबंधी समस्याएं भी सौंदर्य को प्रभावित कर व्यक्ति के आत्मविश्वास में कमी लाकर डिप्रेशन की स्थिति में लाती हैं। दोनों स्थिति में दवाइयों के साथ काउंसलिंग की जरूरत होती है। ऐसी स्थिति में मरीज का उपचार साइकाइट्री और डर्मेटोलॉजी दोनों विभागों के विशेषज्ञ संयुक्त रूप से करते हैं। दोनों विभागों को संयुक्त रूप से साइकोडर्मेटोलाजी कहा जाता है। यह बात श्रीराम मूर्ति स्मारक (एसआरएमएस) मेडिकल कॉलेज में साइकोडर्मेटोलाजी एसोसिएशन ऑफ इंडिया (पीडीएआई) के प्रेसिडेंट डा.कौशिक लाहिरी ने कही। श्रीराम मूर्ति स्मारक (एसआरएमएस) मेडिकल कॉलेज में साइकाइट्री (मनोरोग विभाग) और डर्मेटोलॉजी (त्वचारोग विभाग) की ओर से शनिवार को एक दिवसीय सीएमई साइको डर्मेटोलॉजी संगम 2025 का आयोजन हुआ। साइकोडर्मेटोलाजी एसोसिएशन ऑफ इंडिया (पीडीएआई) और रुहेलखंड डर्मेटोलॉजिकल सोसायटी बरेली के सहयोग से आयोजित इस सीएमई में विभिन्न राज्यों के त्वचारोग एवं मानसिक रोग विशेषज्ञों ने हिस्सा लेकर विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिया। दीप प्रज्वलन, सरस्वती वंदना और संस्थान गीत के साथ आरंभ सीएमई के उद्घाटन सत्र में मुख्य अतिथि कोलकाता से आए साइकोडर्मेटोलाजी एसोसिएशन आफ इंडिया (पीडीएआई) के प्रेसिडेंट डा.कौशिक लाहिरी ने एक दूसरे के मरीजों के उपचार में साइकाइट्री और डर्मेटोलॉजी के विशेषज्ञों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि त्वचा संबंधी परेशानियां मानसिक स्थिति को प्रभावित करती हैं और प्रभावित मानसिक स्थिति त्वचा रोगों को जन्म देती हैं। ऐसे में मरीजों का उपचार किसी एक विभाग से न होकर दोनों विभागों के संयुक्त रूप से किया जाता है। इसलिए दोनों विभागों को संयुक्त रूप से साइकोडर्मेटोलाजी नाम दिया गया है। इसी का नतीजा साइको डर्मेटोलॉजी संगम 2025 का आयोजन है। एसआरएमएस ट्रस्ट के संस्थापक व चेयरमैन देव मूर्ति ने साइको डर्मेटोलॉजी संगम को साइकाइट्री और डर्मेटोलॉजी विभागों का संगम बताया। उन्होंने कहा कि गंगा, यमुना और सरस्वती के पवित्र संगम की तरह ही आज साइको डर्मेटोलॉजी संगम में भी विद्यार्थी डुबकी लगा कर ज्ञान का स्नान कर रहे हैं। इससे निसंदेह मरीजों को भी फायदा मिलेगा। साइकाइट्री और डर्मेटोलॉजी के बीच गहरा संबंध है। क्योंकि त्वचा संबंधी समस्याएं सुंदरता पर दाग लगाती हैं और यह दाग चिंता का विषय बन कर डिप्रेशन पैदा करता है। ऐसे में साइकाइट्री की जरूरत पड़ती है। दोनों विभागों के संयुक्त उपचार से निसंदेह मरीज को अधिक फायदा होगा। इससे पहले उद्घाटन सत्र के आरंभ में इंदू परडल ने सर्वे भवंतु सुखिनः से सभी को निरोग रखने की कामना की। ऑर्गनाइजिंग चेयरपर्सन डा.पीके परडल ने सीएमई में सभी का स्वागत किया और आयोजन के बारे में जानकारी देने के साथ ही दोनों विभागों की संयुक्त चुनौतियों को भी बताया। कॉलेज के प्रिंसिपल एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) डा.एमएस बुटोला ने कॉलेज की उपलब्धियों को साझा किया। उन्होंने कहा कि सीएमई और वर्कशॉप से विद्यार्थियों की जानकारी में इजाफा होता है, इसलिए एसआरएमएस मेडिकल कॉलेज में सीएमई और वर्कशॉप पर विशेष ध्यान दिया जाता है। इस वर्ष यहां अब तक 27 सीएमई और वर्कशाप का आयोजन हो चुका है। उद्घाटन सत्र के समापन पर सीएमई के ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डा.मधुरकांत रस्तोगी ने धन्यवाद प्रस्ताव रखा और सभी का आभार जताया। उद्घाटन सत्र का संचालन डा.रूपाली रोहतगी ने किया। इस अवसर पर ट्रस्ट एडवाइजर सुभाष मेहरा, मेडिकल सुपरिटेंडेंट डा.आरपी सिंह, डीन पीजी डा.रोहित शर्मा, डीन यूजी डा.बिंदु गर्ग, डा.वीके चावला, डा.सुधांशु मोहन शुक्ला, सीएमई के ऑर्गनाइजिंग चेयरपर्सन डा.प्रतीक गहलोत, को ऑर्गनाइजिंग सेक्रेटरी डा.दीपक चरन, सभी विभागाध्यक्ष, पीजी विद्यार्थी मौजूद रहे।

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