संघ की चिंतन बैठक में राम मंदिर की प्रगति की समीक्षा पर भी हुआ मंथन

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अयोध्या राममंदिर के नीव भराई के कार्य मे भी हो रही प्रगति — निर्भय सक्सेना —

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अयोध्या में भगवान राम मंदिर की जमीन खरीद में उठी उंगली के बाद
बरेली। अब जहाँ इस मुद्दे पर संघ की और से भी समीक्षा में पारदर्शिता पर जोर दिया गया है। मंदिर निर्माण कार्य मे अब तक नीव की 14 लेयर का कार्य पूरा होने की बात कही जा रही है। मिर्जापुर से भी बलुआ पत्थर की आवक प्रारम्भ हो गई है। इसके साथ ही मंदिर के आस पास 100 मीटर तक निर्माण पर प्रतिबंध लगाने की भी चर्चा है । चित्रकूट में राष्ट्रीय स्वयम सेवक संघ की चिंतन बैठक में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ शेत्र न्यास के महामंत्री चंपत राय ने अब तक मंदिर निर्माण की प्रगति से अवगत कराकर ट्रस्ट पर जमीन खरीद पर उठ रही उंगली पर भी बताया कि सब खरीद पारदर्शी है। उधर अयोध्या में भगवान राम मंदिर के आसपास अब बहुमंजिला इमारतों के बनाने पर रोक लगाने की चर्चा भी है। इसके साथ ही भगवान श्री राम मंदिर की सीमा से 100 मीटर की दूरी तक किसी भी तरह का निर्माण भी नहीं होगा। साथ ही राम मंदिर से 300 मीटर की दूरी पर निर्माण की इजाजत के लिए भी अब जिला प्रशासन से अनुमति लेनी होगी। लार्सन कंपनी मिर्जापुर से आ रहे पत्थरो को अपने हिसाब से देख रही है।


श्री राम मंदिर का निर्माण भव्य तरीके से शुरु हो चुका है। राम मंदिर के क्षेत्र का विस्तारीकरण भी किया जा रहा है जिसके लिए ट्रस्ट ने आसपास की जमीनों, मकानों को खरीद भी की थी। इस संबंध में 100 मीटर पर रोक बाली इस योजना को अमल में लाने के लिए अयोध्या विकास प्राधिकरण ने कमेटी का गठन किया। साथ ही बोर्ड की बैठक में इस पर प्रस्ताव भी पारित हुआ है। प्रस्ताव को अब शासन से मंजूरी मिलने के बाद राम जन्मभूमि क्षेत्र में यह निषेधाज्ञा लागू होगी। निर्माणाधीन श्री रामजन्म भूमि मंदिर के अंदर सुरक्षा की दृष्टि से 5 एकड़ के दक्षिण शैली में निर्माण होने वाले परकोटा को चौकोर करने की दिशा में श्री राम जन्म भूमि तीर्थ छेत्र न्यास आस पास के मंदिरों का भी बैनामा करने में काफी हद तक सफल हो गया है। श्री राम मंदिर ट्रस्ट ने मंदिर के विस्तार का लक्ष्य 108 एकड़ भूमि का रखा था। जिसमे कथित आरोप के बाद भी प्रगति भी हुई है। स्मरण रहे राम मंदिर के लिए जुटाई गई संग्रह निधि से प्राप्त आंकड़ा भी 54.57 करोड़ रुपए को पार कर गया है। पिछले दिनों निर्माणाधीन मंदिर के गर्भगृह में वास्तु से संबंधित पूजा भी हुई थी। इन दिनों मंदिर की नींव भरी जा रही है। इस पूजा प्रक्रिया में संघ के प्रचारक भैया जी जोशी, श्री रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के महासचिव चंपतराय आदि ने
मई माह में विद्वान आचार्यों ने नवग्रह के साथ सभी दिशाओं और कोणों की प्रतिनिधि शिलाओं का पूजन कराकर उन्हें प्रतिष्ठित कराया था। पूजन के बाद वैदिक विधान के अनुरूप पूर्व दिशा में नंदा, दक्षिण में भद्रा, पश्चिम में जया तथा उत्तर में पूर्णा एवं आग्नेय कोण में अजिता, नैऋत्य कोण में अपराजिता, वायव्य कोण में शुक्ला तथा ईशानकोण में शोभागिनी एवं मध्य यानी गर्भगृह के भूगर्भ में कूर्म नाम की शिला को रखा जाना बताया गया।


जब 5 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर के लिए जिस शिला का पूजन किया था गर्भगृह की भूमि पर वही शिला स्थापित की गई ऐसी जानकारी प्राप्त हुई। पत्थर की यह सभी शिलाएं एक बड़े शिलाखंड पर दिशाओं और कोणों की पहचान तथा प्रतीक के अनुरूप आकार में उत्कीर्ण की गई थीं, उनका पूजन कोणों अथवा दिशाओं के देवता के रूप में विशिष्ट आह्वान के साथ इस पूजन में हुआ ।
अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर की नीव रखने के लिए 400 फीट लंबी और 300 फीट चौड़ी 44 लेयर बननी हैं जिसमें अभी तक14 लेयर 1 फीट की ही पूरी हो सकी हैं।
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के अनुसार 12 इंच की लेयर पड़ती है। एक फीट की फिर उस पर रोलर चला कर उसको 10 इंच तक दबाया भी जाता है।
स्मरण रहे अयोध्या में निर्माणाधीन राम मंदिर के परिसर में कोविड-19 नियम का पालन करते हुए रामलला के टेन्ट के बाहर लगभग 500 साल बाद इस बार ‘रामलला’ ने पहला जन्मोत्सव भी परिसर में सादगी से मनाया था । इससे पूर्व सफेद खादी के वस्त्र धारण करके पीले गुलाल से होली भी मनाई थी। ट्रस्ट परिसर में रामलला के दर्शन को आने वाले भक्तों के पांव गर्मी में पथरीले राह में तपे नही इसके बचाव को कॉरपेट की पट्टिका भी बिछाने की दिशा में कार्य कर रहा है। श्री राम मंदिर तीर्थ शेत्र न्यास के लोगो का इस बात पर भी मंथन हो रहा है कि अब लॉक डाउन के बाद जो रामभक्त मंदिर के दर्शन को आएं वह यहां हो रहे निर्माण कार्य की प्रगति भी एक निर्धारित स्थान से देख सकें। आने वाले रामभक्त जब अपने प्रदेश में जाएं तो मंदिर के निर्माण कार्य की जानकारी भी और अधिक लोगो को दे सकें। सूत्रों ने बताया। हाल में मंदिर की खुदाई में जो भी खंडित हुई मूर्तियां मिली है उन्हें भी संग्रहालय में रखा जायेगा। राम मंदिर में वह पत्थर भी आ गया है जिस पर सीता जी श्रीलंका में बैठी थीं । वहां का वह पत्थर भी श्रीलंका के राजदूत ने भारत को भेंट भी कर दिया है जो अब राम मंदिर में ही लगेगा। जब 5 अगस्त 2020 को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर का भूमि पूजन किया था । तब ट्रस्ट के जिम्मेदार लोगों ने साढ़े 3 साल में मंदिर बनने का दावा किया था। यही नहीं राजस्थान के भरतपुर के पहाड़पुर से आने वाले गुलाबी पत्थर पर राजस्थान सरकार ने खनन पर रोक लगा दी। तकनीकी विशेषज्ञ कमेटी चरणबद्ध सारे विघ्न पार भी करती गई। अब जुलाई 2021में मंदिर नींव भराई कार्य हो रहा है ।
श्री राम मंदिर तीर्थ क्षेत्र न्यास के महामंत्री चंपत राय ने राममंदिर निर्माण पर कहा कि लॉकडाउन में भी सभी विघ्न भी धीरे धीरे खत्म हो रहे हैं । राम मंदिर ट्रस्ट के पास अब रुपए की भी फिलहाल कोई कमी नही है। निधि समर्पण के 44 दिवसीय अभियान में 54. 57 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि भी ट्रस्ट के खाते में आ चुकी है । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने 5 अगस्त 2020 को जब मंदिर का भूमि पूजन किया था तब बताया गया था कि मंदिर की 70 एकड़ भूमि में से लगभग 5 एकड़ भूमि पर ही 8 कोण तथा 5 गुम्बद वाला राम मंदिर 39 माह में पूरा होना था। इस दिशा में लॉक डाउन के चलते कार्य में भी अब विलंब होना तय माना जा है । 5 गुम्बद वाले 260 फुट लंबे, 235 फुट चोड़े, 161 फुट ऊंचे राम मंदिर की अनुमानित लागत 1500 करोड़ रुपए तब आंकी गई थी। अब मंदिर की लागत काफी बढ़ जाने की बात भी कही जा रही है। स्मरण रहे देश के सुप्रीम कोर्ट में 40 दिन की मैराथन बहस के बाद 9 नवम्बर 2019 को सुप्रीम कोर्ट से 5 जजों की पीठ से राममंदिर के पक्ष में फैसला आया था। अयोध्या में 13 नवम्बर 2020 में फिल्मी कलाकारों का रामलीला मंचन एवम 5.50 लाख दीप प्रज्वलित कर चौथा दीपोत्सव भी भव्यता से मनाया गया था। दीपावली पर देश के लोगो ने राममन्दिर के प्लेटफार्म पर वर्चुअल दीप भी प्रज्वलित कर रिकार्ड बनाया था। अयोध्या के रेलवे जंक्शन पर भी मंदिर की तर्ज पर 104 करोड़ की लागत से नई रूपसज्जा देने, कई रेल रूट को जोड़ने पर भी काम चल रहा है। जिससे रेल के राम सर्किट से प्रयागराज, मथुरा, बनारस भी जुड़ सकेंगे। अयोध्या धाम का बस का नया टर्मिनल भी बन रहा है। आने वाले तीर्थ यात्रियों के लिए मंदिर के पास ही निःशुल्क लॉकर, मार्ग में बैठने को बेंच बनेंगी। 3 लाख राम भक्तो को ठहरने की भी व्यवस्था बनाई जायेगी। मुख्य मार्ग से राममंदिर तक आने वाले 3 उपमार्गों को भी चोड़ा करने पर काम हो रहा है। नव्य अयोध्या की दिशा में भी कार्य प्रगति पर है। सरयू में आधुनिक क्रूज एवम नाव भी पर्यटको को आकर्षित करेगी।

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